Saturday, November 30, 2013

तेजपाल और आशारामजी बापू

तेजपाल और संत आशारामजी बापू दोनों पर आरोप

तो एक समान लगे है पर मीडिया और जन साधारण के
व्यवहार में भी ज़मीन आसमान का अंतर है-

- बापू के...
लिए अपमान जनक शब्दों का इस्तेमाल
जबकि तेजपाल के लिए आयेंगे जायेंगे इस तरह के मानदेयक
शब्द

- बापू के आश्रम में तोड़ फोड़ और मूर्तियों पर कालिख ,
पुतला जलाने जैसी घटनाओं पर कोई आपत्ति नहीं.
जबकि विजय जॉली के एक ऐसी महिला जिसे बराबर का आरोपी मानना चाहिए के घर पर आरोपी लिखने
पर आपत्ति .

- प्लेन में तक सीक्युरिटी को ठेंगा बता कर केमेरा ले जाना और बापू के प्रत्येक हावभाव पर अपमानजनक
टिपण्णी

- पुलिस द्वारा कोई समय नहीं दिया गया.
-
तथाकथित प्रगतिशील महिलाओं(?) द्वारा तेजपाल
पर कोई स्टेटस या टिपण्णी पढने में नहीं आई .

- तेजपाल द्वारा पीड़ित महिला को कोई सुरक्षा नहीं. जबकि उस लड़की को जिसने बापू पर
इलज़ाम लगाए है को भरपूर सुरक्षा और सहानुभूति .

- सरकारी नेताओं द्वारा बापू पर तल्ख़ टिप्पणियाँ पर
तेजपाल पर नर्म रुख .

- न्यूज़ चेनल पर चौबीसों घंटे बापू पर मनगढ़ंत ख़बरें
चलाना , बहस में समर्थकों को बोलने ना देना , अपमानित करना आदि

- शिल्पी और शोमा के साथ व्यवहार में ज़मीन आसमान
का अंतर जबकि दोनों को ही सह आरोपी कहा जा सकता है.

- बापू ने इलाज के लिए अपनी महिला वैद्य के लिए
पूछा तो उपहास किया गया. तेजपाल की तो वकील ही एक महिला है !

- बापू के परिवार का भी मान भंग
किया गया जबकि तेजपाल के परिवार के मान
की रक्षा हो रही है.

- बापू को पेश होने में थोड़े दिन की देरी हुई तो उन्हें
फरार , भगोड़ा आदि नामों से अपमानित किया गया जबकि उनके प्रवचन पहले से ही निश्चित
कार्यक्रम के अनुसार चल रहे थे , जबकि तेजपाल के लिए
ऐसा कुछ नहीं बोला गया.

- जान बुझ कर बापू के पुराने
क्लिपिंग और चेहरे दिखाए
जा रहे है जिनमें वे अच्छे नहीं दिख रहे जैसे आँखें बड़ी करते
हुए , नाचते हुए आदि. तेजपाल के ऐसे कोई क्लिपिंग नहीं दिखाए जा रहे.

- बापू को अब तक ज़मानत नहीं मिली ,
जबकि तेजपाल को तुरंत अंतरिम राहत दी गई है.

- ये हम हिन्दुओं के कायर होने का सूचक है. पर मज़े की बात यह है की वे कायर लोग इसे प्रगतिशील
होना मानते है !प्रतिशील होना मानते है

आप की अदालत

तहलका के उत्पाती तेजपाल को ये नीचे फोटू में दिखाई दे रही अदालत में- सचमुच में किये बलात्कार के आरोपों से बचाने की याचिका डालनी चहिये थी ....

Mr. AK 47 -स्वयंभू स्व- declared- सत्यपाल महाराज- betex के दुश्मन - हर हर खुजली जस्टिस जी तुरत-फुरत जांच कर के clean चिट बिलकुल फिट दे देते !!

और गवाही के तौर पर सजिया बेंगन तो थी ही ....जिसने अपनी दिव्य दृष्टी से देखकर पहले ही बता दिया था की सेक्स्पाल का अंदरूनी मामला है !!!

खुजली कांग्रेस्सियो को ही क्यूँ फॉलो करता है।



कोई खुजली समर्थक आज तक ये नहीं बता पाया कि खुजली कांग्रेस्सियो को ही क्यूँ फॉलो करता है।

1. दिग्विजय और खुर्शीद ने बाटला एनकाउंटर पर सवाल उठाये वही काम केजरीवाल ने किया। 
2. कांग्रेस कश्मीर मुद्दे पर अलगाववादियों का साथ देती है वही काम प्रशांत भूषन और केजरीवाल करते है। 
3. एंटी कम्युनल बिल पर कांग्रेस कि सहमति है और शाजिया के साथ केजरीवाल कि भी सहमति है जिसके अनुसार सिर्फ हिन्दू ही सांप्रदायिक है।
4. दिग्विजय और कपिल सिब्बल तौकीर से मिलते है वही काम केजरीवाल करता है।
5. कोंग्रेस मानती है दुनिया मैं एक ही दंगा हुआ 2002 मैं वही केजरीवाल मानता है कभी किसी और दंगे पर सवाल नहीं उठता और 1984 के दंगो मैं भी मोदी को ही गालिया देता है।
6. कांग्रेस भगवा आतंकवाद का हव्वा दिखाती है वही काम केजरीवाल करता है।
7. कांग्रेस के हिसाब से देश कि सेना आतकवादी है वही सोच केजरीवाल और प्रशांत भूषण कि है।
8. राम मंदिर ना बन्ने देने के लिए कांग्रेस मुसलमानो के साथ है और वही का केजरीवाल इमाम बुखारी के साथ रह कर कर रहा है ये जानते हुए कि राम मंदिर के खिलाफ याचिका इमाम बुखारी ने डाली है सुप्रीम कोर्ट मैं और ये बीजेपी को कोस रहे है।

ऐसे दोगले लोगो को दिल्ली वाले कैसे वोट दे सकते है।


केजरीवाल चाहे कितना मना करे पर कांग्रेस और केजरीवाल के विचारो और कर्मो मैं बहुत समानताये है जो पाडेय लिखे अनपढो को अभी नहीं दिखेंगी।


Thursday, November 28, 2013

आरुषी हत्याकांड

आरुषी हत्याकांड का फैसला आ गया ....!

लेकिन इस काण्ड ने समाज को एक सन्देश दिया है कि आज पैसे की होड़ में माता पिता अंधाधुंध इस तरह भाग रहे हैं कि उनके पास अपनी संतानों के लिए समय तक नहीं है और वो अकेले घर में क्या करती हैं उस से कोई सरोकार भी नहीं है , मेरा मानना यह है कि अगर एक सदस्य की आय से आपका घर सही चलता है तो दुसरे को नौकरी नहीं करनी चाहिए ...!
मैं आरुषी द्वारा अपने माँ-बाप को किये गए मेल को देख रहा था तो मुझे इस काण्ड के पीछे एक और तरह के गुनाहगार नजर आये जो चुपचाप भारतीय संस्कृति को तहस नहस करने में लगे हुए हैं और इसीलिए मैं उन्हें ''सांस्कृतिक आतंकी'' भी कहता हूँ और अकेलेपन में बच्चे उन्हें ही देख कर वक्त से पहले जवान होने और दिखने की होड़ में हैं ....!
इन सांस्कृतिक आतंकियों ने आज ये सन्देश दिया है कि आप लोग इस इस पृथ्वी पर सिर्फ मौज मस्ती करने के लिए भेजे गए हो और ''सेक्स'' जैसे एक मुद्दे को एक आम सी वस्तु बना के परोस दिया है जैसा आप मेल में भी पढ़ सकते हैं कि उस चौदह वर्ष की लड़की ने लिखा है कि इसमें कोई बुराई नहीं और बस एक ट्राई के तौर पे उसने ऐसा किया ..!
अभी एक ऐसी फिल्म ( समोसे वाली) भी आई थी जिसमे इसी उम्र के बच्चों को इसी बारे में बातें करते दिखाया गया और हमारे प्रगतिशील (सिर्फ व्याभिचार में) समाज के कुछ सदस्यों ने उसकी बड़ी तारीफ़ भी की जिसमे कुछ आधुनिक महिलायें भी शामिल थी. तो और हम अब समाज से उम्मीद भी क्या कर सकते हैं जहां पे पोर्न स्टार और नंगे होने का झंडा बुलंद किये कुछ महिलाओं और पुरुषों को बड़े चाव से देखा जाता है......! तो ऐसे समाज से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है ...........'' 



''आधुनिक परिवार''

''माम'' अपनी तो ''डैड'' अपनी ''मायावी'' दुनिया में मस्त हैं ..!
''संताने'' अपने अपने महंगे गैजेट्स में अस्त-व्यस्त हैं ...!!

उनको नहीं मतलब संताने क्या गुल खिला रही हैं ..!
किस से कर रही हैं डेटिंग और किसे घर बुला रही हैं..!!

दादा-दादी तो अब ऐसे कम ही घरों में नजर आते हैं..!
आते भी हैं तो ये सब देख देख कोने में पड़े कराहते हैं ..!!

''डैड'' बस माया देकर अपना कर्तव्य की इतिश्री समझते हैं..!
मस्ती में अपनी खलल ना पड़े इसलिए नाजायज मांगे भी पुरी करते हैं ..!!

''माम'' की तो पूछो ही मत उसकी हर रोज ''किटी'' होती है ..!
किसी भी वक्त इनको देखो कई किलो मेकअप में ''लिपटी'' होती है...!!

ऐसे परिवारों के बच्चे ''कूल ड्यूड'' और ''हॉट बेबज'' होते हैं..!
उनकी उलटी कारस्तानियाँ देख देख के बड़े बुजुर्ग रोते हैं ..!!

अगर देना चाहते हो अपनी संतान को अच्छे और ऊँचे संस्कार..!
''अमित'' की मानो और बदलो पहले अपना आचार-विचार और व्यवहार..!!
साथ बिठा के संतानों को दिखाइये अपने देश के महान लोगों के उच्च विचार..!!!

''जय सिया राम''..

गरीबी जाति देखकर नहीं आती तो आरक्षण क्यूं जातिगत होता है...?



गरीबी जाति देखकर नहीं आती तो आरक्षण क्यूं जातिगत होता है...?

अगर जातिगत आरक्षण से देश समाज और जातियों का भला हो सकता तो आज इस देश में सिर्फ चंद दलित ही मजे ना लूट रहे होते बल्कि सभी दलित समानता से जीवन यापन कर रहे होते ...!

मेरे जितने भी मित्र हैं चाहें वो कोई भी हों वो इमानदारी से सोचें और देखें तो आरक्षण का लाभ चंद परिवार ही उठा रहे हैं जिनके परिवार पहले से ही इस आरक्षण का लाभ उठाकर ''माया'' वान हो चुके हैं और असली दबले-कुचले दलितों को वो खुद ही नहीं उभरने देते ...!

बाबा साहेब ने ऐसा कभी स्वप्न में भी नहीं सोचा होगा कि उनके बनाए नियम समाज में खाई पाटने की बजाय और चौडी कर देंगे..........!

Monday, November 25, 2013

गाँधी के झूठे इतिहास को देश आज भी भुगत रहा है

गाँधी के झूठे इतिहास को देश आज भी भुगत रहा है.
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1. सबसे पहला झूठ हम हिन्दुओ पर 800 साल तक मुसलमानों ने राज किया.
अगर ये बात इतिहास की किताबो में पढाई जाती है तो ये बात क्यों छुपाई जाति है की बाप्पा रावल ने 711 के इस्लामिक हमले के बाद आगे बढ़ रहे अरब व् तुर्क मुसल्माओ को राजस्थान की धरती से ऐसा भगाया था की 500 साल तक उस रस्ते भारत आने की उनकी हिम्मत नहीं हुई थी....!!

2. 17 बार मुहम्मद गौरी को धुल चटाने वाले दिल्ली के हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान को आखिरी बार गौरी ने छल से हराया था,
जिसे झूठे इतिहासकारों ने 17 बार से हटा कर 2 बार कर दिया,

3. अलाउद्दीन खिलजी नाम के दुष्ट को मेवाड़ और राजपूतो ने छठी का दूध याद दिला दिया था,
जिसके कारण खिलजी वंश का नाश हो गया था,

4. शिवाजी महाराज ने दक्कन के आदिल शाही सल्तनत को ख़त्म करने के बाद मुग़ल शासको की ईंट से ईंट बजा कर रख दी थी.

5. उनके पौत्र बाजी राव पेशवा ने मुगलों की कब्र में आखिरी कील ठोक कर दिल्ली से मुगलों का नाम मिटाने के बाद चांदनी चौक में गौरी शंकर का प्रसिद्ध मंदिर स्थापित करवाया था,

अंग्रेजो से पहले भारत के लोग विदेशी अर्थात मुसलमानों से लड़ रहे थे,
पर अंग्रेजो से लड़ने में हम इतने व्यस्त हुए की असली विदेशी को भूल गये और आज उन्ही विदेशियों को अपना भाई कहते है....!!

