Friday, April 25, 2014

आप पार्टी के भक्तो, ये रिश्ता क्या कहलाता है ?

आप पार्टी के भक्तो, ये रिश्ता क्या कहलाता है ??

कल तक जिस शीला को जेल भेजने की बात शाजिया करती थी आज जब वो त्रिवेन्द्रम प्रचार में गयी तो राजभवन में उनसे मुलाकात की और दोपहर का खाना भी साथ खाया ।

शीला दीछित ने भी प्रोटोकाल भूलकर उन्हें बाहर तक छोड़ने भी आई.........



अच्छा तो इसलिए Shila Jail नहीं गई और 380 page की फ़ाइल भी गायब हो गई
1.Yogander Yadev X Congress
2.Shazia Imli X Congress
3.Parshant Bhushan X Congress
4.Manish Sasodiya X Communist
5. केजरीवाल wife is X काँग्रेस

मुस्लिम तुष्टिकरण के बदले मुस्लिम कृतघ्नता

मुस्लिम तुष्टिकरण के बदले मुस्लिम कृतघ्नता !!

हिन्दी  में   यह कहावत   रसिद्ध है कि  कमजोर  व्यक्ति  को हर कोई   दबा   लेता है  . यानी  कमजोर  व्यक्ति या  समाज  को दूसरों   से सामने  झुकना  पड़ता  है  . यह   कहावत पूरी  तरह  से  भारत के   वर्त्तमान हिन्दुओं    पर    लागू  होती  . वैसे  इस बात  में  कोई  शंका  नहीं  है  ,कि हिन्दू  ज्ञान विज्ञानं  के क्षेत्र में  विश्वगुरु  माने  जाते है  .   और लगभग  सभी  देशभक्त  हैं , और   सभी  को  अपने  धर्म     पर  निष्ठां  है  .  लेकिन   आज हमें   इस  नयी  पीढ़ी  को  इन  सवालों  का  जवाब   देने  की  जरूरत   है  ,    कि हिन्दू  समाज के  देशभक्ति  ,  धर्म  निष्ठां    होने  के  बावजूद बाहर  से  आये हुए  मुस्लिम  हमलावर     वर्षों  तक  इस  देश  पर  हुकूमत कैसे  करते   रहे  , और  हिन्दू  धर्म  के पवित्र स्थानों को तोड  कर  कत्ले आम कैसे करते  रहे  , यही   नहीं  वह  कौन  से कारण  है कि आज  भी  उन  लुटेरों  की  औलाद  को    तुष्ट  करने  के लिए कुछ  हिन्दू अपने  ही  असली  भाइयों  के अधिकार  छीन  कर   देश द्रोही  और  हिन्दूद्वेषी   लोगों  को  दे  रहे  है  . फिर  भी मुसलमानों  की  मांगे  बढती  जाती  है  .

याद  रखिये  जब  तक  हम  हिन्दुओं  की  इस नयी  पीढ़ी  को   कोई संतोष जनक  उत्तर  नहीं  देंगे  नयी पीढ़ी  के  लोग  नाम से तो  हिन्दू   बने रहेंगे लेकिन  आचार विचार से     निधर्मी  , सेकुलर    यानि प्रोइस्लाम (Pro-islam  )   बनते  रहेंगे   . और मुसलमानों  को भारत में इस्लामी  राज  स्थापना  के लिए  ऐसे ही लोगों  की  जरुरत है  . क्योंकि ऐसे  ही  लोगों  की  मदद  से     मुसलमान बिना  खून  खराबा के और हिन्दुओं  के द्वारा  हिन्दुओं  को ही मिटा  कर  जल्द ही  अपना मकसद  पूरा  कर  लेंगे  , यदि हिन्दू अब  भी  नहीं  समझे  तो सन  2050  तक   हिंदुस्तान " जम्हूरियते इस्लामिये  हिन्द " बन  जायेगा  . क्योंकि  बीमार  व्यक्ति  या समाज शत्रु  का  मुकाबला  नहीं कर  सकता ,  और दुर्भाग्य  से आज हिन्दू  समाज अनेकों संक्रामक रोगों  से  ग्रस्त  है .और   इतिहास   साक्षी है कि जब जब  हिन्दू  समाज  इन  रोगों  से  बीमार  हुआ  है ,  हिन्दू  समाज  भारी  नुकसान  उठाना   पड़ा  है  .
1 -हिन्दुओं में व्याप्त संक्रामक  रोग 

हम इन रोगों  को संक्रामक  इसलिए   कहते  हैं  , क्योंकि  यह  रोग भारत में  मुसलमानों  के संपर्क   से  आया  था  और इसके  रोगाणु  आज भी  कुछ   हिन्दुओं   के  दिमागों  में मौजूद  हैं  . इनमे  कुछ खास रोग  इस प्रकार  हैं   , 1. सत्ता लोलुपता  2. वैदिक  हिन्दू  धर्म  का  अधकचरा  ज्ञान  3. देश  और  धर्म  की रक्षा  के  लिए शत्रु  को  मारने  की  जगह   खुद  मरने को श्रष्ठ समझना  4. विधर्मियों  द्वारा  किये  गए  अन्याय  और अत्याचारका उसी समय  मुंह तोड़  जवाब नहीं  देना  .5.जिहादी  विचारों का पर्दाफाश करने  वालों  का  साथ  नहीं  देना  और  सबसे  बड़ा  जानलेवा  रोग  तुष्टिकरण  है  , जिसे सेकुलरज्म  भी  कहते   हैं  , इस रोग के जीवाणु जिस भी  हिन्दू में प्रविष्ट  हो जाते है वह  हिन्दू  विरोधी   हो  जाता  है  , यह  बात इतिहास  से  साबित  होती  है  ,
अमेरिका  के एक ईसाई धर्मप्रचारक (  missionary   ) "डाक्टर मूरी  थर्सटन टाइटस -  Dr. Murray Thurston Titus  "( 1880 -31 अक्टूबर 1964 )  ने  1930  में एक पुस्तक  लिखी   थी  , जिसका  नाम  "Indian Islam , an Religious history of Islam in India" है  . इस  किताब  में  बताया गया  है की  सबसे   पहले  कुछ  हिन्दू  राजाओं  ने  अरबों   से व्यापर में  लाभ  कमाने के लिए और  मुसलमानों  के झूठे  धर्म  पर विश्वास करके   सारे भारत  को  मुस्लिम तुष्टिकरण  का रोग  लगा  दिया  .  और  वास्तव  में  जिसे हम  सेकुलरिज्म   का   प्रारम्भिक  रूप  कह  सकते  हैं   . किताब  में लिखा  है  ,

मौहम्मद साहब के जीवन काल से बहुत पहले से, अरब देशों का दक्षिणी-पूर्वी देशों से समुद्री मार्ग द्वारा भारत के मालाबार तट पर होते हुए बड़ा भारी व्यापार था। अरब नाविकों का समुद्र पर लगभग एकाधिकार था। मालाबार तट पर अरबों का भारत से कितना व्यापार होता था, वह केवल इस तथ्य से समझा जा सकता है कि अरब देश से दस हजार (10.000) घोड़े प्रतिवर्ष भारत में आयत होते थे  . और इससे कहीं अधिक मूल्य का सामान लकड़ी, मसाले, रेशम इत्यादि निर्यात होते थे। स्पष्ट है कि दक्षिण भारत के शासकों की आर्थिक सम्पन्नता इस व्यापार पर निर्भर थी। फलस्वरूप् भारतीय शासक इन अरब व्यापारियों और नाविकों को अनेक प्रकार से संतुष्ट रखने का प्रयास करते थे। मौहम्मद साहब के समय में ही पूरा अरब देद्गा मुसलमान हो गया, तो वहाँ से अरब व्यापारी मालाबार तट पर अपने नये मत का उत्साह और पैगम्बर द्वारा चाँद के दो टुकड़े कर देने जैसी चमत्कारिक कहानियाँ लेकर आये। वह भारत का अत्यन्त अवनति का काल था। न कोई केन्द्रीय शासन रह गया था और न कोई राष्ट्रीय धर्म। वैदिक धर्म का हास हो गया था और अनेकमत-मतान्तर, जिनका आधार अनेक प्रकार के देवी-देवताओं में विश्वास था, उत्पन्न हो गये थे। मूर्ति पूजा और छुआछूत का बोलबाला था। ऐसे अवनति काल में इस्लाम एकेश्वरवाद और समानता का संदेश लेकर समृद्ध व्यापारी के रूप में भारत में प्रविष्ट हुआ। मौहम्मद साहब की शिक्षाओं ने, जो एक चमत्कार किया है वह, यह है कि प्रत्येक मुसलमान इस्लाम का मिशनरी भी होता है और योद्धा भी। इसलिए जो अरब व्यापारी और नाविक दक्षिण भारत में आये उन्होंने इस्लाम का प्रचार प्रारंभ कर दिया। जिस भूमि पर सैकड़ों मत-मतान्तर हों और हजारों देवी-देवता पूजे जाते  हों वहाँ किसी नये मत को जड़ जमाते देर नहीं लगती विशेष रूप से यदि उसके प्रचार करने वालों में पर्याप्त उत्साह हो ओर धन भी हो  .

