Sunday, September 29, 2013

नवाज शरीफ ने मनमोहन सिंह की तुलना की 'देहाती औरत' से!


नवाज शरीफ ने मनमोहन सिंह की तुलना की 'देहाती औरत' से!



आज तक ब्यूरो [Edited By: नमिता शुक्ला] | न्यूयॉर्क, 29 सितम्बर 2013 | अपडेटेड: 12:07 IST
टैग्स: नवाज शरीफ| मनमोहन सिंह| शांति वार्ता| भारत-पाकिस्तान रिश्ते| देहाती औरत बयान

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नवाज शरीफ
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने युनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली के दौरान कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद का केंद्र है, तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कथित रूप से भारतीय पीएम को 'देहाती औरत' कह डाला.

नवाज शरीफ ने ये विवादित बयान पाकिस्तान के न्यूज चैनल जियो टीवी के न्यूज एंकर हामिद मीर को ऑफ द रिकॉर्ड दिया. मनमोहन सिंह ने कहा कि पाकिस्तान की धरती पर आतंकवाद को पनाह मिल रही है और इस विषय पर उनकी चर्चा अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा से भी हुई. इसी पर चर्चा करते हुए शरीफ ने मीर से कहा, 'मनमोहन सिंह 'देहाती औरत' की तरह इस मुद्दे को उठा रहे हैं.' मीर ने बताया इस ब्रीफिंग के दौरान भारत की एक महिला पत्रकार भी वहां मौजूद थी.

नवाज शरीफ ने ये बयान इस संदर्भ में दिया था कि जिस तरह से देहाती औरतें आपस का झगड़ा लेकर हमेशा तीसरे के पास पहुंच जाती हैं, वैसे ही मनमोहन भारत-पाकिस्तान का झगड़ा लेकर अमेरिका के पास पहुंच जाते हैं.


इसके बाद मीर ने एक भारतीय चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि शरीफ ने बहुत हल्के अंदाज में ऐसा कहा था. इससे पहले पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था, वह अपने यहां मौजूद ‘आतंकी मशीनरी’ को बंद करे. संयुक्त राष्ट्र महासभा के अपने संबोधन में मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की इस मांग को लगभग नकार दिया कि कश्मीर मुद्दे का हल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के तहत किया जाये और कहा कि भारत सभी मुद्दों का समाधान शिमला समझौते के तहत चाहता है.

'शांति वार्ता के चलते हुआ था मेरा तख्ता पलट'
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ बेहद महत्वपूर्ण वार्ता से पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने शनिवार को कहा कि भारत के साथ शांति वार्ता शुरू करने के कारण ही उन्हें 1999 में सैन्य तख्ता पलट के बाद सत्ता छोड़नी पड़ी थी.

पाकिस्तानी-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करते हुए शरीफ ने यह टिप्पणी की. शरीफ ने कहा कि बतौर प्रधानमंत्री उनके पिछले कार्यकाल के दौरान सैन्य नेतृत्व ने उन्हें सत्ता से इसलिए हटा दिया क्योंकि उन्होंने भारत के साथ शांति और मित्रता की प्रक्रिया शुरू की थी.

उन्होंने दर्शकों से सवाल किया, ‘मैंने क्या गलती की थी?’ उन्होंने कहा कि वह भारत और अफगानिस्तान के साथ शांति को लेकर प्रतिबद्ध हैं. 1999 में कारगिल युद्ध के बाद शरीफ और तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ के बीच मतभेद होने के बाद जनरल ने सैन्य तख्ता पलट के माध्यम से शरीफ को पद से हटा दिया था.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि वह मानते हैं कि अगर भारत और अफगानिस्तान में शांति है तो पाकिस्तान में भी शांति होगी. ऐसा माना जा रहा है कि शरीफ ने पाकिस्तानी-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करते हुए कहा है कि उनकी सरकार भारत और अफगानिस्तान के साथ शांति और अहस्तक्षेप की नीति की पक्षधर है.

शरीफ की पार्टी इस साल मई में हुए आम चुनावों में भारी बहुमत से जीत कर सत्ता में आयी है. उन्होंने कहा कि साथ ही पाकिस्तान अपने पड़ोसियों से आशा करता है कि वे उसके मामलों में दखल न दें. शरीफ ने कहा, ‘सिर्फ इसी स्थिति में क्षेत्र में दीर्घावधिक शांति और स्थिरता हासिल की जा सकती है.’ उन्होंने क्षेत्र में रक्षा मामलों पर खर्च को भी कम करने की बात कही. उनके अनुसार क्षेत्र में रक्षा मामलों पर बहुत ज्यादा खर्च होता है.


और भी... http://aajtak.intoday.in/story/nawaz-calls-manmohan-a-dehati-aurat-1-743194.html

'देहाती औरत कह कर नवाज ने पीएम का अपमान किया'

'देहाती औरत कह कर नवाज ने पीएम का अपमान किया'

नई दिल्ली।। बीजेपी के पीएम कैंडिडेट और गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को दिल्ली की रैली में पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ पर जमकर निशाना साधा।

मोदी ने कहा कि मुझे एक बात का बड़ा दुख है। मेरे दिल पर चोट लगी है। शनिवार को नवाज शरीफ ने पत्रकारों को बुलाया और कहा कि भारत के पीएम 'देहाती औरत' जैसे हैं। भारत में हम लड़ेंगे। नवाज शरीफ यह आपकी कौन सी औकत है। आप मेरे देश के पीएम को देहाती औरत कहकर संबोधित करते हैं। शरीफ कहते हैं ओबामा के पास मनमोहन सिंह मेरी शिकायत करते हैं। हिंदुस्तान का इससे बड़ा अपमान नहीं हो सकता। मैं उन भारतीय पत्रकारों से पूछना चाहता हूं जो नवाज शरीफ की मिठाई खा रहे थे और वहीं पर वह हमारे पीएम को गालियां दे रहे थे। पत्रकारों को नवाज की मिठाई को ठोकर को मार देनी चाहिए थी। जो भी पत्रकार वहां थे उन्हें जवाब देना चाहिए।

परिवारशाही और लोकशाही के बीच युद्ध

मोदी ने कहा, 'दरअसल नवाज शरीफ को यह हिम्मत इसलिए आई क्योंकि घर पर ही भारतीय पीएम के अध्यादेश को बकवास कह डाला गया। राहुल ने उनकी पगड़ी उछाली है। देश में पीएम का अपमान होगा तो बाहरवाले इज्जत क्यों करेंगे। आज परिवारशाही और लोकशाही के बीच युद्ध छिड़ गया है।

परिवारशाही लोकशाही का गला घोंटने पर उतारू है। लोकशाही को दबोचने के लिए उतारू है। आज देश इस मोड़ पर खड़ा है कि देश संविधान से चलेगा या फिर शहजादे की इच्छा से। शहजादा पीएम की पगड़ी उछाल रहा है। आज पीएम मनमोहन सिंह नवाज से मिलने जा रहे हैं। उनसे भारतीय माओं उम्मीद है कि वह भारत के जवानों के कटे सिर वापस लेकर आएं।'

शासक बनने के सपने नहीं देखता

मोदी ने कहा, 'मैं मन से न कभी शासक था , न शासक हूं और न शासक बनने के सपने देखता हूं। मैं बस सेवक हूं। मैं पहले भी सेवक था, कल भी सेवक रहूंगा।' इस दौरान उन्होंने अपनी कहानी भी सुनाई। उन्होंने कहा, 'अब मैं अपनी बात करना चाहता हूं। भारत के लोकतंत्र की ताकत देखिए, उदारता देखिए कि जो इंसान रेलवे के डिब्बे में चाय बेचकर अपना गुजारा करता था, ऐसे गरीब परिवार के बच्चे को आज आपने यहां बिठा दिया। 2014 में देश को ड्रीम टीम की जरूरत है। यूपीए सरकार के पास कोई विजन नहीं है। इसके कार्यकाल के सारे बजट देख लीजिए, तारीख बदलते हैं, नारे बदलते हैं, लेकिन अंदर का सारा माल वही है।

सरकारों के बोझ से दबी दिल्ली

नरेंद्र मोदी ने केंद्र और शीला सरकार पर जमकर निशाना साधा। मोदी ने कहा कि दिल्ली सरकारों के बोझ के तले दबी हुई है। दिल्ली में कई सरकारें हैं। दिल्ली में मां की सरकार, बेटे की सरकार है, तो नई दिल्ली में भी कई सरकारें हैं। मां की भी सरकार है, बेटे की भी एक सरकार है, गठबंधन की भी सरकार है। दिल्ली की सरकार के पीएम सरदार हैं, लेकिन असरदार नहीं हैं। वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार में सभी दल साथ-साथ थे, लेकिन यूपीए में सभी अपनी-अपनी दिशा में चल रहे हैं। जिससे देश पिछड़ रहा है।