वो अनपढ़ लोग नहीं...विश्वविद्यालय के छात्र थे.

कुछ दिन पहले NDTV के रवीश कुमार ने.... RSS के सिन्हा सर से तल्ख़ मुद्रा में पूछा था कि....अगर देश में मुस्लिम ज्यादा हो जायेंगें तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ेगा ???


इसका एक प्रायोगिक उत्तर कल के एक वाकये ने दिया..... मुस्लिम बाहुल्य "काश्मीर विश्वविद्यालय" में एक फिल्म "हैदर" की शूटिंग चल रही थी......उसके एक दृश्य के फिल्मांकन के लिए.....तिरंगा झंडा लगाया गया...और कलाकारों को जय हिंद बोलना पड़ा....| इतना होना था कि....विश्वविद्यालय के छात्र उस यूनिट पर टूट पड़े..... फिल्म का सेट तोड़ दिया गया....|काफी जद्दोजहद के बाद फिल्म के कलाकारों को बाहर निकाला जा सका....| तिरंगे से उनकी नफरत और जय हिंद पर आपत्ति इस सबका कारण थी...|पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया...लेकिन कालेज प्रशासन के कहने पर छोड़ दिया गया..|

ध्यान रहे वो अनपढ़ लोग नहीं...विश्वविद्यालय के छात्र थे...!

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कश्मीर यूनिवर्सिटी में नहीं लहराने दिया तिरंगा, 'हैदर' की शूटिंग रद्द !

डायरेक्टर-प्रड्यूसर विशाल भाराद्वाज की फिल्म 'हैदर' की श्रीनगर में शूटिंग के दौरान कश्मीर यूनिवर्सिटी के छात्रों ने विरोध कर दिया और सेट पर तोड़फोड़ की। यूनिवर्सिटी कैंपस में रविवार को फिदायीन हमले की शूटिंग चल रही थी, इसी दौरान तिरंगा फहराने के साथ जय हिंद का नारा लगाने का सीन फिल्माया जाना था। यूनिवर्सिटी के छात्रों का एक समूह इसका विरोध करने लगा। ये लोग कश्मीर की आजादी और पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने लगे। विवाद बढ़ता देख यूनिट ने शूटिंग के बिना ही पैकअप कर लिया। मौके पर सुरक्षा के लिए मौजूद पुलिसकर्मियों ने मुश्किल से विशाल भारद्वाज और ऐक्टर इरफान खान सहित अन्य कलाकारों और यूनिट को सुरक्षित बाहर निकाला।

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कश्मीर यूनिवर्सिटी में नहीं लहराने दिया तिरंगा, 'हैदर' की शूटिंग रद्द एजेंसियां | Nov 25, 2013, 09.18AM IST






शाहिद कपूर और श्रद्धा कपूर।


श्रीनगर: डायरेक्टर-प्रड्यूसर विशाल भाराद्वाज की फिल्म 'हैदर' की श्रीनगर में शूटिंग के दौरान कश्मीर यूनिवर्सिटी के छात्रों ने विरोध कर दिया और सेट पर तोड़फोड़ की। यूनिवर्सिटी कैंपस में रविवार को फिदायीन हमले की शूटिंग चल रही थी, इसी दौरान तिरंगा फहराने के साथ जय हिंद का नारा लगाने का सीन फिल्माया जाना था। यूनिवर्सिटी के छात्रों का एक समूह इसका विरोध करने लगा। ये लोग कश्मीर की आजादी और पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने लगे। विवाद बढ़ता देख यूनिट ने शूटिंग के बिना ही पैकअप कर लिया। मौके पर सुरक्षा के लिए मौजूद पुलिसकर्मियों ने मुश्किल से विशाल भारद्वाज और ऐक्टर इरफान खान सहित अन्य कलाकारों और यूनिट को सुरक्षित बाहर निकाला।

विशाल भारद्वाज अपनी इस फिल्म की शूटिंग करीब 20 दिनों से कश्मीर में कर रहे हैं। रविवार सुबह कश्मीर यूनिवर्सिटी के नसीम बाग में एक सीन फिल्माने के लिए सैन्य शिविर का सेट लगाया गया था। इसमें बंकर के ऊपर तिरंगा लगा हुआ था। छुट्टी का दिन होने के बावजूद दो हॉस्टलों से करीब 50 छात्र जमा हो गए और विरोध करने लगे। ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने इन छात्रों को किसी तरह समझाकर शांत कराया। इसके बाद छात्रों ने मांग की कि भारतीय झंडे को उतारा जाए और फिल्म में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं होना चाहिए। यूनिट के लोगों ने दबाव में तिरंगे को उतार लिया। इसी दौरान ऐक्टर इरफान खान के सिगरेट पीने और शूटिंग के दौरान जयहिंद का नारा लगाने पर छात्र उत्तेजित हो गए। छात्रों ने पाकिस्तान और कश्मीर की आजादी के समर्थन में नारे लगाते हुए सेट पर तोड़फोड़ शुरू कर दी।

हंगामा करने पर पुलिस ने दो छात्रों को हिरासत में ले लिया, जिस पर दूसरे छात्र भड़क उठे। उन्होंने फिल्म यूनिट को घेर लिया। इसके बाद आनन-फानन में शूटिंग रद्द कर दी गई। श्रीनगर के एसएसपी आशिक बुखारी ने कहा कि छात्रों के एक समूह ने राष्ट्रीय झंडे का विरोध किया था। उनके मुताबिक, फिल्म की यूनिट ने संघर्ष की स्थिति पैदा होने से पहले ही शूटिंग रद्द कर दी और पैकअप कर लिया। हिरासत में लिए गए छात्रों को यूनिवर्सिटी प्रशासन के आग्रह पर बाद में रिहा कर दिया गया। पुलिस ने पुष्टि की कि शूटिंग के दौरान छात्रों ने उत्तेजक नारेबाजी की और फिल्म यूनिट के साथ धक्कामुक्की कर सेट को नुकसान पहुंचाया।

कश्मीर यूनिवर्सिटी छात्र यूनियन के प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा है कि प्रदर्शनकारियों ने भारतीय झंडे को नीचे उतरवाया और इरफान खान को सिगरेट बुझाने के लिए मजबूर किया। इसमें यह भी कहा गया है कि दो छात्रों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में छोड़ दिया गया। प्रवक्ता ने कहा कि प्रॉक्टर नसीर इकबाल ने दोनों छात्रों को रिहा कराने के साथ वादा किया है कि सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

विशाल भारद्वाज शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक 'हैमलेट' पर आधारित फिल्म 'हैदर' बना रहे हैं। ऐक्टर शाहिद कपूर और श्रद्धा कपूर के लीड रोल वाली इस फिल्म की ज्यादातर शूटिंग कश्मीर में ही हो रही है। विशाल इसके पहले भी शेक्सपियर के नाटक 'मैकबेथ' पर मकबूल और उपन्यास 'ओथेलो' पर 'ओमकारा' जैसी फिल्में बना चुके हैं।

क्या कोंग्रेस कि केंद्र में दस साल सरकार अन्तराष्ट्रिय साजिश है!!!!!

क्या कोंग्रेस कि केंद्र में दस साल सरकार अन्तराष्ट्रिय साजिश है!!!!!

लोगो को शुबहा था सन्देह था और विश्वाश नहीं था कि कोंग्रेस सरकार २ ० ० ४ में कैसे बन सकती है . पर सबूत नहीं थे वैसे सबूत मिल भी नहीं सकते। परन्तु घटनाक्रम पर गौर करे और तथ्यो को जोड़ते चले तो कोई शुबहा रहे भी नहीं जाता।


जिस दिन वाजपयी सरकार ने परमाणु का पोखरण विस्फोट किया था उसी दिन यह मालूम हो जाना था कि यह सरकार अब नहीं रह पायगी परन्तु फिर भी येन केन प्रकण भाजपा कि सरकार १ ९ ९ ९ में बनी परन्तु उतनी टिकाऊ नहीं थी जितनी उमीद थी. कारण कुछ भी हो क्यूंकि कहने वाले तो यह भी कहते है कि १९९९ में भाजपा हिंदुत्व मुद्दे पर कम राष्ट्रवाद मुद्दे पर ज्यादा लड़ी इसीलिए उसकी उम्मीद के मुताबिक परिणाम भी नहीं आये और वो राजग के एजेंडे से बंध गई उसकी परणिति यह थी कि सरकार हिचकोले खा कर चली और हिंदुत्व जो कि भाजपा कि कोर रणनीति का हिस्सा था से पूर्णरूप से भटक गई. भटकाव न केवल राजग कि सरकार में रहा बल्कि नरेंद्र मोदी कि प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनने तक भी रहा और कुछ उत्तेजित सज्जन तो अभी भी भाजपा कि राष्ट्रवाद पर लोकसभा और पांच राज्ये के विधानसभा रणनीति पर भी संशित दिख रहे है खैर परिणाम पांच राजयो के आने में कुछ ही दिन है वो भी पता चल जायेगा। अंतरराष्ट्रीय हाथ दो स्तर पर दीखता है एक राजग के अंदर और दूसरा भाजपा के विरोध गठजोड़ में.


कोई कारण नहीं जो राजग कि बैठी बिठाई सरकार को "कंधार अपहरण " काण्ड में फंसाया गया. जिस तत्परता और राष्ट्रवादी तत्व को अक्षुण रखते इसका हल निकाला जाना था वो नहीं निकला और भाजपा कि छवि ध्वस्त हो गयी बाकी बची सरकार ने तो कार्यकाल पूरा किया. उस के बाद राम मंदिर पर सरकार का रुख एक दम विपरीत था और उसको एक अंधेर युग में धकेलने के लिए काफी था. अब जो राजग के अंदर भाजपा कि विरुद्ध साजिश कि बात है उसे कंधार काण्ड के प्रकरण पर अंदरूनी विचार विमर्श से समझा जा सकता है जो कि विश्वसनीयता से अभी बहार नहीं आया. खैर आज जो भाजपा है वो शिव सेना और अकाली दल के साथ है तो वो साजिश वाले तत्व तो अभी बहार ही है.