अवश्य ही इस प्रचार के फलस्वरूप हिन्दुओं के धर्मान्तरण के विरुद्ध कुछ प्रतिक्रिया भी हुई और अनेक स्थानों पर हिन्दू-मुस्लिम टकराव भी हुआ। क्योंकि शासकों की समृद्धि और ऐश्वर्य मुसलमान व्यापारियों पर निर्भर करता था, इसलिए इस प्रकार के टकराव में शासक उन्हीं का पक्ष लेते थे, और अनेक प्रकार से उनका तुष्टीकरण करते थे। फलस्वरूप् हिन्दुओं के धर्मान्तरण करने में बाधा उपस्थित करने वालों को शासन बर्दाश्त नहीं करता था। अपनी पुस्तक 'इंडियन इस्लाम' में टाइटस का कहना है कि ''हिन्दू शासक अरब व्यापारियों का बहुत ध्यान रखते थे क्योंकि उनके द्वारा उनको आर्थिक लाभ होता था और इस कारण हिन्दुओं के धर्म परिवर्तन में कोई बाधा नहीं डाली जा सकती थी। केवल इतना ही नहीं, अत्यन्त निम्न जातियों से धर्मान्तरित हुए भारतीय मुसलमानों को भी शासन द्वारा वही सम्मान और सुविधाएँ दी जाती थीं जो इन अरब (मुसलमान) व्यापारियों को दी जाती थी।''  . ग्यारहवीं शताब्दी के इतिहासकार हदरीसों द्वारा बताया गया है कि ''अनिलवाड़ा में अरब व्यापारी बड़ी संखया में आते हैं और वहाँ के शासक और मंत्रियों द्वारा उनकी सम्मानपूर्वक आवभगत की जाती है और उन्हें सब प्रकार की सुविधा और सुरक्षा प्रदान की जाती है।'' . दूसरा मुसलमान इतिहासकार, मौहम्मद ऊफी लिखता है कि कैम्बे(खम्भात  गुजरात ) के मुसलमानों पर जब हिंदुओं ने हमला किया तो वहाँ के शासक सिद्धराज (1094-1143 ई.) ने, न केवल अपनी प्रजा के उन हिंदुओं को दंड दिया अपितु उन मुसलमानों को एक मस्जिद बनाकर भेंट   की . केरल का एक शासक  मरक्कार  तो अपने मंत्रियों समेत अरब देश जाकर मुसलमान ही हो गया .था 

2-कांग्रेस  के राज में तुष्टिकरण 

सब  जानते हैं कि  मुसलमानों  ने इस देश  के  विकास  और देश वासियों  की भलाई  के लिए कुछ  भी  नहीं  किया  , जब इनकी हुकूमत थी तो   हिन्दुओं  के  मंदिर तोड़  कर  मस्जिदें  , मजार , मकबरे   बनाते रहे  और  हिन्दू  लड़कियों  से अपनी  हरमें  भरते  रहे  . और  आजादी  के  बाद भी सिर्फ  वोटर्या जिहादी    ही  पैदा  करते रहे  जो बड़े होकर  अपराधी बनते  हैं  .  फिर भी  अल्पसंख्यक  के बहाने हमेशा कोई  न कोई  सुविधा   मंगाते  रहते  हैं  . जैसा कि  मुसलमानों   का  स्वभाव  है  , यदि  उनको सारी  पृथ्वी  दे  दी  जाये  यह  संतुष्ट  नहीं  होंगे  , फिर  चाँद  और  सूरज    मागने   लगेंगे  . दुर्भाग्य  से    कांग्रेस की  सरकार  वोटों  के  लिए  यही    काम  करती  आयी  है  ,

और आजकल धूर्त     राजनेता मुसलमानों  के तुष्टिकरण  करने  वालों  को सेकुलर    बताते है  , और  जोभी  मुस्लिम तुष्टिकरण  के खिलाफ आवाज  उठाते है उनको सम्प्रदायवादी  मान  लिया  जाता  है  . जब भी  कांग्रेस  ऐसा  कहती है तो उसके साथ वामपंथी  और  कांग्रेस की  सहायक पार्टियां   यही  राग  अलापने  लगती  हैं  , जबकि संविधान  में सभी  के लिए  बिना  किसी धर्म  , जाती , भाषा और लिंग  के समान  अधिकार  देने  का  वादा किया  गया है   . फिर भी संविधान को ताक  पर रख के  मुस्लिम वोटों  के लिए मुसमानों  के लिए खजाने  खोल देते  हैं  .

उदहारण  के लिए  जब सन 2009  में यू पी  ए ( U.P.A.) की  सरकार  दोबारा सत्ता  पर आयी  तो , दिनांक 8 दिसंबर 2009  को मुसलमानों  के लिए  सरकारी  नौकरी में जाती  के आधार पर 10% आरक्षण    करा   दिया  . जो उनकी  संख्या  के अनुपात  से  अधिक था  . ( TheStateman 19 dec2009).इसके  पहले  इसी  सरकार ने मुसलमानों   के  लिए  5 %आरक्षण  दिया  था  और पढाई के लिए  सस्ती  दरों  पर    ब्याज  देने  का आदेश  बैंकों  को  दिया  था  . (Times ofIndia 8 jan 2009)यही नहीं   सरकार ने  2009 -2010 के  दौरान   मुसलमानों    के लिए  दी  जाने  वाले   अनुदान  की  राशि  बढाकर 74 %   कर  दी  . ( Indian Express18  dec2007).इसके  पहले  मनमोहन  सिंह  ने मुसलमानों  के  लिए 7780  करोड़  का एक  खास पैकेज देते  हुए  कहा था  कि  आगे यह राशि  बढाई  जा सकती  है. ( Anand  Bazar Patrika 9 Nov2007)

3-शिक्षा  के क्षेत्र  में  भी    तुष्टिकरण 

इस समय भारत में कुल पांच प्रौद्योगिक इंस्टीट्यूट ( I.I.T  ) चल रहे  हैं  , जिनमे प्रवेश  के लिए क्षात्रों को कड़ी परीक्षा  देना पड़ती  है , जिसे  पास  करने के बाद ही  मेरिट  के आधार  पर ही प्रवेश  दिया  जाता  है  . ऐसा शिक्षा  के स्तर को  बनाये  रखने  के किया  गया   है  . लेकिन 28  जून 2008  को मानव संसाधन विकास (एचआरडी (the Human Resource Development ) मंत्रालय ने एक मुस्लिम  क्षात्रों  को   बिना किसी  टेस्ट  के सीटें  आरक्षित  करने   का   नियम  बना  दिया  . आदेश जारी

 .
4-मदरसा की शिक्षा  को  मान्यता 

सब   जानते हैं कि  मुस्लिम  स्कूलों  यानी  मदरसों  में शिक्षा  के  नाम पर  कुरान  , हदीस और इस्लामी  कानून पढ़ाया  जाता  है  . जिस  से न तो कोई सरकारी नौकरी  मिल सकती  है  और  न  कोई रोजगार  मिल  सकता  है. अकसर  मदरसे से  पढ़े हुए बच्चे  आगे चल  कर मुल्ला  , मौलवी   और मुअज्जिन   बन  जाते  हैं   . या   किसी  दल  में घुस  कर नेता  बन  जाते  हैं  . इस्लामी तालीम के कारन जब कहीं  नौकरीनहीं  मिलती तो  अधिकांश  मुस्लिम युवा   जिहादी  और अपराधी   भी बन  जाते  हैं 

लेकिन  जब लालू  प्रसाद रेल मंत्री  बना  तो 7 जुलाई  2008 को   उसने    मदरसे की  शिक्षा  को  सरकारी नौकरी के लिए मान्य  कर दिया  . यही नहीं  जो  मुसलमान  बिलकुल  निरक्षर   थे उन्हें   कुली   के  रूप   नियुक्त  करके   नियमित  रेल्  कर्मचारी    का  दर्जा  दे  दिया  . जबकि  गैर मुस्लिम  युवकों  को  रेलवे में नौकरी  करने के लिए कई प्रकार  के कोर्स  करना  पड़ते  हैं  . यही नहीं  केंद्रीय  सरकार  ने   मुस्लिम  छात्रों  के  लिए  एक  छात्रवृत्ति  योजना  भी  चालू  कर दी  , जिसके मुताबिक  जिस मुस्लिम  परिवार  की आमदनी एक लाख प्रति  वर्ष  से  कम  होगी  उनके  बच्चों  को  दसहजार रूपया   प्रति  वर्ष छात्रवृत्ति  मिलेगी

3- मुस्लिम लड़कियों के लिए छात्रवृत्ति
खुद  को सेकुलर  बताने  वाली  सरकार ने  मुस्लिम  लड़कियों   के  एक  विशेष  अनुदान  देने  का  भी    आदेश  दिया  है  जिसके अनुसार   पोस्ट  ग्रेजुएट  स्तर तक 5000  और व्यावसायिक  कोर्स  के लिए  3000 और  डिग्री  स्तर  तक 4000  रुपया  वजीफा  दिया  जाता है  . यही नहीं  एम  बी बी एस   और एम  डी   या एम  फिल   के  कोर्स  में केवल 50 %    अंक  लाने  पर  मुस्लिम  छात्रों  को उत्तीर्ण  माने का  आदेश     दे दिया  . जो  सिर्फ   धर्ममांध    मुस्लिमों  को खुश  करने के  लिए  किया  गया  एक अन्याय  पूर्ण  और अनुचित    कार्य  है  .