बीजेपी के पास विजय ही विजय

मोदी ने कहा कि दिल्ली एक ऐसा प्रदेश है जहां भारतीय जनता पार्टी के पास विजय ही विजय है। विजय गोयल, विजय मल्होत्रा, विजेंद्र गुप्ता। दिल्ली के इतिहास में इतना बड़ा कार्यक्रम नहीं देखा गया होगा।

वरुण देवता का नमन

मोदी ने दिल्ली में गरजते बादल और बारिश का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि मैं वरुण देवता का आभार प्रकट करता हूं कि उनकी कृपा से ही चमचमाती धूप से राहत मिली है और मौसम ने ऐसा सुंदर रूप लिया है।

शीला पर निशाना

मोदी ने अपने भाषण में शीला सरकार पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत में कोई सबसे सुखी सीएम हैं तो दिल्ली की सीएम हैं। रिबन काटने के सिवा उनके पास कोई काम नहीं है। न सिंचाई, न मछुआरों कि चिंता है। सड़क पर गड्ढे हैं तो नगर निगम को दोष दे दिया और बाकी के लिए केंद्र को दोषी ठहराया दिया। दिल्ली की सीएम दिल्ली में बच्ची से रेप के बाद दुख जताती हैं। शीला कहती हैं कि वह भी मां हैं, लेकिन मां के नाते सलाह देती हैं कि लड़कियों को जल्दी घर लौट आना चाहिए। उनके पास कोई काम नहीं है। दोष ऊपर दे दो या नीचे दे दो, यही उनका कारोबार है।

कॉमनवेल्थ गेम्स से इज्जत लुटी

मोदी ने कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले के लिए दिल्ली और केंद्र सरकार को जमकर कोसा। उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स की वजह से देश की इज्जत लुटी। चीन ने ओलिंपिक खेलों से अपनी ताकत दिखाई, लेकिन हमने मौका गंवा दिया।

सरकार की 'शराबी' जैसी लत

मोदी ने कहा, 'आए दिन सुप्रीम कोर्ट भारत सरकार को करप्शन के मुद्दों पर कठोर से कठोर शब्दों का इस्तेमाल करता है, लेकिन केंद्र को वैसी ही आदत हो गई है कि जैसे किसी शराबी को शराब पीने की लत लग जाती है। वह बंद नहीं होता।' मोदी ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि एक बार एक शराबी सुबह से ही बोतल खोलकर बैठक गया। इत्तेफाक से उस दिन के अखबार में शराब के नुकसान बताए गए थे। बीवी ने जब देखा तो कहा कि इसे पढ़िए। अब बंद कीजिए तो शराबी ने दूसरे दिन क्या किया अखबार ही बंद कर दिया। बीवी ने तो कहा था कि बंद कर दो।

गांधी भक्ति में डूबी सरकार

मोदी ने कहा कि इस सरकार का एक ही मकसद है, गांधी भक्ति करना। गांधी छाप नोटों की भक्ति। इस नई गांधी भक्ति में यूपीए डूबा हुआ है। टनों में नोटों का गोलमाल हो रहा है।

Friday, September 27, 2013

इसके बावजूद "दल्ला" कहने पर आपत्ति???





कोर्ट से सजा पाया हुआ मुजाहिदीन अफज़ल उस्मानी "Alleged" है?? 

लेकिन मुज़फ्फरनगर दंगों के स्टिंग में पकडाए आज़म खान की नाक मोरी में रगड़ने की बजाय सुरेश राणा के सामने "His Role" in Riots लिखा जाता है...? 

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शायद इसीलिए सिर्फ NDTV को पाकिस्तान में प्रसारण की छूट मिली हुई है... सऊदी अरब और काँग्रेस से जो पैसा मिलता है वह अलग से है ही...

इसके बावजूद "दल्ला" कहने पर आपत्ति???

"रामलीला"

"रामलीला" - गोलियों की रासलीला फिल्म के भडकाऊ और अश्लील पोस्टरों पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने इसके सभी पोस्टरों को हटाने के आदेश दिए हैं... 

साथ ही फिल्म के निर्माता संजय लीला भंसाली, रणवीर सिंह और दीपिका को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि "रामलीला" शब्द हिन्दू संस्कृति में पवित्र माना जाता है तथा यह शब्द भगवान राम के जीवन चरित्र से जुड़ा हुआ है. फिल्म का नाम, इसके पोस्टर और प्रचार सामग्री आपत्तिजनक है. कोर्ट ने भंसाली से पूछा है कि क्यों ना आपके खिलाफ कार्रवाई की जाए... 

जिस भी वकील बंधु ने यह याचिका लगाई है, वह बधाईयों का पात्र है. विहिप अथवा भाजपा द्वारा वकीलों का एक संगठन खड़ा होना चाहिए जो हिन्दू भगवानों की जानबूझकर खिल्ली उड़ाने एवं अपमान करने वाले ऐसे "छिछोरों" के खिलाफ पूरे देश में ढेर सारी याचिकाएं लगाई जानी चाहिए, ताकि ये लोग जमानत और कोर्ट के चक्कर में पूरे भारत में चकरघिन्नी होते रहें... ...

नरेंद्र मोदी, केशुभाई. सुरेश मेहता, शंकर सिंह वाघेला एक साथ बैठे हुए ... आडवानी को सुन रहे है ...



नरेंद्र मोदी, केशुभाई. सुरेश मेहता, शंकर सिंह वाघेला एक साथ बैठे हुए ... आडवानी को सुन रहे है ...

Wednesday, September 25, 2013

मिशन इस्लाम

हिन्दुओं एक हो-जातिवाद तोडों

पुस्तक मेले में मिशन इस्लाम वाले मिले थे।
कुछ प्रश्न पूछे झुंझला उठे।
एक दो प्रश्न को यहाँ पर लिख रहा हूँ।
१. अगर एक नमाज़ पढ़ते हुए शिया को आत्मघाती हमले में एक सुन्नी बम्ब से मार डाले तो दोनों में से जन्नत कौन जायेगा और दोज़ख में किसे प्रवेश मिलेगा?
२. अल्लाह का एक नाम रहीम हैं अर्थात रहम करने वाला। यह बताओ की अल्लाह को क्यूँ रहम नहीं आता की जो ईद के दिन अपनी खुशामद के लिए लाखों निरपराध प्राणियों की गर्दन पर तलवार चलवा देता हैं?
३. अगर कुरान के अनुसार अल्लाह ने सभी जानवरों को भोजन के लिए बनाया हैं तो फिर क्यूँ गर्दन काटते समय सभी जानवर चिल्लाते हैं, रोते हैं और उन्हें दर्द होता हैं, क्यूँ अपनी प्राण रक्षा करने के लिए प्रयास करते हैं। अल्लाह की बनाई हुई सृष्टी में कोई दोष नहीं हैं फिर यह दोष क्यूँ?
४. विकासवाद को अधर बनाकर मुस्लिम लोग कहते हैं की वेद पुराने समय के लिए थे आज के लिए कुरान हैं। चलो एक बार विकासवाद को भी मान लेते हैं फिर यह बताओ की कुरान के आने के बाद मनुष्य का विकास क्यूँ रुक गया जो आप उसे last एंड final किस आधार पर मानते हैं?
५. माँस खाने के पीछे कुतर्क देते हैं की अगर जानवरों को नहीं खायेगे तो वे इतने बढ़ जायेगे की धरती पर स्थान नहीं बचेगा। कल को मनुष्य की जनसँख्या का भी यही समाधान आप लोगो ने ढूंढा हैं क्या?
६. ओसामा बिन लादेन की लाश को मरने के बाद समुद्र में फैक दिया गया और उसकी लाश को मछलियाँ खा गई। अब यह बताओ कयामत के दिन किस कब्र से उसकी रूह हिसाब किताब देने के लिए निकलेगी? मतलब ओसामा बिन लादेन को न जन्नत मिली न दोज़ख।
७. अगर एक १ वर्ष का बच्चा अकाल मृत्यु से मर जाये तो जन्नत में जाकर वह जवान ७२ हूरों की क्या गोदी में खेलेगा? अगर हाँ तो उन हूरों की प्यास कौन बुझायेगा?
८. इस्लाम को मानने वालो के अनुसार मुहम्मद साहिब बड़े बड़े चमत्कार दिखाते थे जैसे चाँद के दो टुकड़े करना इत्यादि। जब मुहम्मद साहब के नवजात लड़के की अकाल मृत्यु हो गई तब वह क्यूँ फुट-फुट कर रोये, अपने बच्चे को चमत्कार से वापिस जिन्दा क्यूँ नहीं कर दिया?
९. मुहम्मद साहिब ने ३२ निकाह स्वयं किये और अनेक गुलाम बंदियाँ को पनाह दी मगर उन्होंने एक पाक मुस्लमान के लिए ४ ही निकाह क्यूँ बताये, उससे अधिक ३२ विश्व में केवल निकाह क्यूँ नहीं बताये?
१०. गुलाम बनाने की कुप्रथा विश्व में केवल और केवल इस्लाम मत की धर्म पुस्तक और इतिहास में मिलती हैं। मानवाधिकार के तराजू में इस कुप्रथा को किस आधार पर सही ठहराया जा सकता हैं?