कंधार काण्ड पहला ऐसा काण्ड था जिस पर अंतराष्ट्रीय शक्तिओ का हाथ स्पष्ट दीखता है. पहले तो इस काण्ड को करने का कोई उद्देश्य स्पष्ट नहीं था अब मान भी लिया जाये कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार थी इसलिए यह हुआ परन्तु भाजपा नीत इस सरकार ने तो कोई भी कृत्ये इस्लामिक शक्तियो को उत्तेजित करने वाला कोई किया था नहीं फिर भी इस साजिश कि रचना हुई, साजिश इतनी गहरी थी कि अपहरण काठमांडू नेपाल से कराया गया जिस से नेपाल भारत के रिश्तो को प्रभावित किया जाये जो हुए भी फिर उन्ही को कुछ कुछ आधार बना कर नेपाल से कोंग्रेस - वाम यूपीए सरकार में पहले राजशाही ख़तम कि गई और फिर नेपाल हिन्दू राष्ट्र को झुनझुना लोकतंत्र बनायागया जो कि इस्लामिक और क्रिश्चन शक्तिओ कि हाथो कि कटपुतली बन सके. कंधार काण्ड को भाजपा के विरुद्ध पहले रचा गया, फिर उसको भाजपा कि घोषित नीति के अनुरूप हल नहीं होने दिया, टीवी और अन्य मीडिया के माध्यमो से सरकार पर गैर जरुरी दबाव बनाया गया, विदेशी सरकारो ने जानबूझ का भाजपा सरकार को सहयोग नहीं किया। और फिर सरकार के भारतीय नागरिको कि जान बचाने के बावजूद उसको मीडिया में सरकार के नकारेपन के रूप में प्रचारित कर उस समये के विपक्ष को प्रोत्साहित करने में किया गया. विदेशी शक्तिया और देश द्रोही शक्तिया भाजपा के देश को परमाणु विस्फोट के प्रतिक्रिया वश लगाये गए अंतराष्ट्रीय प्रतिबंधितो के बावजूद सुचारु रूप से आर्थिक स्थिति मजबूत करने को हतोउत्साहित किया गया और भाजपा कि सरकार को परेशान करने का कोई अवसर नहीं छोड़ा। और यह दुरभिसंधि देशद्रोही शक्तिओ और अंतराष्ट्रीय शक्तिओ के बीच थी. जिसकी झलक भाजपा सरकार के विरुद्ध झूठे स्टिग ओप्रशन किये गए जिसमे एक भाजपा अध्यक्ष को फ़साने के लिए भी था. सरकार को मीडिया कि डर्टी ट्रिक्स से विपक्ष को तर्क के हथियार दिए गए जिस से विपक्ष विशेष रूप से कोंग्रेस और वामदल सरकार को देश कि जनता के बीच बदनाम कर सके और यह २००४ तक मुसलसल चलता रहा. यह ही वो मीडिया था जिसका आज गोआ के सेक्स काण्ड में कच्चा चिटठा खुला है. यह ही वो लोग है जिनका राडिआ टेप में जिक्र किया गया है, यह ही वो मीडिया और प्रबुद्ध वर्ग है जिसका अमेरिका में पाकिस्तानी एजेंट सैयद गुलाम नबी फाई के मेजबान बन बिरियानी उड़ाने वालो में नाम थे. इसी देश द्रोही तत्वो और अंतराष्ट्रीय दुरभिसंधि के जनक मीडिया , तथाकथित प्रबुद्ध वर्ग (जो टीवी चैनल पर भाजपा और संघ के विरुद्ध प्रवचन करता था ) देशी नेताओ, बिके हुए टीवी पत्रकार और मीडिया हाउस ने संघ और भाजपा के विरुद्ध विषवमन किया। राजग के वो तत्व भी इसमें सहयक रहे जिनको राष्ट्रवादी और हिन्दू विरोधी प्रोत्साहन का पारितोषिक मिलता रहा उनको भी मीडिया से विशेष दुलार और सम्मान मिलता रहा है.
दूसरा ट्विस्ट जब आया जब नेपाल को हिन्दू राष्ट्र से पदचालित करना था. इसी वाम - कोंग्रेसी - संघ विरोधी जमात ने इस्लामिक और ईसाई घनघोरवादिओं से मिलकर नेपाल और भारत के सम्बन्धो में खटास डाल डाल कर झूठी धर्मनिरपेक्षता का लड्डू थमाया। जिस का नेपाली जनता आज तक हजम नहीं कर पाई. वैसे यह उपहार भारत सरकार ने चीन को दिया था. ऐसा क्या कारण है कि २००४ में दो धुर विरोधी पार्टियो को एक प्लेटफार्म पर लाकर सरकार ही बना दी वो चुम्बक बिना विदेश हस्तक्षेप के नहीं बनायीं जा सकती थी तो यूपीए कि प्रथम सरकार ने नेपाल इनको गिफ्ट सरूप दिया और श्री लंका को भी लगभग इनकी प्लेट में सजा कर दिया यह दूसरा सबूत है देश्द्रोहिओं और विदेशी शक्तियो के सम्बन्धो का वैसे टेढ़ी नजर तो भूटान और बांग्लादेश पर भी थी पर भला हो कुछ विशषेज्ञ लोगो का जिनको भारतपरस्ती कि बीमारी थी जिनकी वजह से यह सम्भव हो न सका.


२००४ के बाद जब भाजपा विपक्ष में आई तो इस दुरभिसंधि ने यह निर्णय किया कि कम से कम अगले २० साल तो भाजपा का इस देश में कोई नामलेवा न ही रहे वो तो भला हो नरेंद्र भाई मोदी और बाबा राम देव का जिनके कुछ एक साहसिक कारनामो से देश प्रेमी लोगो ने देश हित में कुछ बाबुओ, मीडिया वालो को संघटित करने का कार्ये किया अन्यथा सोनिए गांधी और टीम तो जवाबदेहि कि किसी भी जिम्मेदारी में है ही नहीं थी बस चार पांच महीने के अंतराल पर सोनिए गांधी मीडिया को एक दो टुकड़े फैंक देती और बेचारे कथित मीडिया के ढोल दिन रात उसी को बजाते और विश्लेषण करते रहते थे. आज जो मीडिया नरेंदर मोदी कि एक एक तथ्यो कि धज्जिया उड़ाती है, उनके देशी भाषा प्रेम का मजाक उड़ाती है, उनके हिज्जों के ऊपर टिपण्णी करती है, वो मीडिया के भेड़िए तो सोनिए गांधी के पल्लू और साडी पर सम्पादकीय लिख देते थे बेचारो को आज घी नहीं हजम हो रहा है.


फिर मीडिया ने बजरंग दल और अन्य हिन्दू संघटनो कि सीडी बना बना कर लोगो का न्यूज़ चैनल पर पुरे पांच साल मनोरंजन किया। आज मीडिया के भाडू और कोंग्रेसी मोदी के मात्र हाथ के पंजे को खूनी पंजा कहने पर मरोड़ो कि शिकायत कर रहे है और धार्मिक - सामाजिक भावना भड़काने का दोषी बता रहे है इन्ही मीडिया वालो ने २००९ के चुनाव में कोंग्रेस को मुस्लिमो का एक मुश्त वोट डलवाने के लिए वरुण गांधी कि "हाथ काटने " कि कथित और झूठी सीडी चुनाव भर चलाई जब तक कि कोंग्रेस कि मतपेटिआ भर नहीं गई. यह है इनका दोहरा चरित्र।


यह अमूमन माना जाता है कि मीडिया सरकार कि खिचाई करती है परन्तु भारत देश कि बिकी मीडिया इस नीति को नहीं मानती वो तो बेचारी और असह्य पड़ी भाजपा के पीछे ही पड़ी रही उसने राहुल गांधी के अमेठी काण्ड पर कोई रूचि नहीं ली जबकि उसपर कोंग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी ने अमेरिका में ऍफ़ आई आर तक तर्ज करा दी थी परन्तु भारत कि द्रोही मीडिया ने संज्ञान लेना या एक लाइन लिखनी भी उचित नहीं समझी और आज नरेंदर मोदी कि सीडी कि खोज कर रही है. वो समय राहुल महाजन बनाम राहुल गांधी बहुत चलाया। एक बेचारे असह्य महाजन परिवार कि इज्जत को सड़क पर तब तक तार तार नहीं करना छोड़ा तब तक वो मरणसन्न न हो गई. इस मीडिया ने कभी राज दीप सरदेसाई से नहीं पूछा कि क्यूँ तो आपने संसद घूस काण्ड का स्टिंग किया और क्यूँ जनता को आज तक भी सच नहीं बताया। जो मीडिया तहलका कि वाह वहा करता रहा और लोकतंत्र कि दुहाई देता रहा उस से कभी नहीं पूछा कि जब लोकतंत्र देश का दाव पर था तब यह मीडिया के सुरमा देश को सच क्यूँ नहीं बता और दिखा पाये। जो संजय जोशी और नरेंद्र मोदी कि सीडी में रूचि लेते रहे उसने अमर सिंह कि सीडी में रूचि क्यूँ नहीं ली। मैं तो वारा जाऊ मीडिया कि इस सेलेक्टिविटी पर. तब हमें दिखाते रहे यह आरुषि हत्याकांड, देश के लोकतंत्र का हत्याकांड क्यूँ नहीं दिखाया तब। क्यूंकि तब भी देश द्रोही और विदेशी शक्तिओ में यह ही समझदारी थी कि नुक्लियर समझोता करने तक भाजपा को इतना कमजोर कर दो और लोगो कि नजरो में इतना गिरा दो कि उसका विरोध भी हास्यप्रद लगे और ठीक यह ही इन शक्तिओ ने मिलकर किया। और फिर इनाम के तौर पर "सिंह इस किंग " २००९ में बन कर आये श्री मनमोहन सिंह जी जिनको ५ साल देश पर राज करने पर भी यह विश्वास नहीं था कि ५५२ लोकसभा में से किसी एक पर भी खड़े हो कर जीत सके और फिर दोबारा राजयसभा के पिछले दरवाजे से ही देश के प्रधानमंत्री बने नहीं मनोनीत होये। यह है इन देशी और विदेशी शक्तिओ का सच जिस ने भाजपा कि मेहनत, भारतीयो के विश्वास और पूर्व राष्ट्रपति कलाम के २०२० के सपने को चूर चूर किया।


कहाँ तो देश २००० में २०२० तक सुपर पवार बन रहा था और कहाँ अब देश पिछड़े देशो कि जमात में धक्के खा रहा है। इन दस सालो में देशद्रोही शक्तिया और विदेशी ताकत जो आज भारत को कंगाल बनाने में सफल हुई है इन्होने बिना किसी लोगो के ताकत के केवल हिन्दुओ / भारत कि जनता को बांटकर ईस्ट इंडिया कंपनी का कृत्य ही दोहराया है। क्या आज भारत महशक्तिओ के आँखों में आँखे डाल कर बात कर सकता है जैसे कि वो पोखरण विस्फोट के बाद करता था।


देश को याद है कि कुछ एक न्याय के पुजारी भी देश को झटका देने में कामयाब रहे जिन्होंने राहुल गांधी कि एक जनहित याचिका दायर करने पर अमेठी काण्ड कि सच्चाई पर से पर्दा उठाने के लिए याचिका कर्ता पर ५० लाख का हर्जाना लगा दिया। मारेंगे भी और रोने भी नहीं देंगे।


धर्मनिरपेक्षता के आवरण में जो भी पाप किये उनका तरुण तेजपाल, बरखा दत्त, प्रभु चावला, राजदीप सरदेसाई जैसे पत्रकारो को कम से कम सच तो जनता को बताना ही पड़ेगा। इस धर्मनिरपेक्षता के आवरण में राजेंदर यादव जैसे के पाप भी सड़क पर फूटे वो अलग बात है कि वो दुनिया से विदा हो गए पर सच तो मुहं बाय जनता के सामने खड़ा है जो मीर जाफर और जय चंद को तलाश रहा है।


राजनैतिक लोगो का विभ्याचार का जवाब चाहिए वो कोई जज हो, आंध्र भवन को रंगरालिओ का अड्डा बनाने वाले हो, सुप्रीम कोर्ट के चेंबर में मनु सिंघवी हो को जवाब तो देना होगा, क्या यह लोग निर्भय काण्ड वाले प्रदर्शनो का इन्तजार कर रहे है या विपक्ष कि सीडी ढूंढ कर अपने रंग में पोत कर पाकसाफ होने कि कलाबाजी करते रहेंगे।

क्या लोग ईस्ट इंडिया कंपनी के इतिहास को भूल गए राजा - महाराजा राज दरबारिओ, जमींदारो और उचे रसूख के लोगो के चारित्रिक दोषो से क्या नहीं पाया उस कंपनी ने जो आज विदेशी शक्तिअ नहीं पा रही है। दुरभिसंधि का यह पाप आज भी किया जा रहा है फर्क सिर्फ इतना है कि कलाकार बदल गए और "आप" इस राजनेतिक मैदान में कूद गए। मित्रो देश इसी ईमानदार शख्सियत के पापो का भुगतान कर रहा है आखिर कब तक व्यक्तिगत ढकोसला देश पर भारी पड़ता रहेगा। देश आज राष्ट्रवादी गुजरात के मख्यमंत्री कि बात नहीं मानता तो निश्चित रूप से कुछ एक दशक कोई भी देश को बचाने का साहस नहीं करेगा और मानवता का यह पालना केवल बाकी देशो कि विकसित होने कि गाथा का दर्शक भर बना रहेगा। और हिन्दू कुंठित हो कर एक युग का इन्तजार करेगा शायद भगवान् कल्कि का।


तो क्या अब इस दुरभिसंधि टूटने का वक्त आ गया या अभी और इन्तजार करना पड़ेगा ?????????

Tuesday, November 19, 2013

मक्का मस्जिद नहीं एक शिवलिंग है .. अब सिद्ध हो गया है

मक्का मस्जिद नहीं एक शिवलिंग है .. अब सिद्ध हो गया है | वहाँ पर शिवलिंग है..