4-शैक्षिक ऋण के  मामले  में  भेदभाव 
सरकार  हिन्दुओं  के  साथ  भेदभाव  करती  है  इसका  उदहारण  इस   बात  से चलता  है  कि  जब  कोई  हिन्दू उच्च शिक्षा  के लिए कर्ज लेता  है तो उस से  12 -14 %   प्रति वर्ष   की दर   से  ब्याज    लिया  जाता  है  , लेकिन अल्पसंख्यक छात्र से राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास और वित्त निगम केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत ऋण पर 3% ब्याज मिलता है।इसी तरह स्व-रोजगार के लिए वाणिज्यिक उद्यम में, एक हिंदू युवा 15-18% ब्याज पर वाणिज्यिक बैंकों से ऋण प्राप्त करने के लिए हकदार है; और वे 'अपनी जेबें; से परियोजना लागत के लिए 15-40% की मार्जिन मनी' का उत्पादन करने के लिए है बाकी बैंक से आता है। लेकिन अल्पसंख्यक युवाओं से उनकी जेबें 'मार्जिन मनी के रूप में' में केवल 5% डाल दिया है; अन्य 35% राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम द्वारा केवल 3% ब्याज पर प्रदान की जाती है .जबकि
एक निष्पक्ष धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक प्रणाली में, किसी भी सरकारी सहायता और अनुदान केवल आर्थिक स्थिति और योग्यता के आधार पर पूरी तरह आधारित वितरित किया जा सकता .अर्थात सरकार  संविधान  की धारा अर्थात सरकार  संविधान  की धारा 15(1)का  स्पष्ट  उल्लंघन  कर रही  है  जिसमे  कहा  गया  है  कि ""राज्य कोई नागरिक केवल धर्म, जाति, जाति, सेक्स, जन्म स्थान या इनमें से किसी के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा"

5-मुसलमानों  की  कृतघ्नता 
शायद  कांग्रेसी  और तथाकथित  सेकुलर  सत्ता के  नशे  में  आकर इस गलतफहमी   में पड़े हुए  हैं  कि  मुसलमानों   को    जीतनी अधिक सुविधायें   दी जायेगी  वह   उतने ही  देश  भक्त  बनते  जायेंगे  .     लेकिन इसका  उलटा  ही   असर    हो  रहा  है , मुसलमानों में  अलगाव  की भावना  और   उग्र   हो  रही है  ,   क्योंकि मुसलमान  अपना  स्वभाव  नहीं  बदल  सकते  ,   इस अलगाव  यानि  भारत विरोध   का बिस्मिल्लाह  कश्मीर  से हो चूका  है    जो कुछ  सालों के भीतर  सम्पूर्ण  भारत में   फ़ैल  जायेगा  ,  इसका  साबुत   कश्मीर  में लगाये  गए  नारों  से   मिलता  है  , वहां  मुसलमान  कहते  हैं ,
1-"ज़ालिमो  औ काफिरो  कश्मीर  हमारा छोड़  दो "
(O! Merciless, O! Kafirs leave our Kashmir)


2-"कश्मीर  में अगर  रहना  होगा  ,  अल्लाहो अकबर  कहना  होगा "
(Any one wanting to live in Kashmir will have to convert to Islam)


3-"ला शरकिया ला  गरबिया  इस्लामिया  इस्लामिया  "
From East to West, there will be only Islam

4-"मुसलमानो  जागो  , काफिरो भागो "
 (O! Muslims, Arise, O! Kafirs, scoot)


5-"इस्लाम  हमारा  मकसद  है ,कुरान  हमारा  दस्तूर  है ,जिहाद हमारा  रास्ता  है  "

(Islam is our objective, Q’uran is our constitution, Jehad is our way of our life)

6-"कश्मीर बनेगा  पाकिस्तान "

(Kashmir will become Pakistan)

7-"पाकिस्तान  से क्या रिश्ता  , ला इलाहा  इल्लल्लाह "

(Islam defines our relationship with Pakistan)

8-"दिल  में रखो अल्लाह का खौफ ,हाथ  में रखो क्लाशनीकॉफ "

(With fear of Allah ruling your hearts, wield a Kalashnikov)

9-"यहाँ क्या चलेगा , निजामे  मुस्तफा "

(We want to be ruled under Shari’ah)

10-" पीपुलस् लीग  का  क्या पैगाम  ,फ़तेह  , आजादी  और इस्लाम "

(“What is the message of People’s League? Victory, Freedom and Islam.”)

निष्कर्ष
इस प्रकार  के कई  धमकी वाले  नारे कश्मीर के अलगाववादी  संगठन " हिज्बुल मुजाहिदीन -Hijb-ulMujahidin  "   ने कश्मीर  के उर्दू  दैनिक समाचार" आफताब -Aftab "  ने    दिनांक  1 अप्रैल  1990   में  प्रकाशित  किये  थे  . साथ   ही यही  नारे  जगह  जगह  कश्मीर  के सभी शहरों  में दीवार पर पोस्टर  के रूप में  चिपका  दिए  थे  .  इसका उद्देश्य कश्मीर  के  हिन्दुओं  को भयभीत  करके कश्मीर   खाली  करने  का  था   .  बड़े ही  अफसोस  की  बातहै   कि एक तरफ  जब कांग्रेस  की सरकार  मुसलमानों  की तुष्टिकरण   में  लगी  हुई थी  , उसी  समय  कश्मीर के मुसलमान   अपनी   क्रतघ्ना    प्रकट  कर  रहे थे  . और  सभी  सेकुलर  यह  नजारा  चुपचाप  देख  रहे   थे किसी ने  इसका विरोध  करने  की हिम्मत  नहीं  दिखाई  . क्योंकि  सबके  मुंह में सेकुलरिज्ज्म ताला  लगा  हुआ  था  . कहावत है कि " मौन सम्मति  लक्षणम "  यानि   भारत के  सभी  मुसलमान  नेता यही  चाहते  हैं , कि  कश्मीर  सहित  पूरा  भारत   इस्लामी  देश  बन  जाये  .

  

Tuesday, April 22, 2014

शाजिया इल्मी ने कहा, कम्यूनल बनें मुसलमान


शाजिया इल्मी ने कहा, कम्यूनल बनें मुसलमान

23 Apr 2014, 0052 hrs IST,नवभारतटाइम्स.कॉम  
अब शाजिया इल्मी ने मुसलमानो से कहा, कम्यूनल बनो
 
अब शाजिया इल्मी ने मुसलमानो से कहा, कम्यूनल बनो
Photos 1
नई दिल्ली
​आम आदमी पार्टी की नेता शाजिया इल्मी का एक विडियो सामने आया है जिसमें वह मुसलमानों से कम्यूनल होने की अपील करती दिख रही हैं। इस विडियो के सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी बैकफुट पर आ गई है। पार्टी ने कहा है कि वह इस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करती है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस विडियो में शाजिया इल्मी कुछ मुसलमान व्यक्तियों के साथ बातचीत कर रही हैं। अनौपचारिक तौर पर हो रही इस बातचीत में वह आम आदमी पार्टी के लिए वोट देने की सिफारिश कर रही हैं।

इस बातचीत में शाजिया कहती हैं, 'मैं तो मुसलमानों से कहूंगी...इतने सेक्यूलर न बनिए।'

उन्हें बीच में रोकते हुए एक व्यक्ति कहता है कि हमें बनना पड़ेगा और इस्लाम के लिए काम करना पड़ेगा।

बातचीत आगे बढ़ती है तो शाजिया कहती हैं, 'मैं तो उलटा कहती हूं, मुसलमान बहुत सेक्युलर है। मुसलमानों को कम्यूनल होना पड़ेगा। मुसलमान कम्यूनल नहीं है, अपनों को नहीं देता है वोट। अरविंद केजरीवाल आपके अपने हैं। हम तो कहते हैं, सेक्युलर बहुत हो गया मुसलमान। आप कांग्रेस को जिता रहे हैं या किसी और को, जो आपका नुकसान कर रहे हैं। आप लोग इतने सेक्युलर न बनें। आप अपने घर का देखिए हिसाब-किताब।'

ऐसा लगता है कि शाजिया इल्मी को अहसास भी है कि वह एक विवादास्पद बात कह रही हैं। इसलिए वह कहती हैं, 'बहुत कॉन्ट्रॉवर्शल बात है, लेकिन जरूरी बात है। हम खुलकर कहेंगे।'

अब सवाल उठता है कि क्या चुनाव आयोग इस विडियो को देखकर शाजिया इल्मी के खिलाफ कार्रवाई करेगा। ऐसे ही बयान देने पर आजम खान, अमित शाह और कई अन्य नेताओं के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। वैसे, शाजिया इल्मी ने इसे 'प्ले ऑफ वर्ड्स' करार दिया है। उन्होंने सफाई दी है कि वह शब्दों से खेलने की कोशिश कर रही थीं।

आम आदमी पार्टी की प्रतिक्रिया
इस बीच शाजिया इल्मी के इस विडियो पर आम आदमी पार्टी ने कहा है कि हम न तो इस तरह की राजनीति में यकीन रखते हैं न ही इसका समर्थन करते हैं। पार्टी ने ट्वीट किया है कि हमारे प्रतिनिधियों को शब्दों का चुनाव सावधानी से करना चाहिए, ताकि किसी तरह की गलतफहमी की गुंजाइश न रहे।

'द रियल कम्यूनल फेस ऑफ द आम आदमी पार्टी' टाइटल से डाले गए इस विडियो को लेकर ट्विटर पर शाजिया इल्मी की जमकर आलोचना हो रही है। वहां #arrestshazia नाम से हैशटैग चल रहा है। पढ़िए, कुछ ट्वीट्स -



Sumit Kashyap So,if RSS says all Hindus shud vote for BJP, it is communal but when Shazia says all Muslim should be communal, its sarcasm. #ArrestShazia

नंदीता ठाकुर ‏@nanditathhakur after watching Sazia Ilmi asking Muslims to be communal i feel her candidature should be cancelled .. #ArrestShazia

Avinash Bhat ‏@avinashbhat01 There is no point in just #ArrestShazia She is just taking message of her boss Kejriwal to the ppl.So it shud be #ArrestKejriwal instead!