Monday, September 23, 2013

पाकिस्तान से लेकर केन्या तक गैर मुस्लिमों पर हमला, हर जगह पसरा मातम

पाकिस्तान से लेकर केन्या तक गैर मुस्लिमों पर हमला, हर जगह पसरा मातम


केन्या की राजधानी नैरोबी और पाकिस्तान के पेशावर में गैरमुस्लिमों को निशाना बनाया गया। नैरोबी के वेस्टगेट मॉल में आतंकी संगठन अल-शबाब ने हमला करने से पहले मुस्लिमों को जाने को कहा और बाकी बचे गैरमुस्लिमों पर गोलियों की बौछार कर दी। ऐसा ही कुछ मामला रविवार को पाकिस्तान के पेशावर में हुआ। एक ऐतिहासिक चर्च को निशाना बनाकर किए गए दो आत्मघाती हमले 81 लोगों की मौत हो गई, जबकि घायलों की संख्या 145 पहुंच गई है। यह पाकिस्तानी ईसाई समुदाय अब तक सबसे भीषण हमला था। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के जनदुल्लाह ग्रुप ने हमले की जिम्मेदारी ली है।
 
पुलिस कमिश्नर साहिबजादा मुहम्मद अनीस ने बताया कि रविवार को कोहाटी गेट इलाके में ऑल सेंट्स चर्च में प्रार्थना के बाद लोग बाहर निकल रहे थे। तभी दो हमलावर 30 सेकंड के अंतराल में उनके पास पहुंचे और खुद को विस्फोट से उड़ा दिया। इससे पहले उन्होंने फायरिंग भी की। घटना के समय वहां लगभग 700 लोग मौजूद थे। धमाका इतना जोरदार था कि कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। बम डिस्पोजल स्क्वाड के शफकत मोहम्मद ने बताया कि दोनों  हमलावरों की जैकेट में छह-छह किलो विस्फोटक था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमले के बाद घटनास्थल पर खून ही खून था। कटे-फटे कपड़े और जूते ही पड़े थे।

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गति के तीन नियमों को किसने लिखा है

गति के तीन नियमों को किसने लिखा है ?? � 
जानिए और सबको बताइए : http://phys.org/news106238636.html 
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हम सभी न्यूटन के गति के नियमों से परिचित हैं | उन्होंने 5 जुलाई 1687 को अपने कार्य “फिलोसोफी नेचुरेलिस प्रिन्सिपिया मेथेमेटिका” में इन नियमों को प्रकाशित किया |

लेकिन .........................

न्यूटन के, गति के नियमों की खोज से पहले भारतीय वैज्ञानिक और दार्शनिक महर्षि कणाद ने (600 ईसा पूर्व में) “वैशेशिका सूत्र” दिया था जो शक्ति और गति के बीच संबंध का वर्णन करता है |
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Albert Einstein - "We owe a lot to the Indians, who taught us how to count, without which no worthwhile scientific discovery could have been made


Sunday, September 22, 2013

क्या केन्या में भी बीजेपी, विहिप, आरएसएस या नरेन्द्र मोदी-अमित शाह है ?

क्या केन्या में भी बीजेपी, विहिप, आरएसएस या नरेन्द्र मोदी-अमित शाह है ???
केन्या की राजधानी नैरोबी के
शॉपिंग मॉल में आतंकियों ने शनिवार को 39 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। हमले में दर्जनों लोग घायल हुए हैं, जिनमें एक भारतीय शामिल है। हमले के दौरान
आतंकियों ने चुन-चुन कर गैर
मुस्लिमों को अपना निशाना बनाया। 

आतंकियों ने गैर मुस्लिमों को चुन-चुन कर मारा

Updated on: Sun, 22 Sep 2013 06:27 AM (IST)
Kenya mall attack
आतंकियों ने गैर मुस्लिमों को चुन-चुन कर मारा
नैरोबी। केन्या की राजधानी नैरोबी के शॉपिंग मॉल में आतंकियों ने शनिवार को 39 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। हमले में दर्जनों लोग घायल हुए हैं, जिनमें एक भारतीय शामिल है। हमले के दौरान आतंकियों ने चुन-चुन कर गैर मुस्लिमों को अपना निशाना बनाया। सेना द्वारा मॉल की घेराबंदी के कई घंटे बाद भी रुक-रुक कर गोलीबारी जारी थी। केन्याई राष्ट्रपति की ओर से बताया गया कि एक आतंकी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन सरकार ने सोमालियाई आतंकी संगठन अल शबाब पर शक जताया है। अल शबाब ने हमले की जिम्मेदारी तो नहीं ली, लेकिन केन्याई सरकार को लगातार सोमालिया से सैनिक वापस न लेने पर गंभीर परिणामों की लगातार चेतावनी दी जा रही थी।
पुलिस के मुताबिक हमले के वक्त एक हजार लोग मॉल में मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक आतंकियों ने सात लोगों को बंधक बना रखा है और उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आतंकियों ने मॉल में घुसते ही मुस्लिमों को निकल जाने को कहा। एक प्रत्यक्षदर्शी का कहना था कि आतंकी लगातार गैर मुस्लिमों को निशाना बनाने की बात कह रहे थे। हमले के वक्त मॉल में कई भारतीय भी मौजूद थे। मॉल में मौजूद जय पटेल ने कहा कि आतंकी लाइन लगाकर बाहर निकल रहे लोगों से बातें करते और कुछ को गोली मारते जा रहे थे। हमले में घायल भारतीय मूल के सतपाल सिंह ने बताया कि गोली चलाना वाला सोमाली लग रहा था और एके-47 लिए था। अपनी जान बचाने के लिए दो घंटे तक गैराज में छिपे रहे मनीष तुरोहित ने कहा कि आतंकियों की जैकेट से ग्रेनेड साफ दिखाई दे रहे थे। केन्या में बड़ी संख्या में भारतीयों की तादाद को देखते हुए भारतीय दूतावास लगातार स्थिति पर नजर रखे है। दूतावास के अनुसार पूरा स्टाफ सुरक्षित है। केन्या सरकार और भारतीय समुदाय के नेताओं से संपर्क किया जा रहा है।
विदेशी समुदाय में खासे लोकप्रिय इस शॉपिंग मॉल पर आतंकी संगठन ने हमले की धमकी दी थी। इस मॉल में दुनिया भर में मशहूर ब्रांडों के अलावा कई यहूदियों की दुकानें भी हैं। हमले में चार यहूदी बच गए हैं जबकि एक अन्य घायल हुआ है। पुलिस प्रमुख बेनसन किबू ने कहा कि हमलावरों की संख्या 10 से ज्यादा है और उन्हें अंदर ही घेर लिया गया है। पुलिस ने इलाके में हेलीकॉप्टर तैनात कर दिए हैं। स्थानीय टीवी चैनलों के मुताबिक कुछ लोगों को बंधक बना रखा है। हालांकि, सरकार या पुलिस ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है। यह हमला 1998 में नैरोबी स्थित अमेरिकी दूतावास पर धमाकों के बाद दूसरा सबसे बड़ा आतंकी हमला है। अमेरिकी दूतावास पर हमले में 200 से अधिक लोग मारे गए थे।

Saturday, September 21, 2013

प्रमोद कृष्णन

एक कांग्रेस का छात्रनेता था, वह एनएसयुआई का सक्रिय कार्यकर्ता और पदाधिकारी रहा, उसने बहुत कोशिस की कि उसे कांग्रेस का टिकट मिल जाय किसी बङे चुनाव मे, पर असफल रहा !
उसने फिर दिमाग लगाया, अपने बाल और दाढी को बढा लिया, नाम के आगे आचार्य जोङ लिया और बाबा बन गया. सारे बाबा धार्मिक होते हैं ,ये दुनिया का प्रथम धर्मनिरपेक्ष बाबा है.
यह धर्म की चर्चा के लिये हर चैनल पर आकर लोगो को अपने घटिया उपदेशों को सुनाता है और कांग्रेसी एजेंडे को बढाता है.
इसका नाम आचार्य प्रमोद कृष्णन हैं, लोग इसे कांग्रेसी के बजाय बाबा ही समझते हैं !