देसी गाय और अंग्रेजी गाय में अंतर

गौ माताकी उपयोगिता

गौ माताकी उपयोगिता -

अमेरिका के कृषि विभागद्वारा प्रकाशित पुस्तक 'The cow is wonderful laboratory'(गोमाता एक आश्चर्यजनक रसायनशाला है) मे लिखा है कि गाय ही एक ऐसा जीव है, जिसकी आँत 180 फुट लम्बी होती है ,इसके कारण जो चारा ग्रहण करती है, उससे दूधमेँ कैरोटीन नामक उपयोगी पदार्थ बनता है, वह भैसके दूधसे दस गुना अधिक होता है।
2- भारतीय नस्लकी गायमेँ 33 करोड़ देवी देवताओँका वास माना गया है, जो अन्य किसी जीव मे नही है।
3-गायके दूधमेँ स्ट्रोनटियन नामक तत्तव है, जो अणु विकिरण प्रतिरोधक है।
4-गायके दूधमेँ 'सेरीब्रोसाइड' तत्तव होता है, जो मस्तिष्क एवं बुद्दिके विकाशमेँ सहायक है और अम्लपित्त एवं शरीरकी गर्मीको शान्त करनेका काम करता है।
5-गायको शतावरी खिलाकर प्राप्त दूधका उपयोग करने पर टी॰ बी॰ से मुक्ति मिल सकती है
6-गाय के दूधमेँ उसी गायका घी मिलाकर पीनेसे कैँसर ठीक हो सकता है।
7- गायकी रीढ़मेँ सूर्यकेतु नामक नाड़ी होती है जो सूर्यके प्रकाशमेँ जाग्रत् होती है, इससे यह स्वर्णके रंगका पदार्थ छोड़ती है जिससे गायके दूधका रंग हल्का पीला होता है।गायके दूधमेँ स्वर्ण तत्तव पाया जाता है, जो माँके दूधके अलावा अन्य किसीमे नही पाया जाता ।
अता गोभक्तोँ निवेदन है कि वे प्रतिदिन गोग्रासके लिये कुछ धनराशि गुल्लक मेँ अवश्य डालेँ तथा एकत्रित धनको गोशालाको प्रदानकर पुण्यके भागी बनेँ।
'जय श्रीकृष्ण'

Monday, November 18, 2013

आयुर्वेदिक दोहे

आयुर्वेदिक दोहे

1.जहाँ कहीं भी आपको,काँटा कोइ लग जाय।
दूधी पीस लगाइये, काँटा बाहर आय।।

2.मिश्री कत्था तनिक सा,चूसें मुँह में डाल।
मुँह में छाले हों अगर,दूर होंय तत्काल।।

3.पौदीना औ इलायची, लीजै दो-दो ग्राम।
खायें उसे उबाल कर, उल्टी से आराम।।

4.छिलका लेंय इलायची,दो या तीन गिराम।
सिर दर्द मुँह सूजना, लगा होय आराम।।

5.अण्डी पत्ता वृंत पर, चुना तनिक मिलाय।
बार-बार तिल पर घिसे,तिल बाहर आ जाय।।

6.गाजर का रस पीजिये, आवश्कतानुसार।
सभी जगह उपलब्ध यह,दूर करे अतिसार।।

7.खट्टा दामिड़ रस, दही,गाजर शाक पकाय।
दूर करेगा अर्श को,जो भी इसको खाय।।

8.रस अनार की कली का,नाक बूँद दो डाल।
खून बहे जो नाक से, बंद होय तत्काल।।

9.भून मुनक्का शुद्ध घी,सैंधा नमक मिलाय।
चक्कर आना बंद हों,जो भी इसको खाय।।

10.मूली की शाखों का रस,ले निकाल सौ ग्राम।
तीन बार दिन में पियें, पथरी से आराम।।

11.दो चम्मच रस प्याज की,मिश्री सँग पी जाय।
पथरी केवल बीस दिन,में गल बाहर जाय।।

12.आधा कप अंगूर रस, केसर जरा मिलाय।
पथरी से आराम हो, रोगी प्रतिदिन खाय।।

13.सदा करेला रस पिये,सुबहा हो औ शाम।
दो चम्मच की मात्रा, पथरी से आराम।।

14.एक डेढ़ अनुपात कप, पालक रस चौलाइ।
चीनी सँग लें बीस दिन,पथरी दे न दिखाइ।।

15.खीरे का रस लीजिये,कुछ दिन तीस ग्राम।
लगातार सेवन करें, पथरी से आराम।।

16.बैगन भुर्ता बीज बिन,पन्द्रह दिन गर खाय।
गल-गल करके आपकी,पथरी बाहर आय।।

17.लेकर कुलथी दाल को,पतली मगर बनाय।
इसको नियमित खाय तो,पथरी बाहर आय।।

18.दामिड़(अनार) छिलका सुखाकर,पीसे चूर बनाय।
सुबह-शाम जल डाल कम, पी मुँह बदबू जाय।।

19. चूना घी और शहद को, ले सम भाग मिलाय।
बिच्छू को विष दूर हो, इसको यदि लगाय।।

20. गरम नीर को कीजिये, उसमें शहद मिलाय।
तीन बार दिन लीजिये, तो जुकाम मिट जाय।।

21. अदरक रस मधु(शहद) भाग सम, करें अगर उपयोग।
दूर आपसे होयगा, कफ औ खाँसी रोग।।

22. ताजे तुलसी-पत्र का, पीजे रस दस ग्राम।
पेट दर्द से पायँगे, कुछ पल का आराम।।

23.बहुत सहज उपचार है, यदि आग जल जाय।
मींगी पीस कपास की, फौरन जले लगाय।।

24.रुई जलाकर भस्म कर, वहाँ करें भुरकाव।
जल्दी ही आराम हो, होय जहाँ पर घाव।।

25.नीम-पत्र के चूर्ण मैं, अजवायन इक ग्राम।
गुण संग पीजै पेट के, कीड़ों से आराम।।

26.दो-दो चम्मच शहद औ, रस ले नीम का पात।
रोग पीलिया दूर हो, उठे पिये जो प्रात।।

27.मिश्री के संग पीजिये, रस ये पत्ते नीम।
पेंचिश के ये रोग में, काम न कोई हकीम।।

28.हरड बहेडा आँवला चौथी नीम गिलोय,
पंचम जीरा डालकर सुमिरन काया होय॥

Sunday, November 17, 2013

भीम पुत्र घटोत्कच का कंकाल

भारत की इसाईपरस्त सरकार हमसे यह छिपा रही है की उन्हें उत्तर भारत के एक क्षेत्र में खुदाई के दौरान भीम पुत्र घटोत्कच का कंकाल मिला है




http://padmasrinivas.blogspot.in/2007/05/bhimas-son-gadotkach-like-skeleton.html 

 

Bhima's son Gadotkach like skeleton found

Is it Real or Not? - Find out below after reading this Hoax News....
Recent exploration activity 1n the northern region of India uncovered a skeletal remains of a human of phenomenal size. This region of the indian desert is called the Empty Quarter.

See the photo and note the size of the two men standing in the picture in comparison to the size of the skeleton!!
A very small article on this was published in Times Of India- Mumbai edition on 22-Apr-2004.





The discovey was made by National Geographic Team (India Division) the support from the indian Army since the area comes under the jurisdiction of the Army.



The exploration team also found tablets vdth inscriptions that stated that our Gods of Indian mythologicalyore, Brahma", had created people of phenomenal size the like of which He has not created since. They were very tall, big, and very powedul, such that they could put their arms around a tree trunk and uproot it.
They were created to bring order among us since we were always fighting with each other. One of he sons of Bhima of the Pandava brothers is also thought of to have been carrying these genes. Later these people, who were given all the power turned against all our Gods and transgressed beyond all boundaries set. As a result they were destroyed by God Shiva. 


The Geo Exploration team believes these to be the remains of those people. 

Govt of India has secured the whole area and no one is, allowed to enter except the NatGeo personnel.



On September 16, 2000, Steve Westin of our staff was a guest at the site outside Hyde Park, New York, where the Paleontological Research Institution and the Cornell Department of Geological Sciences are excavating the skeleton of a mastodon.

The image first surfaced in October 2002 as an entry in a Photoshop contest run by Worth1000.com. It was created by altering an actual photo of a Cornell University excavation of a mastodon skeleton.


तनख्वाह लेने वाल़े कर्मचारी को भारत रत्न दिया जाना चाहिए क्या?

तनख्वाह लेने वाल़े कर्मचारी को भारत रत्न दिया जाना चाहिए क्या?

harat-ratan
जब से मैने सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिए जाने कीसुगबुगाहट देखी-पढ़ी-सुनी है तब से मुझ जैसे तुच्छ सरकारी जन-सेवक का मन, विचारों की नैय्या सरीखा अशांति के समन्दर में डगमगा रहा। क्या करूँ? क्या इस नैय्या को ओसामा (जी) बिन लादेन की तरह समन्दर में ही डुबो दूँ हमेशा के लिए या फिर कोई इसे सोमालियाई डाकूओं के हमले से बचाने जैसा काम कर किनारे सुरक्षित ले आएगा?
सचिन (जी) को भारत रत्न की बात पर मैंने सबसे पहले तो यह ढ़ूँढ़ा कि इससे पहले यह सम्मान किन्हें दिया गया है। सूची कुछ इस प्रकार मिली:
डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, डॉक्टर चंद्रशेखर वेंकट रामन, डॉक्टर भगवान दास, सर डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या, पं. जवाहर लाल नेहरू, गोविंद बल्लभ पंत, डॉ. धोंडो केशव कर्वे, डॉ. बिधान चंद्र राय, पुरुषोत्तम दास टंडन, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. ज़ाकिर हुसैन, डॉ. पांडुरंग वामन काणे, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गाँधी, वराहगिरी वेंकट गिरी, के. कामराज, मदर टेरेसा, आचार्य विनोबा भावे, ख़ान अब्दुलगफ़्फ़ार ख़ान, मरुदुर गोपाला रामचन्द्रन (एम जी आर), डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर, नेल्‍सन मंडेला, राजीव गांधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मोरारजी देसाई, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (जे. आर. डी. टाटा), सत्यजीत रे (राय), ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, गुलज़ारीलाल नन्दा, अरुणा असिफ़ अली, एम.एस. सुब्बालक्ष्मी, सी. सुब्रह्मणियम, जयप्रकाश नारायण, पं. रवि शंकर, अमर्त्य सेन, गोपीनाथ बोरदोलोई, लता मंगेशकर, उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ां, पं.भीमसेन जोशी