Mohit Sethi ‏@mohit_sethi23 33m Iam a proud Modi Supporter and I want both Togadia and Shazia to be arrested.. #ArrestShazia

Tuesday, April 15, 2014

सउदी अरब ने मुसलमानों की सहायता से मना कर दिया


जब सउदी अरब ने भारतीय मुसलमानों की सहायता से मना कर दिया तो नरेंद्र मोदी ने ही उन्‍हें बचाया!


Sundeep DevCategory: आधीआबादी ब्‍लॉगPublished on Tuesday, 15 April 2014 05:33


संदीप देव। सहारनपुर के कांग्रेस प्रत्‍याशी इमरान मसूद ने नरेंद्र मोदी के टुकड़े करने की चेतावनी दी। उसने कहा कि गुजरात में 4 फीसदी मुसलमान हैं, जबकि उनके यहां 42 फीसदी मुसलमान हैं। यहां हम मोदी के टुकड़े-टुकड़े कर देंगे। सबसे पहले इसकी शुरुआत वर्ष 2007 में कांग्रेस अध्‍यक्षा सोनिया गांधी ने मोदी को 'मौत का सौदागर' कह कर की थी। कांग्रेस ही क्‍यों, ज्‍यादातर राजनैतिक पार्टियां मुस्लिम वोट बटोरने के लिए मुसलमानों को नरेंद्र मोदी के नाम का भय दिखा रही हैं। मुस्लिम तुष्टिकरण को सेक्‍यूलरिज्‍म का नाम देकर राजनैतिक पार्टियां, पत्रकार और तथाकथित बुद्धिजीवी मुसलमानों को 'पोलिटिकली ब्‍लैकमेल' कर रहे हैं। लेकिन वह देश के मुसलमानों को यह कभी नहीं बताएंगे कि जब सउदी अरब ने उनकी सहायता करने से मना कर दिया था तो नरेंद्र मोदी ही आगे आए थे और उन्‍होंने उनके जान-माल की हिफाजत की थी!



मेरी पुस्‍तक 'साजिश की कहानी-तथ्‍यों की जुबानी' के साथ हज कमेटी के पूर्व चेयरमैन तनवीर अहमद



इस्‍लाम के मूल स्‍थान वाले देश सउदी अरब ने जब भारतीय मुसलमानों की रक्षा करने से मना कर दिया था तो तथाकथित 'सांप्रदायिक' नरेंद्र मोदी ही उन्‍हें बचाने के लिए आगे आए थे और 6000 मुसलमानों की रक्षा की थी! यह घटना गुजरात दंगा-2002 के समय की है। तब के हज कमेटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन तनवीर अहमद ने चीख-चीख कर उस वक्‍त यह सच्‍चाई वरिष्‍ठ मुस्लिम नेताओं, मीडिया और मुस्लिम नौकरशाहों को बताया था, लेकिन इस पूरे मामले को दबा दिया गया था। यह बात खुद मुझे हज कमेटी ऑफ इंडिया के तत्‍कालीन अध्‍यक्ष तनवीर अहमद ने बताया। वह लगातार 8 साल तक हज कमेटी ऑफ इंडिया अध्‍यक्ष रह चुके हैं।

जिस वक्‍त गुजरात दंगे में झुलसा हुआ था, उस वक्‍त हज कमेटी के अध्‍यक्ष होने के नाते 18 मार्च से 30 मार्च तक अहमदाबाद एयरपोर्ट पर कंट्रोल रूम बनाकर तनवीर अहमद हज यात्रियों को सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचाने में जुटे रहे थे। मुस्लिम समाज से कोई उनकी मदद को नहीं आया। एक मात्र नरेंद्र मोदी ही वह व्‍यक्ति थे जो न केवल राज्‍य के मुख्‍यमंत्री के नाते, बल्कि इंसानियत के नाते भी एक-एक हज यात्रियों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाने के लिए तनवीर अहमद के साथ मिलकर काम कर रहे थे। एक भी हज यात्री दंगे का शिकार नहीं हुआ!

तनवीर अहमद जी से मैं कभी नहीं मिला था। वह 13 फरवरी को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित नरेंद्र मोदी पर लिखी मेरी पुस्‍तक 'साजिश की कहानी-तथ्‍यों की जुबानी' के लोकार्पण अवसर पर आए थे और कार्यक्रम के बाद चले गए। एक दिन अचानक वो मुझे भारतीय जनता पार्टी के 11, अशोका रोड कार्यालय में मिल गए। वह वर्तमान में भाजपा के राष्‍ट्रीय कार्यसमिति के सदस्‍य हैं। उन्‍होंने कहा, आपने अपनी पुस्‍तक में हज यात्रियों की सुरक्षा की जो बात लिखी है, उसका नेतृत्‍व तो मैं ही कर रहा था! इतनी बड़ी घटना को उस वक्‍त हिंदी के केवल एक अखबार ने उठाया था और आज भी देश की अधिकांश जनता इस बात से अनजान ही है। वैसे काफी सारी जानकारियां ऐसी है, जिसका पता आज भी देश को नहीं है। मैंने आश्‍चर्य से पूछा क्‍या..?

तनवीर अहमद ने बताया, वर्ष 2002 में गोधरा के बाद गुजरात में दंगे शुरू हो चुके थे। उस वक्‍त मैं हज कमेटी ऑफ इंडिया का अध्‍यक्ष था। हज कमेटी ऑफ इंडिया के अध्‍यक्ष का ओहदा एक केंद्रीय मंत्री के समकक्ष होता है। गुजरात से करीब 6000 मुसलमान हज यात्रा के लिए सउदी अरब गए थे। गुजरात के हालात ठीक नहीं थे। इसलिए भारत सरकार ने दूतावास के जरिए सउदी अरब सरकार से यह निवेदन किया था कि वह कम से कम दो माह के लिए भारतीय मुसलमानों को अपने यहां ठहराने की व्‍यवस्‍था करें। या फिर जब तक गुजरात के हालात ठीक नहीं हो जाते तब तक भारतीय मुसलमानों को अपने यहां रुकने की इजाजत दे। भारत सरकार भारतीय मुसलमानों के ठहरने और उनके खाने-पीने का खर्च उठाने को तैयार थी। लेकिन मुसलमान देश होते हुए भी सउदी अरब ने मुसलमानों की जिम्‍मेवारी लेने से इनकार कर दिया। सउदी सरकार ने स्‍पष्‍ट शब्‍दों में मना करते हुए कहा कि यह भारतीय मुसलमानों को सउदी में रुकने की इजाजत नहीं दे सकती है। उन्‍हें अपने तय समय में ही अपने देश लौटना होगा।

तनवीर अहमद के मुताबिक, उसके बाद मैंने नरेंद्र मोदी से बात की। उन्‍होंने मुझे पूरा सहयोग और सभी भारतीय मुसलमान हज यात्रियों को सुरक्षा मुहैया कराने का वचन दिया। अहमदाबाद एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्‍यवस्‍था काफी बढ़ा दी गई। गुजरात सरकार ने वहां तीन कंट्रोल रूम का निर्माण कराया, जहां हज यात्री आकर ठहरते थे और जहां से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाती थी। मैं अकेला 18 मार्च से लेकर 30 मार्च तक एयरपोर्ट पर ही रहा। हज यात्रियों को एयरपोर्ट से सुरक्षित निकाल कर बसों में ले जाया जाता था, जिसकी पूरी सुरक्षा सरकार सुनिश्चित करती थी। मुझे उसी दौरान महसूस हुआ कि धर्म से कहीं अधिक बड़ा है राष्‍ट्र! यदि धर्म ही बड़ा होता तो कुछ समय के लिए भारतीय मुसलमानों को अपने यहां ठहराने से सउदी अरब मना नहीं करता, लेकिन इस्‍लाम का मूल स्‍थान होते हुए भी सउदी अरब ने इसके लिए मना कर दिया!