Tuesday, September 17, 2013

जार्ज फर्नांडिस

कहा की बीजेपी अपने लौहपुरुष को जंग लगने के लिए छोडकर सरदार पटेल के लिए लोहा मांगने चली है ... मुझे ताजुब इस बात पर हुआ की उस प्रेस कांफ्रेंस में सैकड़ो पत्रकार ने लेकिन किसी ने नितीश बाबू से ये नही पूछा की आडवानी जी तो आज भी बीजेपी के मंच पर नजर आते है ... लेकिन आपने अपने लौहपुरुष जार्ज फर्नाडिस का क्या हाल किया ??? मित्रो, इस नितीश कुमार ने जार्ज फर्नांडिस को टिकट ही नही दिया और जब वो नितीश कुमार से मिलने के लिए लगातार तीन दिनों तक पटना में रहे तो ये उनसे मिला ही नही .. और तब जार्ज फर्नाडिस ने मीडिया के कैमरों के सामने ही किसी बच्चे की तरह फुट फुटकर रोने लगे ... उन्हें दुःख इस बात का था की नितीश कुमार और शरद यादव दोनों ने जार्ज फर्नांडिस की उंगली पकडकर राजनीती का ककहरा सीखा था .. बाद में दोनों ने जार्ज साहब को उठाकर फेक दिया | जार्ज साहब आज भी दिल्ली में अपने घर में कई बीमारियों से झुझते हुए रहते है लेकिन पिछले पांच सालो से नितीश कुमार उनको देखने एक बार भी नही गये | इतना ही नही इसी नितीश कुमार ने बिहार के बड़े नेता और पूर्व विदेश मंत्री दिग्विजय सिंह को भी पार्टी में एकदम हासिये पर धकेल दिया और उनका टिकट काट दिया .. जिसमे दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया .... अब अंत में नितीश जी ने लिए भोजपुरी का एक प्रसिद्ध कहावत "सूप हसे तो हसे .. चलनियो हसे जेमे बहत्तर छेद" 

1984 का सिख विरोधी दंगा

देश का राष्ट्रपति , उपराष्ट्रप्ति , प्रधानमन्त्री , गृह मंत्री , देश के मुख्य न्यायधीश दिल्ली में , देश के बड़े बड़े एडिटर दिल्ली में ,दिल्ली पुलिस के साथ अर्धसैनिक बल और सेना भी दिल्ली में फिर भी इसके बावजूद 1984 का सिख विरोधी दंगा पुरे तीन दिन चला और 3000 लोग मारे गए , क्या यह बिना सरकार के सम्भव है ? किसी पुलिस अफसर , किसी विधायक , किसी सांसद , किसी मंत्री को सजा हुई ? फिर सजा देनी तो एक तरफ दंगे के सबसे बड़े दोषी राजीव गांधी को तो दंगा पचाने के लिए भारत रत्न ही दे दिया गया | राजीव गांधी को भारत रत्न पाने के लिए सिख विरोधी दंगे के अलावा मेरठ दंगा (1987) , भागलपुर दंगा (1989) , अहमदाबाद दंगा ( 1985) , अहमदाबाद दंगा (1986) भी पचाने पड़े हैं | इन सब दंगों के बावजूद कौन राजीव गाँधी , गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी को सेकुलर नहीं मानता ? इन दंगों में किसी बड़े राजनेता , पुलिस अधिकारी को सजा हुई हो तो बताओ ? कभी किसी मुस्लिम संगठन , मानाधिकार वालों को इन दंगों के पीड़ितों के लिए न्याय मांगते सुना ?

यूपी में मुस्लिम वोट के लिए कांग्रेस और सपा में गला काट संघर्ष चल रहा है , आज सोनिया , राहुल और मनमोहन सिंह दंगा पीड़ितों से मिलने गए , मिडिया कैसे विजूअल दिखा रहा है , दंगा पीड़ितों के नाम पर सिर्फ मुसलमान दिखाए जा रहे हैं , एक चैनल तो प्रधानमंत्री के हाथ पर अपना सर टेक कर एक मुसलमान को रोता हुआ दिखा रहा है , क्या दंगों में हिन्दू पीड़ित नहीं होता ? अभी तक मिडिया ने दंगे से पीड़ित किसी हिन्दू शरणार्थी शिविर का विजूअल दिखाया ?

मुसलमान वोट को अपने पक्ष में करने के लिए कांग्रेस और सपा अभी और भी दंगे कराएंगे , सपा के राज में पिछले एक साल में तीन दर्जन से ज्यादा दंगे हो चुके हैं और कांग्रेस को तो दंगे पचाने में महारत हासिल है | वैसे भी सेकुलर नेता और सेकुलर दल कब से दंगों के लिए दोषी होने लगे , एक साम्प्रदायिक गर्दन तो हमेशा से सेकुलरों के पास है , जिस मर्जी दंगे का दोष उस पर मढा जा सकता है |

Saturday, September 14, 2013

फेसबुक पर अफवाहें फैलाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। : मनीष तिवारी

फेसबुक पर अफवाहें फैलाने वालों पर कार्रवाई
की जाएगी। : मनीष तिवारी
तो सबसे पहले मनमोहन सिंह पर कार्रवाई
होनी चाहिए, क्योंकि भारत सरकार निम्नलिखित
अफवाहें फैला रही हैं

१• भारत मे गरीबी कम हुई हैं।
२• भारत विश्व की दूसरी आर्थिक महासत्ता हैं।
३• काँग्रेस ने पीछले ६६' सालो मे देश का विकास
किया है और "भारत निर्माण" हो रहा है।
४• कोयला घोटालों में मेरा कोई हाथ नहीं है।
५• कोयला घोटाला हुआ ही नहीं हैं। (कपिल भुक्कल)
६• काँग्रेस एक देशभक्त पार्टी हैं।
७• राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के लिए आदर्श
उम्मीदवार हैं।
८• मै चोर नहीं हु ।
९• राबर्ट वाडरा एक किसान हैं।
१०• सोनिया गांधी ने अपने निजी पैसो से अपना इलाज
करा रही हैं।
११• हिंदु भगवा आतंकवादी होता हैं ।
१२• नितिश कुमार सेक्युलर हैं।
१३• अखिलेश यादव एक अच्छा मुख्यमंत्री हैं ।
१४• २०१३ मे, मै रोमिंग फ्री करवा दुंगा (कपिल
भुक्कल)
१५• नवाज शरिफ एक शांतिदूत हैं। (बैसाखी चोर)
१६• पाकिस्तान से तथा बाकी पडौसी मुल्को से हमारे
रिश्ते मधुर हैं। (मनमोहन सिंह)
१७• भारत एक लोकतांत्रिक देश हैं ।
(गलत एवं झुठे विधान भी अफवाह नहीं तो और क्या है ?)
लिस्ट बहुत लंबी है, यही रुकता हूं।

आम आदमी पार्टी देती है अपने कार्यकर्ताओं को सैलरी



आम आदमी पार्टी का सच

आम आदमी पार्टी देती है अपने कार्यकर्ताओं को सैलरी, 

आम आदमी पार्टी के लिए काम करने वालों को मिलता है मोटा माल....हो रहा ऐडवांस पेमेंट

आम आदमी पार्टी चंदे मे मिले पैसे का कर रही गलत इस्तेमाल और गलत रिपोर्ट लोगों के सामने पेश कर रही है। जिस ईमेल कैम्पेन मे महज डाटा का पैसा लगता है वो भी एक बार मे डाटा खरीदा जा सकता है वहाँ आम आदमी पार्टी इसपर 13.62 लाख का खर्चा दिखा रही है।

वैबसाइट का एक महीने के मेंटेनेंस का खर्चा आम आदमी पार्टी 1.52 लाख बता रही है इतना तो 10,000 पेज के वैबसाइट के मेंटेनेंस पर भी खर्चा नहीं होता है।

मतलब साफ है की केजरीवाल झूठा खर्चा दिखा कर सारे पैसे अपने जेब मे भर रहा है।

और अब इस पोस्ट पर आम आदमी पार्टी के गुंडे आ कर बवाल मचाएंगे क्यूंकी इसके लिए सैलरी के रूप मे 3.43 लाख रुपये दिये गए हैं वहीं वॉलंटीयर्स को 4.59 लाख रुपये और स्टाफ को 2 लाख रुपये ऐडवांस दिये गए हैं।

अब पैसे खा कर पार्टी का प्रचार करने वाले तो उधम मचाएंगे ही।




स्वामी नित्यानंद को हाईकोर्ट ने बाइज्जत बरी

मित्रो स्वामी नित्यानंद को हाईकोर्ट ने बाइज्जत बरी करके दलाल मीडीया के मुँह पर जोरकी लात मारी है,
उनके खिलाफ सारी सीडी और वीडियो को फर्जी पाया गया है..
और अहम बात ये है कि उन्होने उनकी फर्जी सीडी जारी करने वाले "स्टार विजय" चैनल को दो माह तक प्रतिदिन दो घंटे माफीनामा प्रसारित करके माँफी माँगने को कहा.....

लेकिन ये बात आपको बिकाऊ मीडिया मे नहीं दिखाई जा रही
इसी लिए बोलते है सत्य परेशान हो सकता है पराजित नही...

गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च किये जाने वाले व्यक्ति अब नरेन्द्र मोदी हैं

Narendra Modi most searched person on Google 

Narendra Modi
File Photo

 
Gujarat Chief Minister Narendra Modi, Who is elevated to BJP PM Candidate for Lok Sabha elections, has broken record of most searched person on Google.

Modi, who has emerged as most popular political icon in India, entered the record book after his name received maximum number of search on Google in a day.