फिर मैंने तलाशा कि यह सचिन तेंदुलकर कौन हैं? पता चला कि यह उस एक भारी-भरकम क्लब के कर्मचारी हैं जो Board of Control for Cricket In India (BCCI) कहलाता है। विशुद्ध व्यवसायिक नज़रिये सरीखे इस प्रतिष्ठान के दो मशहूर प्रोजेक्ट हैं जिन्हें नाम दिया गया है टीम इंडिया और आईपीएल। इन दोनों के अपने अपने ग्रुप मेंबर हैं जिन्हें निश्चित वेतन के अलावा अच्छा प्रदर्शन करने पर आम कारखाने जैसे बोनसभी दिया जाता है।
बात कुछ जमी नहीं! क्योंकि तभी ख्याल आया इन्कम टैक्स वाले उस झंझट का जिसमें इनकम टैक्स अफसर द्वारा सवाल ज़वाब किए जाने पर सचिन (जी) ने कहा था कि he is a non-professional cricketer और playing cricket is not his profession इसलिए फॉर्म में लिखा गया कि Income from playing cricket is reflected as ‘income from other sources’!
यह सब Sachin R. Tendulkar vs. Assistant Commissioner of Income-tax, Range 193/ IT APPEAL NOS. 428 TO 430 AND 6862 (MUM.) OF 2008 के आधिकारिक दस्तावेज़ में दर्ज़ है। तो इन भाई सा’ब को खेल के लिए कोई सम्मान कैसे दे सकती है सरकार? जब वह खुद कह रहे हों कि he is a popular model who acts in various commercials for endorsing products of various companies… A major part of the income derived by him during the year is from the exercise of his profession as an ‘actor’ in these commercials… the income derived by him from ‘acting’ has been reflected as income from “business & profession”!!
मतलब यह हुआ कि मुख्य कमाई तो विज्ञापनों की शूटिंग, मॉडलिंग से है क्रिकेट तो बस यूँ ही कभी कभी खेल लेते हैं ज़नाब!
इन सब बातों के बीच भारत सरकार के इन्कम टैक्स अफ़सर ने इसी दस्तावेज़ के अनुसार कह डाला कि He is engaged in the activity ofplaying cricket as a paid job rather than as an amateur.
अब मेरा मन किया कि कुछ और बातें टटोली जाए इनके रोजगार दाता के बारे में। खोजने निकला तो निजी चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में तमिलनाडु से रजिस्टर्ड लेकिन विशुद्ध रूप से एक मुनाफा कमानेवाले व्यावसायिक संगठन बीसीसीआई को दी गई भारत सरकार की धमकी दिखी कि अपने आप को खेल मंत्रालय की नीतिओं के अधीन लाओ वरना India शब्द का प्रयोग बंद कर दो!
मैं भी सोचता रहा कि क्रिकेट मैच का आयोजन करना, इसके लिए पैसे लेकर प्रायोजक ढूंढना, विज्ञापन से धन अर्जित करना, टेलीविजन पर प्रसार का अधिकार देकर मुनाफा कमाना, खेल मैदान के अंदर भी विज्ञापन प्रदर्शित कर धन लेना और यहां तक कि खिलाडिय़ों की पोशाक को भी विज्ञापन का माध्यम बनाकर धन अर्जित करना, धर्मार्थ अर्थात ‘चैरिटी‘ का काम कैसे हो गया? इस पर अभी भी खींचतान चल ही रही है। इस लेखसे पता चला कि बीसीसीआई तो अपने कर्मचारिओं से गुलामों जैसा बर्ताव करती है।
चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि शपथपत्र देकर खुद खिलाड़ी और यह बोर्ड अदालत में कह चुके हैं कि हम भारत देश के लिए नहीं खेलते, अपने बोर्ड को मुनाफा दिलवाने के लिए खेलते हैं और खिलाड़ी ठेके, कॉंट्रेक्ट पर रखे जाते हैं जिनका भुगतान किया जाता है उन्हें, मुनाफा लाने पर। साथ ही यह भी कह डाला कि ना तो हम भारत का तिरंगा फहराते हैं और ना ही किसी राजकीय चिन्ह का प्रयोग कहीं करते हैं!! तो फिर भारतीय टीम क्यों कहलाती है इन वेतनभोगी नौकरों की?
इस पर (62 पृष्टों वाली) बहुत लंबी चली बहस पर मैंने भी हिस्सा लिया था। इस बहस में कहा गया था कि जब टाटा, विप्रो, इंफ़ोसिस जैसी कम्पनियाँ अरबों, खरबों का मुनाफा कमाते हुए दुनिया में बहादुरी के साथ अपने झंडे गाड़ती है तो क्यों नहीं उन्हें टीम इंडिया कहा जाता। ख्याल यही आता है कि इनके कर्मचारिओं को क्यों नहीं कोई सम्मान दिया जाता भारत सरकार की ओर से?
ऐसे ही एक मौके पर सुपरिचित हिंदी ब्लॉगर जीतू चौधरी ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि जहाँ भी क्रिकेट से कमाई की बात आती है तो ये अपनेआप को भारत के प्रतिनिधि कहते, सारा माल कमाते, बटोरते और हजम कर जाते हैं। लेकिन जहाँ भी सरकार इनसे कुछ फ्री में मांगना चाहती तो ये लोग फ़टाक से एक प्राइवेट क्लब मे बदल जाते।
और तो और, न्यायालय मे दिए शपथपत्र (जो अब इनकी नाक की नकेल बन जाएगा) मे ये लोग चीख चीख कर कहते कि हम तो भारत काप्रतिनिधित्व ही नही करते, ना ही हम सरकार से जुड़े है, हम तो सिर्फ़ एक क्लब है जहाँ कुछ खिलाड़ी हमारे कर्मचारी है, और अपने कर्मचारियों को खेलने के लिए हम विदेशों मे भेजते है। ना तो हम भारत मे क्रिकेट के सरोकार से जुड़े है और ना ही हम खेल मंत्रालय के अधीन है। पूरा शपथ पत्र अगर आप पढे तो आप इनकी महानता के गुण गाने लग पड़ो।
गज़ब है भई! अब कौन इससे अधिक जानकारियाँ देख कर भ्रमित होता रहे। अपने राम फिर भारत रत्न की ओर मुड़ लिए और पढ़ डाले कि यह किसी व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व और देश के प्रति उसकी अत्यन्त समर्पण भावना के लिए यदा-कदा दिया जाने वाला अलंकरण है। यह उन आदर्श महान पुरुषों को ही दिया जाता है जिनकी जीवन गाथा पुण्य-भागीरथी के समान है, जिसे जानकर एक साधारण मनुष्य अपने आप को पाप मुक्त और निर्मल पाता है। (दिए जा चुके) ‘भारत-रत्न’ में ऐसी विभूतियों के दिव्य चरित्र हैं जिन्होंने जीवन को इतनी ऊँचाइयों तक पहुँचाया जहाँ की कोई कल्पना नहीं कर सकता। ‘भारत-रत्न’ अनेक महान व्यक्तियों की जीवन-गाथा के साथ भारत के उस काल का इतिहास भी है, जिस काल से इन आदर्श पुरुषों का संबंध रहा।
लो जी, यह प्रश्न तो अब भी सामने खड़ा कि तनख्वाह ले कर अपने मालिक को मुनाफ़ा दिलवाने वाल़े कर्मचारी को भारत रत्न दिया जाना चाहिए क्या?
अब आप ही सहायता करो!

Saturday, November 16, 2013

क्या क्रिकेट के फैन इन बातों को जानते हैं ?

क्या क्रिकेट के फैन इन बातों को जानते हैं ?

1 करोड़ की पूंजी से 100 रोजगार बनते हैं 100 करोड़ से 10,000 रोजगार,1000 करोड़ से 1,00,000 रोजगार, 36,000 करोड़ से 3,600,000 रोजगार हर साल स्नातक पास करने वाले लगभग 20 लाख विद्यार्थी होते हैं जिन्हें नौकरी नहीं मिलती. हर साल सिर्फ क्रिकेट से 36 लाख रोजगार नष्ट हो रहा है, जानिए कैसे !

क्रिकेट को स्पोंसर करने वाले विदेशी कंपनियां एक साले में कुल 40 हजार करोड़ का मुनाफा अपने
देश ले जाते हैं, और हैरानी वाली बात यह है की ये कंपनियां ज्यादातर अमेरिकी हैं जो खुद क्रिकेट नहीं खेलता.. BCCI को महज 4 हजार करोड़ का मुनाफा होता है जो पैसा इस देश में ही रहता है. इसका मतलब यह हुआ की हर साल 36 हजार करोड़ का नुकसान क्रिकेट कर रहा है....

यह तो सीधा 36 लाख बेरोजगार लोगों के जिंदगी के साथ विश्वासघात हुआ !इसी कारण चीन,जापान,कोरिया,फ़्रांस,रूस, जर्मनी जैसे विकसित देश इस खेल से दूर रहते हैं वे क्योंकि इसके पीछे अमेरिका और ब्रिटेन के षड़यंत्र को जानते हैं..

कुछ लोग कहते है इस खेल से भारत का नाम होता है और मेरा सबसे बड़ा सवाल यही है की क्या भारत दुनिया में अपने नाम के लिए इस खेल का ही मोहताज है? क्या इस खेल से पहले भारत को दुनिया में कोई नहीं जनता था जो इस खेल के बाद जाने है.....?

खेलना अच्छी बात है खेलना भी चाहिये अच्छे खिलाडीयों को सम्मान भी मिलना चाहिये चाहे वो मेजर ध्यानचंद जी हो या मिल्खा, दारासिंह जी चाहे कपिल और सचिन हो, और खेल को खेल ही रहने दिया जाए तो अच्छा होगा.....

Wednesday, November 13, 2013

मामाजी! मामाजी

एक सज्जन बनारस पहुँचे।
स्टेशन पर उतरे ही थे कि एक लड़का दौड़ता आया,
‘‘मामाजी! मामाजी!’’ — लड़के ने लपक कर चरण छूए।
वे पहचाने नहीं।
बोले — ‘‘तुम कौन?’’
‘‘मैं मुन्ना। आप पहचाने नहीं मुझे?’’
‘‘मुन्ना?’’ वे सोचने लगे।
‘‘हाँ, मुन्ना। भूल गये आप मामाजी!
खैर, कोई बात नहीं, इतने साल भी तो हो गये।
मैं आजकल यहीं हूँ।’’
‘‘अच्छा।’’
‘‘हां।’’
मामाजी अपने भानजे के साथ बनारस घूमने लगे।
चलो, कोई साथ तो मिला। कभी इस मंदिर, कभी उस मंदिर।
फिर पहुँचे गंगाघाट। बोले कि "सोच रहा हूँ, नहा लूँ!"
‘‘जरूर नहाइए मामाजी!
बनारस आये हैं और नहाएंगे नहीं, यह कैसे हो सकता है?’’
मामाजी ने गंगा में डुबकी लगाई।
हर-हर गंगे!
बाहर निकले तो सामान गायब, कपड़े गायब!
लड़का... मुन्ना भी गायब!
‘‘मुन्ना... ए मुन्ना!’’
मगर मुन्ना वहां हो तो मिले।
वे तौलिया लपेट कर खड़े हैं।
‘‘क्यों भाई साहब, आपने मुन्ना को देखा है?’’
‘‘कौन मुन्ना?’’
‘‘वही जिसके हम मामा हैं।’’
लोग बोले, ‘‘मैं समझा नहीं।’’
‘‘अरे, हम जिसके मामा हैं वो मुन्ना।’’
वे तौलिया लपेटे यहां से वहां दौड़ते रहे।
मुन्ना नहीं मिला।
ठीक उसी प्रकार...
भारतीय नागरिक और भारतीय वोटर के नाते हमारी यही स्थिति है!
चुनाव के मौसम में कोई आता है और हमारे चरणों में गिर जाता है।
"मुझे नहीं पहचाना!
मैं चुनाव का उम्मीदवार। होने वाला एम.पी.।
मुझे नहीं पहचाना...?"
आप प्रजातंत्र की गंगा में डुबकी लगाते हैं।
बाहर निकलने पर आप देखते हैं कि वह शख्स जो कल आपके चरण छूता था,
आपका वोट लेकर गायब हो गया।
वोटों की पूरी पेटी लेकर भाग गया।
समस्याओं के घाट पर हम तौलिया लपेटे खड़े हैं।
सबसे पूछ रहे हैं — "क्यों साहब, वह कहीं आपको नज़र आया?
अरे वही, जिसके हम वोटर हैं।
वही, जिसके हम मामा हैं।"
पांच साल इसी तरह तौलिया लपेटे, घाट पर खड़े बीत जाते हैं।
आगामी चुनावी स्टेशन पर भांजे
आपका इंतजार मे...

Chacha420 नेहरू ने बोया था तुष्टिकरण का बीज - सामना


Chacha420 नेहरू ने बोया था तुष्टिकरण का बीज - सामना

Monday, November 11, 2013

देखिये नौटंकी कुमार को



बड़े नाजुक कदम है आपके ... गंगा नदी के पानी से मैले हो जायेंगे ... इसलिए इन्हें आरओ सिस्टम द्वारा फिल्टर्ड और क्लोरीनेटेड पानी में ही रखियेगा ||

ये देखिये नौटंकी कुमार को ... कल तक बड़ी बड़ी बाते कर रहे है , हम जमीन से जुड़े है आदि आदि ,और जनाब छठ भी मनाते है तो आलिशान स्विमिंग पुल में ..और वो भी सीसे की तरह चमचमाते पानी में ..

क्या कहा ?? दोगला ?? नही ,,इनके लिए ये भी इज्जत होगी
 

भारत बहुत ही गरीब देश है

1. हमारे देश के बारे में यह प्रचारित किया गया है कि भारत बहुत ही गरीब देश है।
2. दुनियां भर के विदेशी आक्रमण क्या हमारी गुदडी चुराने के लिए हुए थे।
3. चंगेज खान ४ करोड लोगों की हत्या करके क्या अपने घोडों पर ईंट और पत्थर लाद कर ले गया था?
4. सोमनाथ मंदिर को बार बार सोने से कौन भर देता था यदि हमारे पुरखे गरीब थे?
5. श्रम करने वाला कभी गरीब हो ही नहीं सकता है। हमारे किसान औसत १४ घंटे काम करते हैं। वे गरीब क्यों हैं?
6. आज हमारे देश से विदेशी कंपनियां आधिकारिक रूप से २,३२,००० करोड का शुद्घ मुनाफा अपने देश लेकर जा रही हैं।
7. बाकी सभी तरह का फर्जी हिसाब, उनका आयातित कच्चे माल का भुगतान, चोरी आदि जोडा जाय तो यह रकम २५,००,००० करोड सलाना बैठती है।
8. क्या कोई गरीब देश इतना टर्न ओवर पैदा करवा सकता है?
9. हमारे देश में दवाओं का सालाना कारोबार १०,००,००० करोड का है, क्या यह गरीब देश की निशानी है?
10. हमारे देश में सालाना ६,००,००० करोड का जहर का व्यापार विदेशी कंपनियां कर रही है। क्या यह गरीबी की निशानी है?
11. हमारे देश में १०,००० लाख करोड का खनिज पाया जाता है और इसका दोहन भी विदेशी कंपनियां बहुत ही सस्ते भाव पर कर रही हैं।
12. तो क्या हम गरीब हैं?
13. जब हम रॉकेट और सैटेलाइट बना कर चांद पर पहुंच सकते हैं तो नोट छापने का कागज़ और स्याही विदेशी कंपनियों से क्यों लिया जाता है जो हमारी पीठ में छुरा घोंपकर उसी डिजाइन में थोडा सा न दिखने वाला परिवर्तन करके खरबों रुपये का नकली नोट छापकर विदेशी खुफिया तंत्रों को बेचकर हमें कंगाल बना रही हैं?
14. यदि हम गरीब होते तो क्या अंग्रेज यहां खाक छानने आये थे।
15. राबर्ट क्लाइव ९०० पानी के जहाज भरकर सोना चांदी हीरे सिर्फ कोलकाता से कैसे ले गया था?