वहीं गुजरात के मुख्‍यमंत्री पर हिंदुवादी होने का आरोप लग रहा था, लेकिन उन्‍होंने राष्‍ट्र के नागरिकों की सुरक्षा का ख्‍याल करते हुए उन सभी 6000 हज यात्रियों की न केवल एयरपोर्ट पर सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि उन्‍हें सुरक्षित अपने-अपने घरों तक भी पहुंचाया। ये सभी हज यात्री गुजरात के 400 गांवों से हज यात्रा पर गए थे। दंगे के माहौल में 400 गांवों तक एक-एक मुसलमान यात्री की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्‍हें घरों तक पहुंचाना इतना आसान नहीं था, लेकिन नरेंद्र मोदी ने इसे करके दिखाया। मेरा तो स्‍पष्‍ट मानना है कि धर्म से कहीं बड़ा है राष्‍ट्र। और हर मुसलमान से यही अपील करूंगा कि वह राष्‍ट्र को सर्वोपरी माने, क्‍योंकि देश के बाहर उसकी पहचान एक भारतीय होने के नाते ही है न कि मुसलमान होने के नाते।

तनवीर अहमद ने बातचीत के दौरान सेक्‍यूलरिज्‍म का घिनौना चेहरा भी हमारे समक्ष रखा। उन्‍होंने बताया, जिस दौरान अहमदाबाद एयरपोर्ट पर मैं हज यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा था, उस दौरान एक दिन अचानक पूर्व मंत्री आरिफ मोहम्‍मद खां एक प्रतिनिधिमंडल लेकर स्थिति का जायजा लेने पहुंच गए। इस प्रतिनिधिमंडल को सुरक्षा भी मोदी सरकार ने उपलब्‍ध कराया था। उस प्रतिनिधिमंडल में सेक्‍यूलरिज्‍म के झंडबदार व वरिष्‍ठ पत्रकार कुलदीप नैयर और कैबिनेट सचिव जफर सैफुल्‍ला भी शामिल थे। कुलदीप नैयर ने मुझसे पूछा, क्‍या आप आखिरी हज यात्री के सउदी से लौटने का इंतजार करते हुए अंत तक यहां रुकेंगे। मैंने कहा, हां मैं जब तक आखिरी हज यात्री की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर लेता, मैं अहमदाबाद एयरपोर्ट से हिलूंगा भी नहीं। इस प्रतिनिधिमंडल ने स्थिति का पूरा जायजा लिया, हज यात्रियों से बात की और संतुष्‍ट होने पर लौटे। लेकिन मुझे आश्‍चर्य तब हुआ जब प्रतिनिधिमंडल में शामिल तीनों सदस्‍यों ने इस पर अपना मुंह सिल लिया। मीडिया या देश के समक्ष उन्‍होंने इसके बारे में कुछ भी नहीं बताया कि किस तरह से हज यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। कुलदीप नैययर खुद को धर्मनिरपेक्ष पत्रकार कहते हैं, लेकिन उन्‍होंने इस पूरे मामले को ही दबा दिया और आज तक उस पर एक शब्‍द भी नहीं लिखा है। उस वक्‍त भी एक मात्र नईदुनिया अखबार ने इसके बारे में लिखा। वर्ना सबने देश की जनता को गुमराह करने का काम किया।

गौरतलब गुजरात दंगे के समय राज्‍य के 6000 यात्री हज यात्रा के लिए गए हुए थे। मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात पुलिस को निर्देश दिया था कि 6000 हाजी हज कर गुजरात लौट रहे हैं। उन्‍हें हर हाल में सुरक्षा प्रदान किया जाए। ये सभी हाजी गुजरात के 400 गांव व कस्‍बों से हज करने गए थे। सरकार ने सभी 6000 हाजियों को सुरक्षित उनके घर तक पहुंचा दिया। हालात के नियंत्रित होने के इंतजार और इन्‍हें सुरक्षित घर तक पहुंचाने में सरकार को 30 मार्च 2002 तक का वक्‍त लग गया, लेकिन इनमें से एक को भी हिंसा का सामना नहीं करना पड़ा था।

इतना ही नहीं, पूरे दंगे के दौरान नरेंद्र मोदी सरकार ने दंगाईयों के बीच फंसे हुए करीब 24 हजार मुसलमानों को बचाया था, जिसे उस वक्‍त की मीडिया ने दबा दिया था। गुजरात दंगे की जांच सीधे सर्वोच्‍च न्‍यायालय की निगरानी में हुई है। देश में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी दंगे की संपूर्ण जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में उसके द्वारा गठित विशेष जांच दल ने किया हो। कांग्रेस सरकारों के समय हुए कई दंगों में आज तक न तो एफआईआर दर्ज की गई है और जिसमें एफआईआर दर्ज हुई भी है तो उनमें आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं किया गया है। इसलिए गुजरात दंगे की जांच रिपोर्ट पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है। यह जांच रिपोर्ट कहती है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने विभिन्‍न जगहों पर दंगाइयों के बीच फंसे हुए करीब 24000 मुसलमानों को न केवल बचाया, बल्कि उन्‍हें सुरक्षित स्‍थानों तक भी पहुंचाया।

मोदी विरोधी हमेशा ये आरोप लगाते रहे हैं कि नरेंद्र मोदी की सरकार ने हिंदूओं को दंगा करने की खुली छूट दी और मुसलमानों को करने के लिए छोड़ दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी की जांच इस असत्‍य को सिरे से खारिज करती है। पेश है कुछ महत्‍वपूर्ण जगहों पर दंगाईयों की भीड़ के बीच से बचाकर निकाले गए मस्लिम समूह के संबंध में जानकारी:-

* अहमदाबाद पुलिस ने नूरानी मस्जिद में फंसे हुए 5000 मुसलमानों को बचाया
* मेहसाना जिला के सरदारपुरा में दंगाईयों से घिर चुके 240 मुसलमानों को न केवल बचाया, बल्कि उन्‍हें वहां से बाहर ले जाकर सुरक्षित स्‍थान पर पहुंचाया भी।
* नरदीपुर व पोरे गांव में 450 मुसलमानों को बचाकर दूसरी जगह पहुंचाया गया
* संजोली गांव में 200 मुस्लिमों को बचाया गया
* वड़ोडरा जिला के फतेहपुर गांव में फंसे 1500 मुसलमानों को बचाया गया
* कावत गांव से 3000 हजार मुसलमानों को बचाकर निकाला गया
* एहसान जाफरी जहां मरे उस गुलबर्ग सोसायटी से उनकी पत्‍नी जाकिया जाफरी समेत करीब 180 मुसलमानों को बचाकर सुरक्षित जगह पहुंचाया गया

बाबा साहब अम्बेडकर का नाम भारत रत्न के लिए

एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने भारत सरकार से पूछा था की नेहरु और इंदिरा गाँधी को भारत रत्न उन्हें उनके प्रधानमंत्री पद पर रहने के दौरान मिला था तो उनका नाम भारतरत्न के लिए किस ने अनुमोदित किया था ...

और बाबा साहब अम्बेडकर का नाम भारत रत्न के लिए क्या कांग्रेस के ६० सालो में सत्ता में रहते एक बार भी किया गया था ?

जबाब आप खुद देखिये .... ये दोगले नीच फर्जी गाँधी खुद ही अपना नाम भारतरत्न के लिए भेजे थे .. इंदिरा गाँधी और कामुम लम्पट जवाहर लाल नेहरु ने प्रधानमंत्री पद पर रहने के दौरान अपना ही नाम अपनी ही सरकार को भेजा था की मुझे भारत रत्न दिया जाये

और ये पामेरियन शहजादे राहुल गाँधी जो दलितों की बात करते है सच्चाई ये है की बाबा साहेब का नाम कांग्रेस के राज में एक बार भी भारतरत्न के लिए अनुमोदित नही किया गया था .. बाबा साहेब को भारत रत्न तक जाकर मिला जब केंद्र में जनता दल और बीजेपी की सरकार बनी और वीपी सिंह प्रधानमंत्री बने थे ...

ये सच्चाई जानने के बाद भी जो दलित कांग्रेस को वोट देता है उसे धिक्कार है

Saturday, April 12, 2014

आईएएस या आईपीएस बन गया तो मैं जिहाद और इस्लाम के लिए काम करूंगा !!

सिमी का एक संस्थापक सदस्य है जिसका नाम है पी ए इनामदार

सिमी पर तो बैन लग गया लेकिन मुंबई और महाराष्ट्र मे पी ए इनामदार बहुत ही ज्यादा सक्रिय है ! इसकी संस्था का नाम है "आज़म कैम्पस"

इनामदार ने अब इस "आज़म कैम्पस" मे मुसलमानों को आईएएस, आईपीएस की मुफ्त मे ट्रेनिंग देने की शुरुवात की है ! और उसकी संस्था मे प्रवेश लेने से पहले हर मुसलमान नवयुवक को एक सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर करने होते हैं जिसमे लिखा होता है की अगर मैं आईएएस या आईपीएस बन गया तो मैं जिहाद और इस्लाम के लिए काम करूंगा !!

मित्रों ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं है ! भारत की अखंडता , स्वतंत्र्य और हिन्दुत्व के लिए ये बहुत बड़ा खतरा है !! .... जब भी दंगे या कोई अप्रिय घटना होती है तो सबसे पहले पुलिस को बुलाया जाता है ! अब जरा कल्पना कीजिये की कोई सांप्रदायिक दंगा हुआ और वहाँ पर ये इनामदार की संस्था के पढ़ाए गए आईपीएस अफसर पहुँच गए तो क्या होगा ??? .... इसकी कल्पना करना भी विकराल परिस्थितियों मे डाल देता है !.... निर्दोष लोगों पर झूठे केस बनाए जाएंगे ! पुलिस की सहायता से दंगों को बढ़ावा दिया जाएगा !!....

दोगले और नीच कॉंग्रेस और एनसीपी के नेता वोटबैंक के लिए इस देशद्रोही और आतंकी पी ए इनामदार के तलवे चाटते हैं !!