Around 1000077332 (Over one billion) people searched the keyword Narendra Modi on search engine giant Google.

Earlier, this record was named after US President Barack Obama. During the US presidential elections, Barack Obama received 9877532 number of search in a single day.

On Friday, BJP top brass named Modi as its Prime Ministerial Candidate, ignoring veteran LK Advani’s opposition.

मुजफ्फर नगर के हमलो में ऐसा बहुत कुछ है जो छिपा लिया गया

मुजफ्फर नगर के हमलो में ऐसा बहुत कुछ है जो छिपा लिया गया , दबा दिया गया , शासन वर्ग विशेष के हमले के सबूतों और साजिश को छिपाने में मिटाने में जी-जान से लगा हुआ है .
मेंन स्ट्रीम मिडिया के लोग विदेशी मालिको से तनख्वाह और पेट्रो डालर की लालच में ''भारतीय दर्शन'' [हिन्दू सभ्यता] से खार खाए है , और सरकार की हाँ में हाँ मिलाने का मतलब है , मोटा माल और अन्य प्रकार से अनुग्रहित कर सकने का सामर्थ्य रखने वाली दुधारू गाय ,
अब जब हिन्दू विरोध में हर तरह से लाभ है , यानि दसो उंगलिया घी में और सर कढ़ाई में , तो कौन कमबख्त सच और न्याय उसूल के पंगे में पड़े !
इनके लिए तो पैसा और खरीदे जा सकने वाले सुख ही चरम सुख है
लेकिन छोटे शहरो के मध्यवर्गी लोग और सिधांत प्रिय व्यक्तियों ,पत्रकारों की वजह से सच रिस-रिस कर बाहर आ रहा है
लेकिन ये सच अलग-अलग टुकड़े में है और झूठ के शोर में दब जाता है
अब जैसे एक अत्यंत भयंकर सच भाकियू के नरेश टिकैत ने बताया-------
हिन्दुओ की पंचायत स्थल में एक कार में RDX प्लांट किया गया था जिसको देख लिया गया और डिफ्यूज कर दिया गया नहीं तो क्षती अत्यंत भयावह होती , बाद में पुलिस-प्रशासन ने इस घटना को दबा लिया .
अब ये अत्यंत खतरनाक विस्फोटक है कोई चना-चिप्स तो नहीं था जिसकी बरामदगी को दबा दिया ,स्वचालित हथियार मिले , हैड ग्रेनेड मिले मस्जिदों से सेना पर मोर्चा तक खोला गया , इसकी तो सघन जाँच -पड़ताल होनी चाहिए की ये आया कंहा से ! साजिश का पर्दाफाश होना चाहिए
नहीं तो बहुसंख्यको में ये भावना मजबूत होगी की ये वर्ग विशेष मुस्लिम ही आतंकवादी होता है


Sunday, September 8, 2013

डॉ नरेंदर दाभोलकर और अन्धविश्वास

डॉ नरेंदर दाभोलकर और अन्धविश्वास

स्वर्गीय डॉ नरेंदर दाभोलकर जी की हत्या किया जाना निश्चित रूप से कायरता का प्रतिक हैं और हम इसकी खुले रूप से भ्रत्सना करते हैं। श्री दाभोलकर अन्धविश्वास उनर्मिलन के लिए राज्य सरकार द्वारा कानून बनवाने के लिए पिछले १५ वर्षों से प्रयासरत थे। आप एक ऐसा कानून बनवाना चाहते थे जिससे जादू-टोना, भस्म-भभूत, चमत्कारी शक्तियाँ, अवतारवाद के नाम पर धोखा, उपरी छाया, अघोरी द्वारा तंत्र मंत्र करना, पुत्र प्राप्ति के लिए अनुष्ठान, अभिमंत्रित नगीने, पत्थर आदि, भुत प्रेतादि का मनुष्य के शरीर में प्रवेश, पशुबलि, नरबली, जादूगरी, कुत्ता काटे, साँप काटे का ईलाज, नामर्दगी और भांझपन का ईलाज आदि क़ानूनी रूप से न केवल वर्जित हो अपितु दंडनीय भी हो।

ऊपर से देखने में सभ्य समाज आपको बड़ा बुद्धिजीवी और प्रगतिशील मानकर आपकी इस कार्य में प्रशंसा अवश्य करेगा और आपका इस कार्य में साथ अवश्य देना चाहेगा परन्तु सत्य कुछ और भी हैं।
डॉ नरेंदर ने इस कानून के साथ साथ कुछ अन्य कार्यों का भी विरोध किया हैं जैसे होली के पर्व पर आशाराम बापू द्वारा चंद टैंकर पानी को रंग मिला कर इस्तेमाल करना जबकि उस समय महाराष्ट्र में सुखा पड़ा था। जैसे गणपति उत्सव के समय समुद्र में गणेश की मूर्तियों को विसर्जन करने में पर्यावरण को नुकसान होने की बात कहना।
पाठक अभी तक सोच रहे होगे की ऐसे व्यक्ति का तो अवश्य साथ देना चाहिए मगर यहाँ आप और भी कुछ नहीं देख पा रहे हैं।
अन्धविश्वास केवल हिन्दू समाज की मिलकियत नहीं हैं, संसार का ऐसा कोई भी मत नहीं होगा जिसमें अन्धविश्वास किसी न किसी रूप में नहीं मिलता हैं। जैसे

१. ईद के अवसर पर लाखों निरपराध पशुओं को बेवजह मारा जाता हैं जिससे पर्यावरण को अत्यधिक नुक्सान होता हैं। डॉ दाभोलकर चूँकि यह मामला मुस्लिम समाज से सम्बंधित था चुप क्यूँ रहे। क्या यह मामला अन्धविश्वास से सम्बंधित नहीं था?

२. क्या केवल प्रदुषण गणपति उत्सव पर ही होता हैं जोकि वर्ष में एक दिन के लिए बनता हैं जबकि हर रोज लाखों निरीह पशुयों को माँस के लिए बूचड़खानों में नहीं मारा जाता हैं, उनको मारने के लिए कसाई खानों में लाखों लीटर पानी इस्तेमाल होता हैं, उससे होने वाला प्रदुषण क्या प्रदुषण नहीं हैं? या फिर यह भी मुसलमानों से सम्बंधित होने के कारण यह त्याज्य हैं।
३. जितनी भी मुसलमानों की दरगाहे, मजारे, कब्रें आदि हैं ,वहाँ पर यह अन्धविश्वास प्रचलित हैं की मरे हुए मुर्दे
में बिमारियों को ठीक करने की, परीक्षा में अंकों की, बेरोजगारों को नौकरी की, बेऔलादों को औलाद मिलती हैं। फिर डॉ नरेंदर जी ने भारत देशभर में फैली हजारों कब्रों को उखाड़ने के लिए किसी भी कानून को बनाने के लिए क्यूँ प्रयास नहीं किया ? क्या कब्र पूजा अन्धविश्वास नहीं हैं?

४. ईसाई समाज प्रार्थना से चंगाई होना मानता हैं अर्थात किसी भी प्रकार की बीमारी हो आपको डॉक्टर, दवाई आदि की आवश्यकता नहीं हैं। आप चर्च जाये, प्रभु ईसा मसीह की पूजा करे, उनपर विश्वास लाये आप चंगे हो जायेगे। जीवन भर बीमार रहने वाली सिस्टर अलफोंसो, अपने जीवन में पार्किन्सन रोग के कारण व्हील चेयर पर अपने अंतिम वर्ष बिताने वाले पूर्व पोप जॉन पॉल द्वित्य, स्वास्थ्य कारणों के कारण अपने कार्यकाल के पूरा होने से पहले अपना त्यागपत्र देने वाले पूर्व पोप बेनेडिक्ट , जीवन में तीन बार अपनी शल्य चिकित्सा करवाने वाली विश्व विख्यात मदर टेरेसा सभी ईसा मसीह पर विश्वास लाते थे मगर दुआ से ज्यादा दवा पर भरोसा करते थे फिर भी ईसाई समाज प्रार्थना से चंगाई जैसे अन्धविश्वास को प्रोत्साहन दे रहा हैं। डॉ नरेंदर जी ने कभी