मुगलों से लेकर अंग्रेजों तक सबने हमें लूटा और हमें समाप्त करने की कोशिश भी करी गयी, हमारे स्वाभिमान और आत्मविश्वास पर कुठाराघात भी किया गया, हमें यह सिखाया एवं विश्वास दिलाया गया कि हम कुछ नहीं कर सकते, परन्तु इस देश के लोगों का पुरुषार्थ ऐसा कि इतना लुटने के बाद,इतने षड्यंत्रों के बाद भी हम जिन्दा हैं, हाँ यह अवश्य है कि आज हम संपन्न राष्ट्र नहीं हैं, परन्तु याद रखिये जितना शोषण इस राष्ट्र का हुआ है अगर उसका 10% भी किसी और देश का हुआ होता तो वह देश शताब्दियों पहले विश्व के मानचित्र से गायब हो जाता, हम आज भी अस्तित्व में हैं यह अपने आप में गर्व का विषय है।
जिस दिन इस राष्ट्र के लोगों का स्वाभिमान पुनः जागृत हो गया विश्वास मानिये उस दिन इस राष्ट्र को अपना पुराना गौरव प्राप्त करने में तनिक भी विलम्ब न होगा, अतः गुलामी की मानसिकता से बाहर आयें, अपने राष्ट्र पर, अपने पूर्वजों पर गर्व करें, अपने पुरुषार्थ पर विश्वास करें और अपना और अपने राष्ट्र का पुनर्निर्माण करें।

"SILVER FOIL IS NOT VEGETARIAN "- accepted by companies.

Thursday, November 7, 2013

हल्दी वाला दूध

हल्दी वाला दूध ------
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रात को सोते समय देशी गाय के गर्म दूध में एक चम्मच देशी गाय का घी और चुटकी भर हल्दी डालें . चम्मच से खूब मिलाकर कर खड़े खड़े पियें.
- इससे त्रिदोष शांत होते है.
- संधिवात यानी अर्थ्राईटिस में बहुत लाभकारी है.
- किसी भी प्रकार के ज्वर की स्थिति में , सर्दी खांसी में लाभकारी है.
- हल्दी एंटी माइक्रोबियल है इसलिए इसे गर्म दूध के साथ लेने से दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों में कफ और साइनस जैसी समस्याओं में आराम होता है. यह बैक्टीरियल और वायरल संक्रमणों से लड़ने में मदद करती है.
- वजन घटाने में फायदेमंद
गर्म दूध के साथ हल्दी के सेवन से शरीर में जमा चर्बी घटती है. इसमें मौजूद कैल्शियम और मिनिरल्स सेहतमंद तरीके से वजन घटाने में सहायक हैं।
- अच्छी नींद के लिए
हल्दी में अमीनो एसिड है इसलिए दूध के साथ इसके सेवन के बाद नींद गहरी आती है.अनिद्रा की दिक्कत हो तो सोने से आधे घंटे पहले गर्म दूध के साथ हल्दी का सेवन करें.
- दर्द से आराम
हल्दी वाले दूध के सेवन से गठिया से लेकर कान दर्द जैसी कई समस्याओं में आराम मिलता है. इससे शरीर का रक्त संचार बढ़ जाता है जिससे दर्द में तेजी से आराम होता है.
- खून और लिवर की सफाई
आयुर्वेद में हल्दी वाले दूध का इस्तेमाल शोधन क्रिया में किया जाता है। यह खून से टॉक्सिन्स दूर करता है और लिवर को साफ करता है. पेट से जुड़ी समस्याओं में आराम के लिए इसका सेवन फायदेमंद है.
- पीरियड्स में आराम
हल्दी वाले दूध के सेवन से पीरियड्स में पड़ने वाले क्रैंप्स से बचाव होता है और यह मांसपेशियों के दर्द से छुटकारा दिलाता है.
- मजबूत हड्डियां
दूध में कैल्शियम अच्छी मात्रा में होता है और हल्दी में एंटीऑक्सीडेट्स भरपूर होते हैं इसलिए इनका सेवन हड्डियों को मजबूत करता है और शरीर की प्रतिरोधी क्षमता घटाता है.
- इसे पिने से गैसेस निकलती है और अफारा , फुले पेट में तुरंत लाभ मिलता है.
हल्दी वाला दूध ------
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रात को सोते समय देशी गाय के गर्म दूध में एक चम्मच देशी गाय का घी और चुटकी भर हल्दी डालें . चम्मच से खूब मिलाकर कर खड़े खड़े पियें.
- इससे त्रिदोष शांत होते है.
- संधिवात यानी अर्थ्राईटिस में बहुत लाभकारी है.
- किसी भी प्रकार के ज्वर की स्थिति में , सर्दी खांसी में लाभकारी है.
- हल्दी एंटी माइक्रोबियल है इसलिए इसे गर्म दूध के साथ लेने से दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों में कफ और साइनस जैसी समस्याओं में आराम होता है. यह बैक्टीरियल और वायरल संक्रमणों से लड़ने में मदद करती है.
- वजन घटाने में फायदेमंद
गर्म दूध के साथ हल्दी के सेवन से शरीर में जमा चर्बी घटती है. इसमें मौजूद कैल्शियम और मिनिरल्स सेहतमंद तरीके से वजन घटाने में सहायक हैं।
- अच्छी नींद के लिए
हल्दी में अमीनो एसिड है इसलिए दूध के साथ इसके सेवन के बाद नींद गहरी आती है.अनिद्रा की दिक्कत हो तो सोने से आधे घंटे पहले गर्म दूध के साथ हल्दी का सेवन करें.
- दर्द से आराम
हल्दी वाले दूध के सेवन से गठिया से लेकर कान दर्द जैसी कई समस्याओं में आराम मिलता है. इससे शरीर का रक्त संचार बढ़ जाता है जिससे दर्द में तेजी से आराम होता है.
- खून और लिवर की सफाई
आयुर्वेद में हल्दी वाले दूध का इस्तेमाल शोधन क्रिया में किया जाता है। यह खून से टॉक्सिन्स दूर करता है और लिवर को साफ करता है. पेट से जुड़ी समस्याओं में आराम के लिए इसका सेवन फायदेमंद है.
- पीरियड्स में आराम
हल्दी वाले दूध के सेवन से पीरियड्स में पड़ने वाले क्रैंप्स से बचाव होता है और यह मांसपेशियों के दर्द से छुटकारा दिलाता है.
- मजबूत हड्डियां
दूध में कैल्शियम अच्छी मात्रा में होता है और हल्दी में एंटीऑक्सीडेट्स भरपूर होते हैं इसलिए इनका सेवन हड्डियों को मजबूत करता है और शरीर की प्रतिरोधी क्षमता घटाता है.
- इसे पिने से गैसेस निकलती है और अफारा , फुले पेट में तुरंत लाभ मिलता है.

कैसे रहें भूतों से सुरक्षित

कैसे रहें भूतों से सुरक्षित

हिन्दू धर्म में भूतों से बचने के अनेकों उपाय बताए गए हैं। पहला धार्मिक उपाय यह कि गले में ॐ या रुद्राक्ष का लाकेट पहने, सदा हनुमानजी का स्मरण करें। चतुर्थी, तेरस, चौदस और अमावस्य को पवि‍त्रता का पालन करें। शराब न पीएं और न ही मांस का सेवन करें। सिर पर चंदन का तिलक लगाएं। हाथ में मौली (नाड़ा) अवश्य बांधकर रखें।

घर में रात्रि को भोजन पश्चात सोने से पूर्व चांदी की कटोरी में देवस्थान पर कपूर और लौंग जला दें। इससे आकस्मिक, दैहिक, दैविक एवं भौतिक संकटों से मुक्त मिलती है।

प्रेत बाधा दूर करने के लिए पुष्य नक्षत्र में धतूरे का पौधा जड़ सहित उखाड़कर उसे ऐसा धरती में दबाएं कि जड़ वाला भाग ऊपर रहे और पूरा पौधा धरती में समा जाए। इस उपाय से घर में प्रेतबाधा नहीं रहती।

प्रेत बाधा निवारक हनुमत मंत्र- ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ऊँ नमो भगवते महाबल पराक्रमाय भूत-प्रेत पिशाच-शाकिनी-डाकिनी-यक्षणी-पूतना-मारी-महामारी, यक्ष राक्षस भैरव बेताल ग्रह राक्षसादिकम्‌ क्षणेन हन हन भंजय भंजय मारय मारय शिक्षय शिक्षय महामारेश्वर रुद्रावतार हुं फट् स्वाहा। इस हनुमान मंत्र का पांच बार जाप करने से भूत कभी भी निकट नहीं आ सकते।

हनुमान जी के बाद मां कालका के स्मरण मात्र से किसी भी प्रकार की भूतबाधा है तो तत्काल ही हट जाती है। मां काली के कालिका पुराण में कई मंत्रों का उल्लेख मिलता है।

सरसों के तेल का या शुद्ध घी का दिया जलाकर काजल बना लें। ये काजल लगाने से भूत, प्रेत, पिशाच आदि से रक्षा होती है और बुरी नजर से भी रक्षा होती है।

चरक संहिता में प्रेत बाधा से पीड़ित रोगी के निदान के उपाय विस्तार से मिलते हैं। ज्योतिष साहित्य के मूल ग्रंथों- प्रश्नमार्ग, वृहत्पराषर, होरा सार, फलदीपिका, मानसागरी आदि में ज्योतिषीय योग हैं जो प्रेत पीड़ा, पितृदोष आदि बाधाओं से मुक्ति का उपाय बताते हैं। अथर्ववेद में दुष्ट आत्माओं को भगाने से संबंधित अनेक उपायों का वर्णन मिलता है।

सावधानी : नदी, पूल या सड़क पार करते समय भगवान का स्मरण जरूर करें। एकांत में शयन या यात्रा करते समय पवित्रता का ध्यान रखें। पेशाब करने के बाद धेला अवश्य लें और जगह देखकर ही पेशाब करें। रात्रि में सोने से पूर्व भूत-प्रेत पर चर्चा न करें। किसी भी प्राकार के टोने-टोटकों से बच कर रहें।

ऐसे स्थान पर न जाएं जहां पर तांत्रिक अनुष्ठान होता हो, जहां पर किसी पशु की बलि दी जाती हो या जहां भी लोबान आदि धुंवे से भूत भगाने का दावा किया जाता हो। भूत भागाने वाले सभी स्थानों से बच कर रहें, क्योंकि यह धर्म और पवित्रता के विरुद्ध है।

जो लोग भूत, प्रेत या पितरों की उपासना करते हैं वह राक्षसी कर्म के होते हैं ऐसे लोगों का संपूर्ण जीवन ही भूतों के अधिन रहता है। भूत-प्रेत से बचने के लिए ऐसे कोई से भी टोने-टोटके न करें जो धर्म विरुद्ध हो। हो सकता है आपको इससे तात्कालिक लाभ मिल जाए, लेकिन अंतत: जीवन भर आपको परेशान ही रहना पड़ेगा।

अन्य उपाय :
यदि बच्चा बाहर से आए और थका, घबराया या परेशान सा लगे तो यह नजर लगने की पहचान है। ऐसे में उसके सर से 7 लाल मिर्च और एक चम्मच राई के दाने 7 बार घूमाकर उतारा कर लें और फिर आग में जला दें। यदि डरावने सपने आते हों, तो हनुमान चालीसा और गजेंद्र मोक्ष का पाठ करें और हनुमान मंदिर में हनुमानजी का श्रृंगार करें व चोला चढ़ाएं।

अशोक वृक्ष के सात पत्ते मंदिर में रख कर पूजा करें। उनके सूखने पर नए पत्ते रखें और पुराने पत्ते पीपल के पेड़ के नीचे रख दें। यह क्रिया नियमित रूप से करें, घर भूत-प्रेत बाधा, नजर दोष आदि से मुक्त रहेगा।