मित्रों ये एक silent jihad है जो चुपके चुपके अपने पैर पसार रहा है !!! और इसमे कॉंग्रेस+ एनसीपी के नेताओं की भी मिलीभगत है !!

फोटो मे भी आप देख सकते हैं ! लाल घेरे मे पी ए इनामदार और सलमान खुर्शीद !

ब्रिटिश सैनिकों को गीता का उद्बोधन

पिछले 15 मार्च 2014 को हिन्दू समाज के लिए गौरव करने का दिन था

15 मार्च 2014 को ब्रिटिश सेना के सैनिकों को हिन्दू संत और आचार्य ध्रुव छत्रालिया जी ने गीता का उद्बोधन दिया

ये पूरा व्याख्यान साढ़े तीन घंटों तक चला ... संत ध्रुव जी ने इस पूरे व्याख्यान के बीच कहीं भी रुके नहीं । इस सत्संग के बीच ब्रिटिश आर्मी के 7 रेजीमेंट के जवान शामिल हुए

इस सत्संग मे उन्होने ब्रिटिश सेना को स्वधर्म और दायित्वों को बताया साथ ही साथ इस सत्संग के बीच श्री कृष्ण के अलावा आचार्य ध्रुव जी ने गणपती के बारे मे भी सैनिकों को बताया । आचार्य जी ने हिन्दू होने के कई लक्षण भी सैनिकों को बताए , इसके साथ ही साथ ध्यान , प्राणायाम की कई मुद्राएँ भी सैनिकों को सिखाई गईं जिससे वो अपने मानसिक तनाव को कम कर सकें

आचार्य ध्रुव जी ने बताया की गीता सिर्फ एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं है बल्कि ये पूरे विश्व के लिए श्री कृष्ण द्वारा दिया गया मैनेजमेंट का सबसे बड़ा उपहार है

इस सत्संग के बाद उनसे ब्रिटिश सेना के जवानों ने कुछ सवाल भी पूछे जिनका उन्होने पूरे तथ्यों के साथ उत्तर दिया ।

जहां एक ओर भारतीय सैनिक मानसिक तनाव मे आकर आत्महत्या और अपने दूसरे साथियों की हत्या कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर ब्रिटिश आर्मी हिन्दू ग्रन्थों से मानसिक तनाव दूर करने के तरीके सीख रही है !
अब ये मत कह देना की भारतीय सैनिकों को भी गीता के पाठ सिखाए जाने चाहिए ... अगर आपने ने ऐसी मांग कर दी तो इस सेकुलर देश मे आप सांप्रदायिक घोषित कर दिये जाएंगे .............

Friday, April 11, 2014

अडाणी के प्लेन से उनका SEZ देखने गए थे वाड्रा


अडाणी के प्लेन से उनका SEZ देखने गए थे वाड्रा

12 Apr 2014, 0953 hrs IST,नवभारतटाइम्स.कॉम  
Adani
गौतम अडाणी और रॉबर्ट वाड्रा
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नई दिल्ली
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा एकबार फिर से चर्चा में हैं। ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी के साथ नजर आ रहे हैं। ये तस्वीरें तब की हैं, जब रॉबर्ट वाड्रा अडाणी ग्रुप के एयरक्राफ्ट पर सवार होकर अडानी के प्रॉजेक्ट देखने गए गुजरात के कच्छ गए थे। गौरतलब है कि पिछले दिनों कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी को अडाणी ग्रुप से रिश्तों को लेकर निशाने पर लिया था।

इस तस्वीर के सामने आने के बाद कांग्रेस बैकफुट पर आती दिख रही है। रॉबर्ट वाड्रा और गौतम अडाणी की यह तस्वीर साल 2009 की है। उस वक्त वाड्रा तब गुजरात के मूंदड़ा में अडाणी पोर्ट और अडाणी पावर प्लांट को देखने आए थे। वाड्रा और गौतम अडाणी एकसाथ अडाणी के प्राइवेट एयरक्राफ्ट में ही वहां पहुंचे थे। इससे पहले कांग्रेस भी कई मौकों पर नरेंद्र मोदी पर आरोप लगा चुकी है कि वह अडाणी ग्रुप के प्लेन से यात्रा करते हैं।
पिछले दिनों उदयपुर में हुई रैली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी नरेंद्र मोदी को घेरते हुए कहा था, 'बीजेपी में आडवाणी बाहर और अदाणी अंदर।' राहुल गांधी ने मोदी और अडाणी ग्रुप की करीबियों का जिक्र करते हुए कहा था कि एक शख्स को गुजरात सरकार ने करोड़ों एकड़ जमीन मुफ्त में दे दी। अब जो तस्वीरें सामने आई है, उसमें रॉबर्ड वाड्रा और गौतम अडाणी एकसाथ दिख रहे हैं। एक तस्वीर में दोनों बैठकर कुछ बात कर रहे हैं और दूसरी तस्वीर में वॉक करते दिख रहे हैं।

सबसे पहले अरविंद केजरीवाल ने साल 2012 में नरेंद्र मोदी और अडाणी ग्रुप के रिश्ते पर सवाल उठाए थे। उसके बाद से मोदी को घेरने के लिए वह लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। लेकिन पिछले दिनों कांग्रेस ने भी इस बात को लेकर मोदी पर निशाना साधना शुरू किया था। मगर इस तस्वीर के सामने आने के बाद वह बैकफुट पर आती नजर आ रही है।

मोदी के खिलाफ डॉन अंसारी के समर्थन से भी केजरीवाल को परहेज नहीं


मोदी के खिलाफ डॉन अंसारी के समर्थन से भी केजरीवाल को परहेज नहीं

11 Apr 2014, 1511 hrs IST,नवभारतटाइम्स.कॉम  
वाराणसीः मोदी को हराने के लिए मुख्तार अंसारी से हाथ मिलाने को केजरीवाल तैयार
 
वाराणसीः मोदी को हराने के लिए मुख्तार अंसारी से हाथ मिलाने को केजरीवाल तैयार
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नई दिल्ली
वाराणसी का चुनावी दंगल बेहद रोमांचक होता जा रहा है। कई संगीन हत्याओं के आरोपी और फिलहाल आगरा जेल में बंद डॉन मुख्तार अंसारी वाराणसी के चुनावी मैदान से हट गए हैं। इस बीच, आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी को हराने के लिए जो भी ताकत समर्थन में आती हैं हम साथ लेने को तैयार हैं। चर्चा यह है कि मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी और केजरीवाल के बीच दिल्ली में मुलाकात भी हुई है।

गुरुवार को अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल के प्रेजिडेंड और मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी ने कहा, 'मैं नहीं चाहता कि बनारस में सेक्युलर वोट बंटे और नरेंद्र मोदी की जीत पक्की हो जाए। ऐसे में न मुख्तार न ही उनकी पत्नी अफशा अंसारी वाराणसी से चुनाव लड़ेंगी। हालांकि, मुख्तार घोसी सीट से चुनाव लड़ेंगे।'

2009 के आम चुनाव में भी डॉन मुख्तार अंसारी बनारस के चुनावी दंगल में थे। उन्होंने तब के बीजेपी कैंडिडेट मुरली मनोहर जोशी को तगड़ी टक्कर दी थी और महज 17 हजार वोटों से हारे थे। मुख्तार को पिछले चुनाव में करीब 1,85,000 मत मिले थे। पिछली बार आम चुनाव के दौरान काशी में 'जोशी जिताओ, मुख्तार हराओ' का नारा चला था और इस सीट पर लड़ाई हिंदू बनाम मुसलमान हो गई थी और इसका फायदा जोशी को मिला।

मुख्तार अंसारी के हटने से किसको फायदा?
यह सवाल लाख टके का है कि मुख्तार अंसारी के हटने से किसको फायदा होगा? इतना तो तय है कि अंसारी के हटने से मुस्लिम वोट अब किसी एक कैंडिडेट के साथ जाएगा और वह मोदी तो नहीं होंगे। बनारस के 2009 के चुनावी नतीजे के बारे में कहा जाता है कि बीजेपी की जीत मुख्तार अंसारी ने ही सुनिश्चित की थी। मुख्तार अंसारी के कारण बनारस में रातोरात सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हुआ था और नतीजा मुरली मनोहर जोशी के पक्ष में गया था।

मुख्तार अंसारी के हटने से वाराणसी में भले मुस्लिम वोटों का बंटवारा थम सकता है, लेकिन सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की आंशका भी प्रबल बनती है। अंसारी पूर्वांचल के जाने-माने गैंगस्टर रहे हैं। मुख्तार अंसारी पर पूर्वांचल में संगठित गुंडागर्दी को खाद-पानी देने के संगीन आरोप हैं। पूर्वांचल में ठेके को लेकर होने वाले गैंगवार में मुख्तार अंसारी एक बड़ा नाम है। वह फिहलाल मऊ से विधायक हैं। हिन्दू खासकर सवर्ण हिन्दू मुख्तार के विरोधी माने जाते हैं। ऐसी स्थिति में मुस्लिम वोट लेने के लिए मुख्तार अंसारी का समर्थन हिन्दुओं के एक मजबूत तबके को नाराज करने का जोखिम कौन उठाएगा?