ईसाई समाज के इस अन्धविश्वास के विरुद्ध नहीं बोल क्यूँ?
ऐसे अनेक उदहारण हम सभी मतों में से दे सकते हैं।
मगर हमारा उद्देश्य यहाँ पर मतों की निंदा करना नहीं हैं।
अपितु यह सन्देश देना हैं की धर्म और अन्धविश्वास में अंतर समझना बेहद आवश्यक हैं और अन्धविश्वास की तिलांजलि देने के लिए धर्म की तिलांजलि देना आवश्यक नहीं हैं जैसा डॉ नरेंदर जी ने अपने जीवन में किया था।
डॉ नरेंदर जी की अन्धविश्वास विवेचना का समर्थन करने से व्यक्ति नास्तिक बन जाता हैं जो स्वयं एक प्रकार का अन्धविश्वास हैं। आस्तिक व्यक्ति अपने से शक्तिशाली ईश्वर की सत्ता को मानने के कारण पाप कर्म को जान बुझ कर नहीं करता और अगर करता भी हैं अज्ञानता के कारण जबकि नास्तिक व्यक्ति के लिए केवल भोगवाद ही जीवन का उद्देश्य रह जाता हैं इसलिए भोगवाद के गर्त में पड़कर वह एक से बढ़कर एक पाप कर्म करता हैं।
धर्म और अन्धविश्वास में अंतर को समझना आवश्यक है। जब मनुष्य ईश्वर के अनुसार अपने कार्यों को करता हैं तब वह धर्म का पालन कर रहा होता हैं और जब मनुष्य अपने अनुसार ईश्वर के कार्यों का निर्धारण करने लगता हैं तब वह धर्म के स्थान पर अन्धविश्वास का पालन करने लगता हैं।

जिन जिन अंधविश्वासों का ऊपर वर्णन किया गया हैं या तो वे मनुष्य की अल्पबुद्धि की देन हैं अथवा ईश्वर की आज्ञा का गलत अनुसरण हैं।
जैसे वेदों में पशुओं के साथ भी मित्रों के समान व्यवहार करने का सन्देश हैं फिर यह कैसे ही सकता हैं की वेदों में यज्ञ में पशुबलि का विधान हो।
जैसे कुरान में अल्लाह को रहीम अर्थात दयालु बताया गया हैं फिर यह कैसे हो सकता हैं की वही अल्लाह अपनी इच्छा के लिए ईद के अवसर पर लाखों पशुओं की मृत्यु का कारण बने।

यह सब गड़बड़ ईश्वर द्वारा नहीं अपितु मनुष्य द्वारा की गई हैं।

इसका समाधान भी वही हैं जो महात्मा ज्योतिबा फुले और महागोविन्द राणाडे के मार्गदर्शक, डॉ अम्बेडकर से आधी सदी पहले अन्धविश्वास और जातिवाद के विरुद्ध उद्घोष करने वाले स्वामी दयानंद सरस्वती ने किया था।

स्वामी दयानंद ने न केवल पाखंड के, अन्धविश्वास के विरूद्ध उद्घोष किया अपितु वेदों में वर्णित सच्चे परमेश्वर की परिभाषा को समाज के कल्याण के लिए पुन: स्थापित कर समाज को सच्चा आस्तिक भी बनाया था। उनका उद्देश्य मत-मतान्तर के भेद भाव को मिटाकर धर्म की पुन: स्थापना था।

धर्म की परिभाषा उन्होंने धार्मिक कृत्य न बताकर धैर्य, क्षमा, मन को प्राकृतिक प्रलोभनों में फँसने से रोकना, चोरी त्याग, शौच, इन्द्रिय निग्रह, बुद्धि अथवा ज्ञान, विद्या, सत्य और अक्रोध धर्म के दस लक्षण के रूप में बताया था।

मनुष्य के आचरण को सर्वोपरि बताते हुए उन्होंने कहा की जो पक्षपात रहित न्याय सत्य का ग्रहण, असत्य का सर्वथा परित्याग रूप आचार हैं उसी का नाम धर्म और उससे विपरीत का अधर्म हैं। धर्म की इस परिभाषा को संसार का कोई भी तथष्ट व्यक्ति अस्वीकार नहीं कर सकता फिर हमें अन्धविश्वास के परित्याग के लिए नास्तिक बनने की क्या आवश्यकता हैं।

*एलियन का रहस्य*

*एलियन का रहस्य*
जिस तरह पुरी के शंकराचार्य भारतीकृष्णतीर्थ जी ने ध्यान ओर समाधि की अवस्था मे वैदिक गणित के 16 सूत्र के दर्शन किए ओर उन पर वैदिक गणित नामक एक पुस्तक की रचना की ठीक इसी तरह एक योगी श्री जितेन्द्र लं. खडके ने "परगृहवासियांचे अस्तित्व"नामक ग्रंथ की रचना की है।लेखक ने ध्यान समाधि द्वारा एलियन के लगभग 350 रहस्य अपनी इस पुस्तक मे किए है।
पंतजली कृत योगदर्शन मे आया है
"भुवन ज्ञानं सूर्य संयमात्॥3:26॥
सूर्य का संयम करने पर 14 भुवनो का ज्ञान हो जाता है।
"मूर्ध्य ज्योतिषी सिध्द दर्शनाम्॥3:28॥
ब्रह्मरंध्र मे संयम करने पर लोक परलोक,ओर पृथ्वी के बीच मे विचरण करने वाले सिध्दो(एलियन्स)के दर्शन ओर उनके बारे मे ज्ञान प्राप्त होता है।
लेखक का दावा है कि इस पुस्तक मे एलियन के बारे मे जो जानकारी है वह किसी भी वैज्ञानिक ओर नासा के पास भी नही है।
पुस्तक के कुछ अंश एलियन्स के बारे मे-
1) इस पृथ्वी पर जिस तरह लोग रहते है ठीक उसी तरह अन्य गृह पर सजीव रहते है।
2)जरा सोचिए अगर कोई एलियन हमारी पृथ्वी पर किसी सुनसान जगह पर उतरा जहा कोई सजीव उसे दिखाई न दे तो वह यही सोचेगा कि पृथ्वी पर कोई जीवन नही है ठीक उसी प्रकार हम दूसरे गृह के बारे मे सोचते है।
3)हम पृथ्वी पर आक्सीजन के सहारे रहते है।मछलिया जल मे घुली हुई आक्सीजन के सहारे रहती है,अग्नि तत्वो मे भी सूक्ष्म जीव पाए जाते है उसी तरह एलियन भी मंगल,सूर्य,शनि इत्यादि गृहो पर उपस्थित तत्वो के सहारे जीते है।
4)एलियन के पास जैली जैसी एक चीज है जिसमे अनोखा जानलेवा जन्तु है।
5)बर्म्युडा ट्रेंगल के चारो ओर 2 kM चोडा ओर 2 km गहराई मे एलियन्स का नियंत्रण है।
6)एलिसनो को हमारी तरह भ्रमण ध्वनी यंत्रो की जरूरत नही होती है बल्की वे इक दूसरे से सीधा संपर्क कर सकते है।
7)मंगल गृह पर 100 फीट की गहराई मे जल का स्रोत है।
8)कुछ एलियन तो उनके गृहो पर बैठे बैठे हमारे गृह की जानकारी प्राप्त कर सकते है।
9)एलियनो के पास एक ऐसा यन्त्र है जिससे वह हमारे गृह के सजीवो के लगा देते है ओर उनके बारे मे जानकारी प्राप्त करते है।
10)एलियन की उडन तस्तरियो की रफ्तार 1/2 कि.मी./सै. है।
11)एलियनो की उडनतस्तरियो मे गुरूत्वाकर्षण शक्ति का प्रयोग होता है ओर वे 50 फीट ऊपर से कोई भई वस्तु अपनी तरफ खीच सकते है।
12)एलियन की कई तस्तरिया चालक विहीन है।
13)सूर्य मलिको के अगले हिस्सो मे एलियन का एक संसार है जिनकी लंबाई मात्र 3 फीट है।
14)जिस तरह पृथ्वी पर उल्कावर्षण होता है ठीक उसी तरह मंगलगृह पर काले पत्थरो का वर्षण होता है।
15)कुछ गृह के एलियन का शरीर रबर की तरह लचीला होता है।
16)कुछ गृह पर डायनासोर से भी विशाल एलियन है।
17)कुछ एलियन हवा मे उपस्थित अणु ओर रेणु को एकत्रित कर उनसे कम्प्युटर जैसी स्क्रीन बना लेते है जिससे वह आपस मे संपर्क करते है ।
18)मंगल गृह पर 7 से 9किमी. गोल गोल घेरो वाली बडी बडी सरोवरे है जो दबी हुई है।
19)मंगल गृह पर अलग अलग जगह अलग अलग मृदा पायी जाती है,कई ताम्र रंग की कई चमकीली कई भुरहरी मृदा पायी जाती है।
20)सूर्य से 1000 सोर वर्ष दूर सूर्य से 25 गुना बडा एक तारा है जिसके प्रत्येक गृह पर एलियन है।
21)अधिकतर एलियन अपने अपने गृहो पर नरम स्थानो पर रहते है।
22)मंगल गृह पर 70 से 75 फीट नीचे धाव पट्टिया है।
23)शनि गृह पर 62000 मील भीतर वलय पर वातावरण का बार बार बदलाव होता है।
24)2050 ओर 2060 मे एलियन पृथ्वी पर हमला करेगे ओर भविष्य मे सागर के बीच मे से बडा उद्रेक होगा।
लेखक के द्वारा मंगल चन्द्र पर जल की उपस्थिती की भविष्यवाणी नासा ओर चंद्रयान के खोजने से पूर्व कर दी गई थी।लेखक से हमने फोन पर भी बात की है,लेखप ने बताया कि मुद्रा ओर अन्य कुछ कारणो से पुस्तक को प्रकाशित नही किया गया है।लेखक इस पुस्तक को मराठी के अलावा हिन्दी ,अंग्रेजी,कन्नड,बंगाली,7 अन्य भाषाओ मे भई लिखेगे।लेखक ने हमसे वादा किया है जल्द ही इसका हिन्दी मे रूपान्तरण किया जाएगा ओर पहली पुस्तक हमे दी जाएगी।
इस विडियो को भी देखे:-
http://m.youtube.com/watch?v=P2KxrX07AmI&guid&gl=US&hl=en&client=mv-google
वास्तव मे भारत की ध्यान योग मे बहुत प्रबल शक्ति है।
इसी ध्यान शक्ति के आधार पर ऋषियो ने प्राचीनकाल मे कई आविष्कार ओर कई एसे सिध्दान्त प्रतिपादित किए है जिनहै आज के वैज्ञानिक भी नही खोज पाए है।
हमे अपनी संस्कृति के ओर लोटना पढेगा तभी हम फिर से विश्व गुरू बन पाएगे।
जय हिन्द।
वन्दे मातरम्॥