भूतादि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान

भूतादि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान उसके स्वभाव एवं क्रिया में आए बदलाव से की जाती है। अगल-अलग स्वाभाव परिवर्तन अनुसार जाना जाता है कि व्यक्ति कौन से भूत से पीड़ित है।
भूत पीड़ा : यदि किसी व्यक्ति को भूत लग गया है तो वह पागल की तरह बात करने लगता है। मूढ़ होने पर भी वह किसी बुद्धिमान पुरुष जैसा व्यवहार भी करता है। गुस्सा आने पर वह कई व्यक्तियों को एक साथ पछाड़ सकता है। उसकी आंखें लाल हो जाती हैं और देह में सदा कंपन बना रहता है।
पिशाच पीड़ा : पिशाच प्रभावित व्यक्ति सदा खराब कर्म करना है जैसे नग्न हो जाना, नाली का पानी पीना, दूषित भोजन करना, कटु वचन कहना आदि। वह सदा गंदा रहता है और उसकी देह से बदबू आती है। वह एकांत चाहता है। इससे वह कमजोर होता जाता है।
प्रेत पीड़ा : प्रेत से पीड़ित व्यक्ति चिल्लाता और इधर-उधर भागता रहता है। वह किसी का कहना नहीं सुनता। वह हर समय बुरा बोलता रहता है। वह खाता-पीता नही हैं और जोर-जोर से श्वास लेता रहता है।
शाकिनी पीड़ा : शाकिनी से ज्यादातर महिलाएं ही पीड़ित रहती हैं। ऐसी महिला को पूरे बदन में दर्द बना रहता है और उसकी आंखों में भी दर्द रहता है। वह अक्सर बेहोश भी हो जाती है। कांपते रहना, रोना और चिल्लाना उसकी आदत बन जाती है।
चुडैल पीड़ा : चुडैल भी ज्यादातर किसी माहिला को ही लगती है। ऐसी महिला यदि शाकाहारी भी है तो मांस खाने लग जाएगी। वह कम बोलती, लेकिन मुस्कुराती रहती है। ऐसी महिला कब क्या कर देगी कोई भरोसा नहीं।
यक्ष पीड़ा : यक्ष से पीड़ित व्यक्ति लाल रंग में रुचि लेने लगता है। उसकी आवाज धीमी और चाल तेज हो जाती है। वह ज्यादातर आंखों से इशारे कहता रहता है। इसकी आंखें तांबे जैसी और गोल दिखने लगती हैं।
ब्रह्मराक्षस पीड़ा : जब किसी व्यक्ति को ब्रह्मराक्षस लग जाता है तो ऐसा व्यक्ति बहुत ही शक्तिशाली बन जाता है। वह हमेशा खामोश रहकर अनुशासन में जीवन यापन करता है। इसे ही जिन्न कहते हैं। यह बहुत सारा खाना खाते हैं और घंटों तक एक जैसे ही अवस्था में बैठे या खड़े रहते हैं। जिन्न से ग्रस्त व्यक्ति का जीवन सामान्य होता है ये घर के किसी सदस्य को परेशान भी नहीं करते हैं बस अपनी ही मस्ती में मस्त रहते हैं। जिन्नों को किसी के शरीर से निकालना अत्यंत ही कठीन होता है।
इस तरह से और भी कई तरह के भूत होते हैं जिनके अलग अलग लक्षण और लक्ष्य होते हैं।

मांसाहार न करें.

मांसाहार न करें.
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वैज्ञानिक कारण-
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शरीर हारमोनो से संचालित है
हारमोन वह केमिकल हैं जो शरीर से ही स्रावित होते हैं और इसी में अवशोषित होकर इसे प्रभावित कर देते हैं, यह प्रभाव चिरस्थाई होता है. इस प्रभाव को किसी प्रकार मिटाया नही जा सकता. जब हमारी ह्त्या होती है तो हम विषाक्त हारमोन छोड़ते हैं क्यूँ की हमारा मन भय, यंत्रणा और विषाद से भरा होता है. यही सत्य है पशुओ के साथ. एक पशु जब मरता है तो उसके भीतर विषाक्त हारमोन निकल कर उसके मांस में जज्ब हो जाते हैं. पशु समूह में रहते हैं और नित्य अपने साथी को ह्त्या होते महसूस करते हैं. यह हारमोन अनेक दफा रिस-रिस कर उनके मांस में मिल चुका होता है. यह हारमोन विकार, भय, विषाद और भयानक यंत्रणा का परिणाम है और भोजन द्वारा मांसाहारी के शरीर में पहुँच कर वही भाव उत्पन्न करेगा. मांसाहारी स्वयं को हिंसक होने से नही रोक सकता, वह भय ग्रस्त होता है, अवसाद उसकी प्रवृति होती है. क्रोध का वह दास हो जाता है और अनेक व्याधियां उसे घेर लेती हैं . आप मांस खाने के बाद कभी उत्फुल और हल्का अनुभव नही कर सकते .. मांस खाने के बाद एक नकारात्मक भाव हमेशा घेरता है यह उन जहरीले हारमोनो के कारण है.
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शारीरिक कारण-
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मनुष्य का पेट शाकाहार के लिए उपयुक्त है. मानव आंत लम्बी है और यह प्राथमिक आहार के लिए बनाई गयी है. मांस द्वितीयक आहार है .. द्वितीयक आहार का अर्थ है यह पशुओ द्वारा पहले ही पचाया जा चुका है. मांस पुनः हमारे अमाशय में जाता है और यह प्राथमिक आहार की भाँती यंत्र में यात्रा करता है .. अंत कन्फ्यूज हो जाती है. मांस जल्दी पच जाता है लेकिन आँतों में अनेक मेटाबोलिक विकार पैदा करता है. जैसे गैस, एसिडिटी, अल्सर, अपच, कब्ज, आदि. यह शरीर के कन्फ्यूजन के कारण होता है. मांसाहारी पशुवों का अमाशय हमेशा छोटा होता है. जैसे शेर, चीता, मगर आदि का पेट कभी बड़ा नही होता. मानव का पेट शाकाहार के लिए बना है.
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आध्यात्मिक कारण-
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मानव पंचेन्द्रिय है. अर्थात उसके पास पांच ज्ञानेन्द्रियाँ हैं. जैन धर्म में इसका गहनतम शोध हुआ है . इसी प्रकार पशु चात्रुरेंद्रिय हैं, पौधे द्वेन्द्रिय हैं और पत्थर जड़ आदि एकेंद्रिय हैं. लोग कहते हैं की आखिर पौधों में भी तो जान है तो क्या वह ह्त्या नही हुई?
हमे कम हिंसा और अधिक हिंसा में चुनना है. हिंसा का प्रश्न बाद में है हमारी संवेदना का प्रश्न पहले है. हम हिंसा न भी करे तो भी मृत्यु होती ही है लेकिन हिंसा करके हम कर्मो का जो जाल बनाते हैं वह हमे भुगतान करना पड़ता है. साधारण जीवन में हम कम भुगतान करके अच्छी चीज़ें खरीदते हैं. जैसे टी वी हम वही लेते हैं जो कम मूल्य में अधिक गुणवत्ता पूर्ण हो.. इसी भाँती यदि हम चतुरेंद्रिय की बजाय द्विएन्द्रिय का आहार करेंगे तो यह कम भूगतान में काम चल जाएगा. इससे हिंसा नही होगी. कारण यह है की हमने अपनी संवेदना का विकास किया. इसी लिए धर्मो ने शाकाहार पर इतना जोर दिया है. उपरोक्त विषाक्तता से भी बच जायेंगे और एक अन्य महत्वपूर्ण अंतर यह है की अन्न या वृक्ष का बीज उनके मृत्यु के बाद भी काम आता है. धान का पौधा जो बीज देगा वह धान के काटने के बाद भी काम आएगा. पशु के सन्दर्भ में ऐसा नही है. पशु एक जटिल संरचना है.जो जीवन की मुक्ति में उत्सुक है वह जटिलता से सहजता की तरफ अभियान करता है. कर्म्बंधों का जाल नही निर्मित करता है.
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कॉस्मिक कारण
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आत्मलोक में हम एक प्रेम पूर्ण जगत में रहते हैं. शाकाहार हमें मृत्यु के बाद की आत्मग्लानि से बचाता है. आत्मलोक का जिन्हें अनुभव है वह यह जानते हैं की शिक्षण के क्रम में हमें उन जीवों से सामना करना होता है जिसको हमने कष्ट दिया है. ( वैज्ञानिक विवरण के लिए पढ़े- डेस्टिनी ऑफ़ सोल- माईकल न्यूटन) यह कष्ट हमारे आगामी जन्म की दिशा और दशा का निर्धारण करता है. यदि हमने परोपकार का जीवन जिया है तो मानसिक /आत्मिक लोक में हम सुख का उपभोग करते हैं. यह स्वर्ग कहा गया है अन्यथा जघन्य विषाद का- यानी नर्क का. क्यूँ की अस्तित्व में यह स्वयं सिद्ध नियम है की चीज़े पुनः पुनः हमपर ही लौट आतीं हैं. क्यूँ की अंततः हमारे अतिरिक्त कोई और नही है. यह अद्वैत का अनुभव है.
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मानसिक कारण-
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हम केवल स्थूल शरीर नही हैं. हमारे भीतर अन्य ७ शरीर है. जिसे मैंने अपने आलेख सम्भोग और समाधि: पूर्ण विज्ञान में विस्तार से बताया है,( यह आलेख नीचे के पोस्ट में उपलब्ध है.) हमारे पास एक मनस शरीर है. जो भावों और विचारों से ही संचालित होता है. हमारा स्थूल शरीर सिर्फ आहार से बनता है. मांसाहार इसे विकृत करता है और इसकी पारदर्शिता को नष्ट कर देता है. विकृत स्थूल शरीर को अन्य गहरे शरीरों का अनुभव नही होता . जैसे हमारा दुसरा शरीर है मनस शरीर जो बनता है हमारे मानसिक आहार से. यह विकसित नहीं हो पायेगा यदि प्रथम शरीर स्वस्थ नही हो तो. अतः मांसाहार हमारी प्रतिभा को कुंद करता है. मांसाहारी बुद्धिमान नही हो सकते. जिन परिवारों में पीढ़ी दर पीढ़ी मांस खाया गया हो वह पशुवत हो जाते हैं. क्यूँ की स्थूल आहार पशु का है तो प्रभाव भी पशु का ही होना तय है. शरीरो का यह असंतुलन पागलपन में और अन्य मानसिक व्याधियो में बदल जाता है. ब्रिटेन में गाय का मांस खाने वाले पागलपन की एक नई किस्म से पीड़ित हैं. मांसाहार पागलपन और त्वचा रोग का सबसे बड़ा कारण है.
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धार्मिक कारण-
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धर्म है अपने आत्मा की खोज. यह साधनाओ का सार है. सत -चित आनंद का अभियान है. धर्म साधना में आहार यदि निर्भार करने वाला हो. सात्विक हो, अनुत्तेजना देने वाला हो तो यात्रा को पंख लग जाते हैं और मंजिल कम से कम प्रयासों में उपलब्ध हो जाती है. उसी प्रकार जिस प्रकार नाव सागर में चल रही है और हवा भी अनुकूल है. सम्यक शाकाहार अनुकूलन करता है. एक मांसाहारी व्यक्ति ध्यान में १ घंटे नही बैठ सकता. वह गहरे ध्यान में नही जा सकता. जिसने मुर्दा खा रखा है वह समाधि की कल्पना नही कर सकता. जिसने इतनी असंवेदना दिखाई है की किसी की जान हथ कर आहार कर लिया है उसके ह्रदय में परमात्मा को अतिकोमल पुष्प कैसे खिलेगा? इसीलिए धर्मों ने साधना में शाकाहार का इतना महत्व दिया है.
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नैतिक कारण-
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मुझे याद है की मैं जब हॉस्टल में थी और मेस में खाना खाती थी तो मुझसे मेरे मित्र एक प्रश्न अक्सर करते थे. क्षत्रिय कुल/गोत्र/जाती की होकर भी तुम मांस नही खाती?
मैं उनसे पूछती - ' एक बात का उत्तर दो ! क्षत्रित्व नष्ट करने में है की सृजन करने में? क्षत्रित्व संवेदना में है की ह्त्या में? क्षत्रित्व जीवन देने में है? रक्षा करने में है की दुर्बल को मारने में? और आगे मुझे कहने की आवश्यकता नही की उनका क्या उत्तर होगा? मेरे २ साल के अध्ययन काल में उस मेस में मांसाहार बंद हो गया. कुछ मुस्लिम और आदिवासी भी थे उन्होंने ने भी मांसहार त्याग दिया. मानवता है किसी का कुछ भला कर सके तो कर दिया.. न कर सके तो कम से कम बुरा न किया. यह मानव होने का अन्तर्निहित अर्थ है. मांसाहार मानवता के विरुद्ध आचरण है.
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अतिरंजनाये-
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* इस्लाम में मांसाहार की अनुमति है.
यह गलत है. एक जगह बकरे की क़ुरबानी का वर्णन है जो इस सन्दर्भ में है की अपने प्रिय वस्तु की क़ुरबानी दो. जीवो पर दया करने का स्पष्ट आदेश है कुरआन में.
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* बुद्ध में मरे हुए पशु की मांस खाने की अनुमति दी.
यह सत्य है पर यह बुद्ध की मनुष्य के अंधी खाई में कूदने को टालने के लिए छोटे गढ्ढे में कूदने की अनुमति देने के समान है. ताकि कम से कम नुक्सान हो. मनुष्य मूर्छित है. प्रतिबंधित चीज़ उसके मन में अवरोध बन जाती है. मांस खा कर ध्यान नही हो सकता तो जो मांस पर ही अटक गया है उसे खिला दो. उब कर वह ध्यान करने को इसे त्याग देगा. बुद्ध की यह अति जड़ शिष्यों के लिए करुणा थी. और कोई नियम मूर्छित को नही रोक सकते जब तह वह खुद ही न चेते.
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*जीसस , रामकृष्ण, विवेकानंद मांसाहारी थे.
इसके स्पष्ट प्रमाण नही उपलब्ध. रामकृष्ण तो पार थे. उनके लिए अब क्या नियम .क्या त्याग? जीसस आदिम समाज में थे अतः संभव हो सकता है पर कहीं उल्लिखित नही. विवेक नन्द बंगाली संस्कृति में थे .. वह अंततः उपलब्ध हुए. मांस एक अवरोध बना रहा. और उनके मांस के नही वरन मछली खाने की चर्चा है.
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* मांसाहारी बलिष्ट होते हैं.
सांड सदा कमल के फुल से मजबूत होगा लेकिन कभी मूल्यवान नही. बल सूक्ष्म हो तो ज्यादा प्रभावकारी है. कोमलता, सौन्दर्य का भी बल होता है.
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* मांसाहार नही करेंगे तो पशुवो की संख्या अनियंत्रित तौर पर बढ़ जायेगी.
यह मनुष्यों पर भी लागू होता है तो ऐसे विचार धारा के लोग मानव खाना भी प्रारंभ करे.
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मांसाहार के भयानक तथ्य:
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वैश्विक ऊष्मण (Global Warming) को कम करने के लिए 1997 में जापान के क्योटो शहर में दुनिया के 156 देशों के द्वारा एक अंतर्राष्ट्रीय संधि हुई जिसे क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol) कहते हैं। इसका उद्देश्य वैश्विक ऊष्मण के कारणों का पता लगाना था। इसमें वैज्ञानिकों का एक बड़ा दल बना जिसके अध्यक्ष थे - डॉ॰ आर॰ के॰ पचौरी। इस दल ने 4 वर्षों के अध्ययन के बाद बताया की सारी दुनिया में गर्मी बढ्ने का मुख्य कारण है लोगों द्वारा मांसाहारी भोजन का उपयोग एवं उपभोग।