केजरीवाल ने दिए मुख्तार से समर्थन लेने के संकेत
शुक्रवार को आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने अमृतसर में कहा कि मोदी और राहुल गांधी को हराने के लिए जो भी ताकत समर्थन में आती हैं हम साथ लेने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मोदी और राहुल गांधी विरोधी सारी ताकतों को एक साथ आने की जरूरत है। सूत्रों के अनुसार, अफजाल और केजरीवाल के बीच कई दौर की बातचीत हुई है और इस बात की उम्मीद है कि मुख्तार, केजरीवाल को अपना समर्थन दे सकते हैं। यदि मुख्तार अंसारी का समर्थन 'आप' लेती है तो बनारस में एक बार फिर से सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का माहौल बन सकता है। लड़ाई का रुख मोदी बनाम केजरीवाल हो जाएगा।

अफजाल अंसारी मोदी के खिलाफ केजरीवाल को ही दमदार कैंडिडेट मान रहे हैं और उनका मन 'आप' को समर्थन करने का है। अफजाल ने कहा कि उनकी पार्टी पर आरोप लग रहे हैं कि मुख्तार अंसारी को उतारने से सेक्युलर वोट बंट रहे हैं, ऐसे में सेक्युलर वोटों को मजबूत करने के लिए वह रेस से हट रहे हैं। उन्होंने कहा, 'अब यह एसपी, बीएसपी और कांग्रेस पर है कि वे मोदी को किस तरह से रोकना चाहते हैं, इसका फैसला करें। केजरीवाल का बनारस में अपना कोई आधार नहीं है और न ही उनका कोई वोट बैंक है, लेकिन यदि अफजाल उन्हें अपना समर्थन देते हैं तो बनारस के लगभग चार लाख मुसलमानों के सहयोग से वह सीधी लड़ाई में आ सकते हैं। केजरीवाल ने भी यह कहना शुरू कर दिया है कि मोदी को हराने के लिए वह किसी का भी समर्थन ले सकते हैं।

क्या करेंगे अजय राय ?
कांग्रेस के टिकट पर मोदी को बनारस के हराने का दावा कर रहे पूर्व भाजपाई अजय राय की डॉन मुख्तार अंसारी से पुरानी अदावत है। मुख्तार अंसारी पर अजय राय के भाई अवधेश राय की 1991 में उनके घर के सामने हत्या करने का आरोप है। इसके बाद से अजय राय भी मुख्तार अंसारी के निशाने पर रहे। कोर्ट में गवाही के दौरान अजय राय पर भी मुख्तार पर हमला करवाने का आरोप है। उस वक्त अजय राय बाल-बाल बच गए थे। मुख्तार अंसारी पर 29 नवंबर 2005 में मोहम्मदाबाद से तत्कालीन बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या का भी आरोप है। उस दिन कृष्णानंद राय अपने भतीजे की शादी में शरीक होने पैतृक गांव गए हुए थे। वहीं राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कृष्णानंद राय तब पूर्वांचल में बीजेपी के ताकतवर नेता थे।

राय मोहम्मदाबाद से मुख्तार अंसारी के भाई को ही हराकर विधायक बने थे। तब से वह मुख्तार अंसारी के निशाने पर थे। कृष्णानंद राय की हत्या के बाद पूर्वांचल का माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। कृष्णानंद राय भी अजय राय की तरह भूमिहार जाति से थे। ऐसे में मुख्तार केजरीवाल के साथ जाते हैं तो लड़ाई मोदी बनाम 'आप' होगी। अजय राय तीसरे नंबर पर आ जाएंगे। इस हालत में अजय राय की जाति भी उन्हें किस आधार पर समर्थन करेगी? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिन पर बीजेपी अजय राय को घेर सकती है। इन सवालों का जवाब देना अजय राय के लिए इतना आसान नहीं होगा।

Tuesday, April 8, 2014

मुस्लिम नारियों के हित में समान नागरिक संहिता

भारत की सभी मुस्लिम नारियों के हित में समान नागरिक संहिता (कॉमन सिविल कोड़) के लाभ

इस पोस्ट को अधिकाधिक मुस्लिम महिलाओ तक पहुंचा कर जनजागृति अभियान में योगदान दें :-

1. उनका पति घर बैठे तीन बार तलाक ! तलाक !! तलाक !!! कहकर पत्नी को घर से नहीं निकाल सकेगा ।
2. यदि निकाला तो हिन्दू
तलाकशुदा महिलाओं की भांति उसे एक निश्चित राशि पत्नी को देना होगी,
जो तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को नहीं मिलती ।
3. तलाकशुदा मुस्लिम महिला को मात्र मेहर मिलता है जो जीवन यापन के लिए एक दो वर्ष भी नहीं चलता ।
4. कॉमन-सिविल कोड लागू
हो गया तो पत्नी को तलाक देने के लिए कोर्ट के चक्कर लगाते - लगाते मुसलमान पुरूषों के जूते घिस जायेंगे ।
5. मुस्लिम स्त्री को आज तलाक देने का अधिकार
नही हैं । वह उसे मिल जाएगा । घुट- घुट कर
मरना नहीं पड़ेगा ।
6. मुसलमान लड़की को आज पिता की संपत्ति में मात्र एक तिहाई का अधिकार है वह बराबरी का हो जायेगा ।
7. मुस्लिम स्त्री पति द्वारा तलाक दिए जाने पर तीन माह तक इद्दत की मुद्दत
पूरी होने के बाद ही दूसरी शादी कर सकती है । कॉमन सिविल कोड लागू होते
ही पति द्वारा तलाक दिए जाने पर तुरंत विवाह कर सकेगी।
8. भूल-चुक हो जाने पर या गलती से क्रोध में पति के मुंह से तीन बार तलाक निकल जाने पर निरपराध मुस्लिम महिला पुनः अपने
पति के साथ नहीं रह सकती । उसे तीन माह बाद किसी दूसरे से निकाह
करना पड़ता है, उससे तलाक दिए जाने पर
फिर तीन माह बाद अपने पूर्व पति से विवाह कर सकती है । इस झंझट से
मुक्ति मिलेगी । बिना कोर्ट में गये तलाक मान्य नही होगा और बीच में किसी दूसरे कि पत्नी बननें और शरीर अपवित्र करने
की बाध्यता भी नहीं होगी और नए पति ने यदि तलाक नहीं दिया तो आजीवन
न चाहते हुए भी उसकी पत्नी बने रहना भी सम्भव न रहेगा ।
9. शरियत में निकाह हराम हो जाने की स्थिति में स्त्री अपने विवाहित पति के पास नहीं रह सकती उसे किसी दूसरे से निकाह कि रश्म अदा करनी पड़ती है|
10. बैंगलोर में ७००० और मुम्बई में ५००० मुस्लिम लड़किओं ने अपने क्लब बना आजीवन विवाह न करने का निश्चय कर लिया है ।
सारे संसार कि पड़ी लिखी मुस्लिम महिलायें कुंवारी रहना पसंद कर रही है ।
उन्हें शरियत से निकाह कर जीवन भर पति की गुलामी पसंद नही । कॉमन सिविल कोड से उन्हें पुरुष की गुलामी से मुक्ति मिल जायेगी ।
11. ससुर द्वारा बलात्कार किये जाने पर पति के लिए अपनी पत्नी हराम हो जाती है, वह माँ मान ली जाती है । ससुर को कोई दंड नहीं मिलता । कॉमन सिविल कोड से इस मानवताहीन प्रथा से मुस्लिम महिलाएँ मुक्त हो जायेगी ।
12. पति के कहीं खो जाने पर भी मुस्लिम महिला कहीं दूसरा विवाह नहीं कर
सकती । उसे अपने पति की ६३ वर्ष की आयु हो जाने पर ही दूसरे निकाह की अनुमति मिलती है । तब तक बेचारी स्वयं बूढी हो जाती है, विवाह व्यर्थ सा हो जाता है ।
13. आज मुसलमान अपनी अच्छी भली, सुंदर, पढ़ी-लिखी, कामकाज में चतुर,
आज्ञाकारी, इनकी पीढ़ी चलाने वाली पत्नी होते भी, दूसरी, तीसरी, चौथी पत्नी ले आता है । न पत्नी उसे रोक सकती है न न्याय व्यवस्था । 
यह सरियत का मुसलमान पुरुषों को दिया गया विशेषाधिकार है । जब कॉमन-सिविल कोड बन जाएगा तो मुस्लिम महिला सोतन की कुंठा से मुक्त होंगी उसका पति दूसरी पत्नी ला नहीं सकता ।

Monday, April 7, 2014

हर सेक्युलर हिन्दू से सवाल

मेरा हर सेक्युलर हिन्दू से सवाल – 

जो अपने आप को मानवतावादी समझता हे – वासुदेव कुटम्बकाम्ब की बात करता हे - वह वास्तविकता समझे फिर वोट करे ........
१ क्या कोई मुस्लिम सेक्युलर हे ? (गलती से कोई बन जाता हे तो उसकी हालत तसलीमा नसरीन जेसी होती हे)
२ क्या पुरे विश्व में कोई मुस्लिम बहुमत वाला देश सेक्युलर हे ?
३ अगर मुस्लिम सेक्युलर हे तो 1947 में देश का विभाजन क्यों किया गया ?
४ अगर मुस्लिम बहुल स्टेट सेक्युलर हे तो कश्मीरी पंडित इसी देश में शरणार्थी क्यों हे ?
५ अगर आर्थिक हालत के करान – अत्याचार के कारण मुस्लिम दंगे – बम विस्फोट करते हे तो फिर गरीब हिन्दू वह कश्मीरी पंडित क्यों नहीं आतंकवादी बने ?
६ क्या पाकिस्थान – बंगलदेश – अफगानिस्थान – मिश्र- सीरिया – रूस में आरएसएस या मोदी हे जो वहा मुस्लिम दंगे और बम विस्फोट करते हे ?
अगर इन सब का जबाब “ ना “ में हे तो में हर हिन्दू जो “ वासुदेव कुटम्ब “ “ मानव धर्मं “ में विस्वाश करता हे उससे निवेदन हे की इस बार वह जात – पात – के आधार पर वोट न करे ! 