हिन्दू से इसाई

विदेशो से हर साल हजारो करोड़ रुपये भारत में सिर्फ इसलिए आते हैं ताकि भोले भाले मासूम लोगो को हिन्दू से इसाई बनाया जा सके। उनके दिमाग से खेल जा सके और उनकी हिन्दू आस्था को तोडा जा सके! केवल झूठे चमत्कार दिखा के उनको क्रिस्चियन बनाया जा सके!

अगर आप सुबह जल्दी उठ कर टीवी देखे तो वहाँ सुबह सुबह दर्जनों टीवी चैनल क्रिस्चियन मिशनरी की चमत्कारों से भरपूर सभा दिखाते मिलेंगे, जो की किसी गाँव के चर्च से चलाये जाते हैं। वहाँ उनको "मूर्तिपूजक" हिन्दुओं की एक से एक बड़ी बीमारी केवल येशु का नाम ले कर ठीक करते दिखाया जायेगा! बहुत से भोले भले लोग इस ड्रामे पर भरोसा कर लेते हैं और धर्म परिवर्तन को राज़ी हो जाते हैं!

ज़ाहिर सी बात है सब ड्रामा है और धर्म परिवर्तन कराने के लिए क्रिस्चियन मिशनरी हर पैंतरा आजमाती है! क्योंकि सोनिया भी तो कैथोलिक हैं तो फिर इनमे से एक मिशनरी को इन्हें भी क्राइस्ट का नाम ले कर ठीक कर देना चाहिए वह बेकार में बाहर जा कर हमारा करोडो अरबो रुपया अपने इलाज में बहा रही हैं!

अमेरिकी नागरिक है नए आरबीआई गवर्नर रघुराम गोविंद राजन

अमेरिकी नागरिक है नए आरबीआई गवर्नर रघुराम गोविंद राजन

भारतीय रिजर्ब बैंक के गवर्नर के रूप में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जिस नाम पर मुहर लगाई है, उससे बखेड़ा खड़ा हो गया है। रघुराम गोविंद राजन आरबीआई के नए गवर्नर नियुक्त हुए हैं, पर वे अमेरिकी नागरिक हैं।

विशेषज्ञों की राय में डी.सुब्बाराव ने बढ़ती मुद्रास्फीति और रुपए की गिरावट को ध्यान में रखते हुए सख्त मौद्रिक नीति अपनाई थी, जो अमेरिकी हित के अनुकूल नहीं थी। अब माना जा रहा है कि रघुराम गोविंद राजन के आने से अमेरिकी लॉबी को फायदा होगा।

रघुराम राजन ने डी. सुब्बाराव का स्थान लिया है। अंग्रेजी के दैनिक अखबार ‘मिलेनियम पोस्ट’ के मुताबिक रघुराम गोविंद राजन के पास अमेरिकी नागरिकता भी है। वे यूएस फेडरल रिजर्ब बोर्ड से भी जुड़े रहे हैं। इसके साथ-साथ विश्व बैंक को भी उन्होंने अपनी सेवा दी है।

अखबार ने प्रेक्षकों के हवाले से दावा किया है कि उनके इन पदों पर पहुंचने की वजह अमेरिकी लॉबी का उनके पीछ रहना है। इससे शंका गहरी हुई है। राजन को आरबीआई का गवर्नर बनाने में कहीं अमेरिकी लॉबी का तो हाथ नहीं है!

अगस्त 2012 में वित्त मंत्री ने रघुराम गोविंद राजन को वित्त मंत्रालय का प्रमुख आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया था। तब वे शिकागो विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे। रघुराम गोविंद राजन 2003-2006 तक अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में भी सेवा दे चुके हैं। अब वे आरबीआई के 23 वें गवर्नर बन रहे हैं। अखबार के मुताबिक रघुराम गोविंद राजन की नियुक्ति से प्रेक्षकों ने दावा किया है कि इस नियुक्ति से उस आशंका को बल मिला है जिसमें दावा किया गया था कि राजन के आने से भारतीय हित की जगह अमेरिकी हित को प्रमुखता मिलेगी।

विशेषज्ञों की राय में डी.सुब्बाराव ने बढ़ती मुद्रास्फीति और रुपए की गिरावट को ध्यान में रखते हुए सख्त मौद्रिक नीति अपनाई थी, जो अमेरिकी हित के अनुकूल नहीं थी। अब माना जा रहा है कि रघुराम गोविंद राजन के आने से अमेरिकी लॉबी को फायदा होगा।

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एफ़डीआई के जरिये भारत निर्माण के तर्ज पर अब कॉंग्रेस सरकार कल को प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति भी अमेरिका या अन्य देशों से आयात करे तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए

??सर्व धर्म समभाव??

 इसाई समुदाय द्वारा पोषित मीडिया वाले जैसे दीपक चौरसिया और विजय विद्रोही लगातार टीवी चैनल पर "सर्व धर्म समभाव" का पाठ पढ़ाते दिख रहे हैं! क्या यह जनता को दिग्भ्रमित करने वाला नहीं है? क्यों मीडिया वाले सही को सही और गलत को गलत कहने की हिम्मत नहीं रखते? या तो इनको इस देश की सभ्यता और संस्कृति का ज्ञान ही नहीं है या यह जानबूझ कर पैसा खा कर देशद्रोह और मक्कारी कर रहे हैं! 

क्यों मीडिया के मस्जिदों में पनपते 'इस्लामिक आतंवाद' की बात नहीं करते? क्यों वह नहीं बताते की आजकल मदरसों में केवल आतंकवादियों का निर्माण हो रहा है! क्यों नहीं बताते कि मस्जिदों में अत्याधुनिक बिना लाइसेंस के हथियार संगृहीत कर के रखे जाते हैं जिसका कि दंगा फसाद में अनुचित और बर्बर प्रयोग होता है! अगर सच से आगाह करा दिया जाता तो पता नहीं कितने मासूम लोगो की जान बच जाती! क्यों मीडिया ऐसे "सर्व धर्म समभाव" की बात कर रही है जिससे की आतंकवादियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं? आतंकवादियों को पता है कि सारे कुकर्म करने के बाद भी उनको मासूम घोषित कर दिया जायेगा और भले ही दंगा उन्होंने शुरू किया हो इसका आधा श्रेय मासूम जनता के सर मढ़ दिया जायेगा! फिर क्या वह बरी और आज़ादी से फिर दंगा फसाद करने को स्वतंत्र! क्यों मीडिया 'विषधर नाग' को 'रस्सी' जैसा हानिरहित बता कर मासूम लोगो तो खतरे की तरफ लगातार धकेल रही है? क्या इसके लिए इनके खिलाफ PIL दाखिल नहीं होनी चाहिए?

कैथोलिक चर्च में हो रहे कुकर्मो की बात क्यों नहीं करती है मीडिया? दीपक चौरसिया और विजय विद्रोही जैसे मूर्खो को तो शायद यह भी नहीं पता होगा की जीसस स्वयं क्रिस्चियन नहीं थे! रोमन लोगो ने उनको सूली पर चढ़ाया था और सौ साल स्वयं के फायदे के लिए रोमन ने ही जीसस के नाम को राजनैतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया! इसाई धर्म की स्थापना जीसस की मृत्यु के सौ साल बाद उनके जीवन पर लिखे गए विभिन्न gospels/ वृतान्तो को संग्रहीत कर के की गयी थी! सैकड़ो में लिखे गए वृतान्तो में केवल 18 वृतांत चुन कर "ओल्ड टेस्टामेंट"/बाइबिल बनाया गया था! जिन रोमांस ने जीसस का बेदर्दी से क़त्ल किया आज वह कैथोलिक चर्च खोल के धर्म के ठेकेदार बन बैठे हैं! आखिर क्यों ना हो जिसके पास स्वर्ग की चाभी होगी वही तो दुनिया पर राज करता आया है!