* दुनिया भर में मांस उत्पादन: दुनिया में लगभग 200 देश हैं और सभी देशों को मिलाकर मांस का कुल उत्पादन 26 करोड़ 50 लाख मीट्रिक टन (एक मीट्रिक टन में लगभग 1000 किग्रा॰ होते हैं)। मांस कंपनियों का कहना है की 2050 तक इस उत्पादन को 46 करोड़ मीट्रिक टन कर देंगे, माने आज के उत्पादन का लगभग दो गुना। इसके मांस कंपनियां पूरी दुनिया को मांसाहारी बनाने के काम में लग गयी हैं। इनके विज्ञापन रोज़ टीवी पर आ रहे हैं। ये मांस कंपनियों का ही विज्ञापन है "संडे हो या मंडे, रोज़ खाओ अंडे" ? और हमारे देश के कई अभिनेता, अभिनेत्री, खिलाड़ी और सम्माननीय लोग पैसे के लालच में अंडों का विज्ञापन करते हैं, जो खुद निजी ज़िंदगी में शाकाहारी हैं।
कुल मांस का उत्पादन 26 करोड़ 50 लाख मीट्रिक टन है जिसमें से मुर्गे मुर्गियों के मांस का उत्पादन है 1 करोड़ मीट्रिक टन। सूअर के मांस का उत्पादन है 10 करोड़ मीट्रिक टन। गाय के मांस का उत्पादन है 6 करोड़ मीट्रिक टन। इतने मांस के उत्पादन के लिए हर साल पूरी दुनिया में 46 अरब (4600 करोड़) जानवरों का कत्ल होता है।

* भारत की स्थिति: भारत में हर साल 58 लाख मीट्रिक टन मांस का उत्पादन होता है अर्थात् पूरी दुनिया के मांस उत्पादन का लगभग 2%। भारत में 121 करोड़ नागरिक हैं जिनमें 70% शाकाहारी और 30% मांसाहारी हैं। भारत सरकार के 2009 के आंकड़ों के अनुसार भारत में मांस के उत्पादन में गाय का मांस 14 लाख टन पैदा होता है, भैंस का मांस करीब 14 लाख टन, मटन करीब 2.5 लाख टन, सूअर का मांस करीब 6 लाख 30 हज़ार टन, मुर्गे- मुर्गियों का मांस 16 लाख टन और बाकी छोटे जानवरों का शामिल है। इतने मांस के उत्पादन के लिए भारत में करीब 10 करोड़ 50 लाख जानवरों का कत्ल किया गया। इनमें करीब 4.5 करोड़ गाय, भैंस, बैल हैं और बाकी छोटे जानवर जैसे- बकरे- बकरी, मुर्गे- मुर्गी आदि।
भारत में 3600 सरकार के रजिस्टर्ड (Registered) कत्लखाने हैं और करीब 36000 अनरजिस्टर्ड (Unregistered) कत्लखाने हैं।

* भोजन की कमी और मांसाहार: 1 एकड़ खेत के एक साल के उत्पादन से 22 लोगों का पेट भरा जा सकता है लेकिन यदि उसी एक एकड़ खेत के एक साल के उत्पादन को अगर जानवरों को खिलाया जाए और फिर उनका मांस खाया जाए तो केवल 2 लोगों का पेट साल भर के लिए भरा जा सकता है।
जानवरों को अनाज इसलिए खिलाया जाता है ताकि उनमें मांस बढ़े और जिन्हें मांस खाना है उन्हें अच्छा मांस मिल सके। विकासशील देशों में जानवरों को कुल कृषि से उत्पन्न अन्न का लगभग 40% हिस्सा खिला दिया जाता है। भारत जैसे 186 विकासशील देश हैं जो कुल कृषि की उपज का 40% हिस्सा जानवरों को खिला देते हैं। विकसित देशों में जानवरों को कुल कृषि से उत्पन्न अन्न का लगभग 70% हिस्सा खिला दिया जाता है। अमेरिका जैसे दुनिया में 17 विकसित देश हैं। अगर 40% और 70% का औसत निकाला जाए तो 55% निकलता है। अर्थात् दुनिया में औसतन आधा अनाज जानवरों को खिलाकर, उनके मांस को कुछ लोग खाते हैं। इससे अच्छा अगर वो अनाज सीधे ही हम खा जाएँ और जानवरों वाला अनाज मनुष्यों को खाने को मिल जाए तो सारी दुनिया में कहीं भी (एशिया, अफ्रीका में) भूखमरी नहीं होगी। यूएन के अनुसार हर दिन दुनिया में 40,000 लोग भूख से मर जाते हैं। सारी दुनिया में 200 करोड़ लोग भुखमरी की कगार पर हैं अर्थात् दुनिया की करीब 1/3 जनसंख्या भुखमरी की कगार पर है। यूएन की संस्था एफ़एओ (FAO) का कहना है की अगर सारी दुनिया में मांस खाने वाले लोग अपने मांस के उपभोग में सिर्फ 10% की कटौती कर दें या 10% लोग शाकाहारी हो जाएँ तो पूरी दुनिया में एक भी व्यक्ति भूख से नहीं मरेगा।

अमेरिका में हर आदमी एक साल में 165 किलो, चीन में 95 किलो, यूरोप और कनाडा में 130 किलो और भारत में 3.5 किलो मांस प्रतिवर्ष खाता है।

* अब आप सोचेंगे जानवरों के लिए भोजन कहाँ से आयेगा ??
प्रकृति ने बहुत सुंदर व्यवस्था कर राखी है जहां से हमारे लिए भोजन आता है, वहीं से जानवरों के लिए भी पैदा होता है। गेहूं के पौधे का ऊपर वाला लगभग एक फुट का हिस्सा ही हमारे काम आता है और बचा हुआ नीचे का 6-7 फुट जानवरों के काम आता है। इसी तरह मक्का और बाजरा में भी ऊपर का बाल वाला एक फुट हिस्सा हमारे काम आता है और बाकी का जानवरों के काम आता है। मनुष्य के लिए कुल जितना उत्पादन चाहिए उससे 6-7 गुना ज्यादा उत्पादन चारे का हो जाता है।

* मांस उद्योग के कर्ण जंगलों की कटाई: वैज्ञानिकों का कहना है की जंगलों की कटाई का सबसे बड़ा कारण है- मांस उद्योग का बढ़ते जाना। मांस उद्योग में मांस की पैकिंग और उस पैकिंग को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल है- लकड़ी। जिस कच्चे माल का डिब्बे बनाने में इस्तेमाल होता है। वैज्ञानिकों का कहना है की जंगलों की समाप्ति को अगर रोकना है तो मांस उद्योग को बंद कर दिया जाए।

* मांस उद्योग में पानी की बर्बादी: एक किलो मांस पैदा करने में न्यूनतम 70,000 लीटर पानी लगता है तो 285000000 मीट्रिक टन मांस पैदा करने के लिए 19950000000000000 लीटर पानी बर्बाद होता है।
अर्थात् हम छ: महीने नहाने में जो पानी खर्च करते हैं, उतना ही पानी एक किलो मांस पैदा करने में लग जाता है। अच्छे से अच्छा पानी पीने वाला व्यक्ति अगर एक दिन में 3 लीटर पानी पिये तो महीने में 90 लीटर और साल में 900-1000 लीटर पानी पिएगा। इस तरह 70 साल में वो व्यक्ति 70000 लीटर पानी पिएगा, उतना पानी 1 किलो मांस के उत्पादन में लगता है।
भारत में 20 करोड़ परिवार हैं। मांस पैदा करने वाले उद्योग के लिए एक साल में जितना पानी खर्च होता है उतने ही खर्च में 20 करोड़ परिवारों का सारी ज़िंदगी का पानी का खर्च चल सकता है। एक तरफ भारत ए 14 करोड़ परिवारों को पीने का शुद्ध पानी न मिले और दूसरी तरफ मांस उत्पादन करने वाली कंपनियां लाखों लीटर पानी बर्बाद करें। ये तो बहुत बड़ा अन्याय है ???

* मांस उद्योग के कारण प्राकृतिक आपदाएँ: कत्लखानों में जानवरों को तड़पा तड़पा कर मारा जाता है। बड़े जानवरों को भूखा रखकर उनके शरीर को कमजोर किया जाता है, फिर उनके ऊपर गरम पानी (70-100 डिग्री सेंटीग्रेट) की बौछार डाली जाती है, जिससे उनका शरीर फूलना शुरू हो जाता है। जब उनका शरीर पूरी तरह फूल जाता है तो जीवित अवस्था में ही उनकी खाल को उतारा जाता है। निकालने वाले खून को इकट्ठा किया जाता है और धीरे-2 जानवर मर जाते हैं। इस प्रक्रिया में जानवर बहुत तेज़ चीखते- चिल्लाते हैं। जानवरों की चीखें पूरे वातावरण को तरंगित कर देती हैं और वातावरण में घूमती रहती हैं। इसका वातावरण और मनुष्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और यह नकारात्मक प्रभाव जब बढ्ने लगता है तो लोगों में हिंसा की प्रवत्ति बढ्ने लगती है और इस हिंसा और नाकारात्मकता के कारण दुनिया में अत्याचार और पाप बढ़ रहा है।
"दिल्ली विश्वविद्यालय के 3 प्रोफेसर है जिन्होने 20 साल इस पर रिसर्च और अध्ययन किया है ये नाम हैं डॉ॰ मदन मोहन बजाज, डॉ॰ मोहम्मद सैय्यद मोहम्मद इब्राहिम और डॉ। विजय राज सिंह उनकी भौतिकी (Physics) की रिसर्च कहती है की जितना जानवरों को कत्ल किया जाएगा, जानवरों पर जितनी हिंसा की जाएगी, उतना ही अधिक दुनिया में भूकंप आएंगे। उन्होने दुनिया और भारत में जहां जहां कत्लखाने हैं वहाँ रहकर देखा। जानवरों के निकालने वाली Shock Waves को एब्सॉर्ब (Absorb) किया और उनको नापा, तौला और उनका अध्ययन किया और पाया की दुनिया में जो प्राकृतिक आपदाएँ हो रही हैं उनका बहुत बड़ा कारण हैं- कत्लखाने और उनसे निकालने वाली जानवरों की चीख पुकार।

* क्या आप जानते हैं ??
१. कैलिफोर्निया में दुनिया का सबसे बड़ा कत्लखाना है जहां दिन में 36,000 गायों को काटा जाता है।
२. महाराष्ट्र के देवनार में भारत का सबसे बड़ा कत्लखाना है जहां  प्रतिदिन 14,000 गायों को काटा जाता है।

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