मुस्लिम जेसी कम्युनल लोगो को देश बेच देने वाले नकली कांग्रेस – उससे जुड़े संघठान – जनवादी – वामपंथी- नाम से नकली हिन्दू के बहकावे में न आकर इस बार वोट असली हिन्दू – मोदी जी को करे – कमल के निशान को करे – क्योकि असली हिन्दू पुरे विश्व को अपना घर मानता हे – इसलिए सही सेक्युलर मोदी जी को ही वोट करे ! 

सभी असली सेक्युलर एक हो जाए और कमल के निशान को अपना वोट दे !
ध्यान रखे – 1909 में वामपंथी के कहने से अंग्रेज ने देश में पहली बार धर्म के आधार पर आरझण दिया था – जिसका परिणाम 1922 में पहला हिन्दू मुस्लिम दंगा था – तब आरएसएस थी नहीं – 

इसलिए मित्रो इन नकली हिन्दुओ नकली सेकुलरो को जो कांग्रेस या UPA या तीसरा मोर्चा में हे इनको कोई भी हिन्दू वोट न करे –
जय हिन्द
वंदेमातरम्
मेरा वोट देश के लिए – इसीलिए मेरा वोट मोदी जी के लिए !!!!





सेकुलर का तात्पर्य क्या है ?
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जालीदार टोपी पहन कर इफ्तारी खाते हुए फोटो खिंचाना सेकुलरिस्म है

अपनी संस्कृति का सम्मान ना करना सेकुलरिस्म है

वोट बैंक के लालच में अवैध बांग्लादेशियों को भारतीय नागरिकता और मताधिकार देना सेकुलरिस्म है

पडोसी देशों में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार पर चुप्पी साध लेना सेकुलरिस्म है

आतंकवादियों को वोट बैंक के कारण सजा ना देना सेकुलरिस्म है

दुश्मनों द्वारा अपने देश की सीमाओं के उलंघन पर नपुंसकों की तरह बैठे रहना सेकुलरिस्म है

Sunday, April 6, 2014

मंदिर तोड़कर उस जगह मस्जिद बनाने की इस्लामी परंपरा

आज हम आप कों मंदिर तोड़कर उस जगह मस्जिद बनाने की इस्लामी परंपरा के बारे में बताने जा रहे है !

कांग्रेस ने हमारी इतिहास के किताबो से इस तरह खिलवाड़ किया है की सेक्युलर हिंदू आज भी कहते है की मुसलमानों ने हमारा क्या बिगाड़ा ?

हिंदुओ ने सेक्युलरिजम के कारण ई.711 से 1857 तक, याने 1146 साल मुसलमानों की गुलामी की है और बाद में ब्रिटिशो की और आज सेक्युलर कांग्रेस की !

http://en.wikipedia.org/wiki/Negationism_in_India_–_Concealing_the_Record_of_Islam

अगर भगवान एक हैं तो मंदिर, चर्च, गुरुद्वारा तोड़ तोड़ कर वह मस्जिद क्यों बनाये जाते हैं ? अयोध्या में बाबरी मस्जिद बनाने का वादा करने वाले सेक्युलर केजरीवाल इस बात पर क्यों खामोश हैं ?

मुसलमानों ने हिंदुओ पर 1146 साल तक राज किया है ! इस दौरान मुसलमानों ने करोडो मासूम हिंदुओ का कत्लेआम किया, करोडो हिंदुओ का धर्मपरिवर्तन कर उन्हें मुसलमान बनाया, और हजारों हिंदू-जैन-बौद्ध मंदिरों कों मस्जिदों में तबदील कर दिया ! भारत में करीब 2000 हिंदू - बौद्ध मंदिरों की जगह आज भी मस्जिदे खड़ी है !
http://en.wikipedia.org/wiki/Hindu_Temples_-_What_Happened_to_Them
http://ajitvadakayil.blogspot.in/2011/07/unquantified-holocaust-and-genocide.html

इसी तरह ईसाइयो के चर्च, यहूदि (ज्यु) के सिनेगॉग, पारसी (जोरास्ट्रियन) के फायर टेम्पल (अग्यारी), सिक्खो के गुरुद्वारा तोड़कर उस जगह मुस्लिमों ने मस्जिदे बनायीं !

The conversion of non-Muslim places of worship into mosques occurred primarily during the life of Muhammad and continued during subsequent Islamic conquests and under historical Muslim rule. As a result, numerous Hindu temples, churches, synagogues, the Parthenon and Zoroastrian temples were converted into mosques.
http://en.wikipedia.org/wiki/Conversion_of_non-Muslim_places_of_worship_into_mosques

1. बनारस के काशी विश्वनाथ शिव मंदिर की मूल जगह पर आज भी ग्यानव्यापी मस्जिद खड़ी है ।
http://en.wikipedia.org/wiki/Kashi_Vishwanath_Temple

http://khabar.ibnlive.in.com/latest-news/news/-181291.html?ref=hindi.in.com

2. अयोध्या के राम मंदिर की जगह इस्लामी मुग़ल सम्राट बाबर ने बनायीं थी बाबरी मस्जिद ।
http://en.wikipedia.org/wiki/Babri_Mosque

http://www.rediff.com/news/2003/aug/25ayo1.htm

3. भोजशाला के सरस्वती मंदिर कों अलाउद्दीन खिलजी ने कमाल मौला मस्जिद में तबदील किया ।
http://en.wikipedia.org/wiki/Bhoj_Shala

4. मथुरा के कृष्ण मंदिर कों महमूद गज़नवी ने तोडा, औरंगजेब की बनायीं मस्जिद पड़ोस में आज भी है ।
http://en.wikipedia.org/wiki/Mathura_temple
http://www.thenational.ae/news/world/south-asia/hindus-in-india-claim-two-more-mosques
http://back2godhead.com/vrndavana-land-of-no-return-part-2/

5. गुजरात के सोमनाथ मंदिर कों मोहम्मद घोरी ने ध्वस्त किया, औरंगजेब ने वहा मस्जिद बनायीं ।
http://en.wikipedia.org/wiki/Somnath

6. इंडोनेशिया की मेनारा कुदुस मस्जिद हिंदू बौद्ध मंदिर की जगह बनायीं गयी है ।
http://en.wikipedia.org/wiki/Menara_Kudus_Mosque
http://tinyurl.com/m69yn47

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हिन्दुओ के सेक्युलरिजम का नतीजा


ये आप जो फ़ोटो देख रहे हैं ये हिन्दुओ के सेक्युलरिजम का ही नतीजा हैं !

यह मंदिर कई बार ध्‍वस्‍त हुआ। वर्तमान में जो मंदिर है उसका निर्माण चौथी बार में हुआ है। कुतुबुद्दीन ऐबक ने सर्वप्रथम इसे 1194 ई. में ध्‍वस्‍त किया था। रजिया सुल्‍तान (1236-1240) ने इसके ध्‍वंसावशेष पर रजिया मस्जिद का निर्माण करवाया था। इसके बाद इस मंदिर का निर्माण अभिमुक्‍तेश्‍वर मंदिर के नजदीक बनवाया गया। बाद में इस मंदिर को जौनपुर के शर्की राजाओं ने तोड़वा दिया। 1490 ई. में इस मंदिर को सिंकदर लोदी ने ध्‍वंस करवाया था। 1585 ई. में बनारस के एक प्रसिद्ध व्‍यापारी टोडरमल ने इस मंदिर का निर्माण करवाया। 1669 ई. में इस मंदिर को औरंगजेब ने पुन: तोड़वा दिया। औरंगजेब ने भी इस मंदिर के ध्‍वंसावशेष पर एक मस्जिद का निर्माण करवाया था।

मूल मंदिर में स्थित नंदी बैल की मूर्त्ति का एक टुकड़ा अभी भी जाना वापी मस्जिद में दिखता है। इसी मस्जिद के समीप एक जाना वापी कुंआ भी है। विश्‍वास किया जाता है कि प्राचीन काल में इसे कुएं से अभिमुक्‍तेश्‍वर मंदिर में पानी की आपूर्ति होती थी। 1669 ई. में जब काशी विश्‍वनाथ के मंदिर को औरंगजेब द्वारा तोड़ा जा रहा था तब इस मंदिर में स्‍थापित विश्‍वनाथ की मूर्त्ति को इसी कुएं में छिपा दिया गया था। जब वर्तमान काशी विश्‍वनाथ का निर्माण हुआ तब इस कुंए से मूर्त्ति को निकाल कर पुन: मंदिर में स्‍थापित किया गया। इस मंदिर परिसर में कई अन्‍य छोटे-छोटे मंदिर भी हैं। ये मंदिर विष्‍णु, अभिमुक्‍ता विनायक, दण्‍डपाणिश्‍वर, काल भैरव तथा विरुपक्ष गौरी का मंदिर है।