"सर्व धर्म समभाव" की बात बुद्ध के समय की है जब की इस्लाम और क्रिश्चियनिटी का नामो निशान नहीं था! वैसे भी हिन्दू धर्म में 'धर्म' का मतलब 'मज़हब' या 'religion' नहीं होता है! धर्म का अर्थ सही या righteous मार्ग होता है जिसमे मानव जाती, पर्यावरण, जीव जंतु, सृष्टि, अंतरिक्ष हर किसी के प्रति मानवीय उत्तरदायित्व की बात की गयी है!

"सर्व धर्म समभाव" और "वसुधैव कुटुम्बकम" का अर्थ इस देश की संस्कृति के परिपेक्ष में मेरी समझ में ईश्वरवाद और अनीश्वरवाद के सन्दर्भ में किया गया है और दोनों ही विचारधाराओ को मान्यता देते हैं! कोई भी विचारधारा हो और अगर उसका मूल तत्व मानव समाज का भला, उन्नति और उत्थान नहीं है तो वह इस देश के अनुकूल नहीं है! समय के हिसाब से अगर कुछ कुरीतियाँ आ भी गयी है तो हमे उसको अपने आप सुधारना है ना कि उसके गलत अर्थ से सामाजिक वैमनस्य को बढ़ावा देना है! मुझे ब्राह्मणों से कोई द्वेष नहीं है परन्तु यदि ब्राह्मण अपनी विद्वता, कर्म और उद्देश्य को छोड़ देता है तो उसको हम कैसे सम्मान दे सकते हैं? बिना किसी विवाद में फंसे मैं सबसे प्रार्थना करूँगा की वह श्री सी गोपालाचार्य द्वारा लिखित 'महाभारत' को पढ़ कर देख लें! जहां पर साफ़ साफ़ लिखा है की ना कोई जन्म से ब्राह्मण है और ना जन्म से शुद्र!

हमारे देश की संस्कृति में अगर हिन्दू विचारधारा को तार तार कर के चर्चा की जा सकती है तो हम इस्लाम क्रिश्चियनिटी कम्युनिज्म साधू संत सोनिया गाँधी मनमोहन सिंह को तार तार करके क्यों नहीं चर्चा कर सकते! जब हम भगवन के अस्तित्व पर प्रश्न उठा सकते हैं तब फिर बाकि सब तो बहुत छोटी मोती चीज़ें हैं!

अंत में इस्लाम के जानने वाले ज्ञाता यह बतायेंगे की खुदा ने गिब्रैल के द्वारा मोहम्मद से क्यों बात करी क्या खुदा मोहम्मद से सीधे बात नहीं कर सकते थे? मुल्ला मौलवी अपने स्वार्थ के लिए इस्लाम को तोड़ने मरोड़ने को आज़ाद क्यों हैं?

Saturday, September 7, 2013

हिन्दू साम्प्रदायिकता बनाम मुस्लिम साम्प्रदायिकता

Hindu-Muslim Communialism and Narendra Modi


हिन्दू साम्प्रदायिकता बनाम मुस्लिम साम्प्रदायिकता... 

राष्ट्रीय परिदृश्य पर नरेन्द्र मोदी के उभरने से काफी पहले अर्थात पन्द्रह साल पहले 1986 में जब देश एक युवा प्रधानमंत्री को तीन-चौथाई बहुमत देकर यह सोच रहा था कि शायद अब देश तेजी से आगे बढ़ेगा, उसी समय उस तथाकथित आधुनिक प्रधानमंत्री ने देश की सुप्रीम कोर्ट को लात मारते हुए शाहबानो नाम की मुस्लिम महिला पर अन्याय की इबारत लिख मारी. क्या उस समय तक अर्थात 1985-86 तक संघ परिवार ने राम मंदिर आंदोलन को तेज़ किया था? नहीं... फिर उस समय राजीव गाँधी की क्या मजबूरी थी? इतना जबरदस्त बहुमत होते हुए भी एक युवा प्रधानमंत्री को मुस्लिम कट्टरपंथ खुश करने की घटिया राजनीति क्यों करनी पड़ी? इसका जवाब है, काँग्रेस की दोनों हाथों में लड्डू रखने की राजनीति. सभी को मालूम है कि राम जन्मभूमि का ताला खुलवाते समय ना तो संघ का दबाव था और ना ही उस समय तक नरेन्द्र मोदी को कोई जानता भी था. लेकिन पहले काँग्रेस ने हिन्दू वोटरों को खुश करने के लिए राम जन्मभूमि का कार्ड खेला, फिर इस कदम से कहीं मुस्लिम नाराज़ ना हो जाएँ, इसलिए एक मज़लूम मुस्लिम महिला को दाँव पर लगाकर मुस्लिम तुष्टिकरण कर डाला. क्या1986 से पहले तथाकथित हिन्दू साम्प्रदायिकता”(?) नाम की कोई बात अस्तित्त्व में थी? नहीं थी. परन्तु काँग्रेस की मेहरबानी से मुस्लिम साम्प्रदायिकता जरूर 1952 से ही इस देश में लगातार बनी हुई है. इस बीच जब 1989 से 1996 के मध्य हिन्दू राजनीति को भाजपा ले उड़ी और टूटे-फूटे बहुमत के साथ सत्ता में भी आ गई, तब सेकुलरिज़्म के पुरोधा हडबडाते हुए बेचैन हो गए.


यह तो था मुस्लिम साम्प्रदायिकता के उभार का शुरुआती बिंदु और इस्लामिक वोटों के लिए नीचे गिरने के सिलसिले के आरम्भ का संक्षिप्त इतिहास... आईये अब हम पिछले कुछ वर्षों की प्रमुख घटनाओं पर संक्षेप में निगाह डाल लें. इन घटनाओं को देखने के बाद हम समझ जाएँगे कि राजीव गाँधी ने मुस्लिम वोटों के लिए जो गिरावट शुरू की थी, वह धार्मिक राजनीति अब खुल्लमखुल्ला देशद्रोह, बेशर्मी और दबंगई में बदल गई है. शुरुआत करते हैं सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले से... केन्द्र व राज्य सरकार के आँकड़ों के अनुसार पिछले दस वर्ष में गुजरात में सिर्फ 18 फर्जी एनकाउंटर के मामले सामने आए हैं, जबकि उत्तरप्रदेश में 170 से अधिक एवं आँध्रप्रदेश में 150से अधिक फर्जी पुलिस एनकाउंटर हुए हैं. फिर सोहराबुद्दीन” एनकाउंटर को ही मीडिया में इतनी प्रसिद्धि क्यों मिली? ज़ाहिर है, क्योंकि सोहराबुद्दीन चाहे कितना भी खूंखार अपराधी हो, चाहे उसके घर के कुएँ से एके-४७ राइफलें मिली हों, परन्तु वह मुसलमान है, इसलिए उसका उपयोग करके नरेन्द्र मोदी को घेरा जा सकता है. सोहराबुद्दीन के साथ ही तुलसी प्रजापत नाम के गुंडे का भी एनकाउंटर हुआ था, तुलसी प्रजापत का नाम तो अधिक सुनने में नहीं आता, क्योंकि वह हिन्दू है. यह सब पढ़ने-सुनने में बड़ा अजीब सा और साम्प्रदायिक किस्म का लग सकता है, परन्तु जब हम देखते हैं कि अचानक ही इशरत जहाँ नामक संदिग्ध लड़की के मारे जाने पर नीतीश कुमार और शरद पवार, दोनों ही उसके अब्बू बनने की कोशिश करने लगते हैं तब यह शक और भी मजबूत हो जाता है कि मुस्लिम वोटों को लुभाने के लिए सेक्यूलर गैंग” सोहराबुद्दीन मामले में किसी भी हद तक जा सकती है.

पाठकों को याद होगा कि मुम्बई के आज़ाद मैदान में रज़ा अकादमी द्वारा आयोजित रैली के बाद एकत्रित मुस्लिम भीड़ ने जिस तरह की अनियंत्रित हिंसा की, पुलिस वालों को पीटा गया, महिला कांस्टेबलों की बेइज्जती की गई और तो और शहीद स्मारक पर मुल्लों द्वारा लातें और डंडे बरसाए गए. संदिग्ध इतिहास वाली रज़ा अकादमी को रैली की अनुमति देना सही निर्णय था या नहीं यह अलग बात है, परन्तु इस मुस्लिम भीड़ द्वारा इस हिंसक रैली के बाद राज ठाकरे के दबाव में जब महाराष्ट्र सरकार की पुलिस ने बिहार जाकर एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया, तब भी नीतीश कुमार ने सहयोग करने की बजाय मुस्लिम कार्ड खेल लिया, जबकि महाराष्ट्र के गृह मंत्री आरआर पाटिल NCP के ही मंत्री हैं. जो शरद पवार और नीतीश कुमार जो आज इशरत जहाँ को बेटी-बेटी-बेटी कहने की होड़ लगा रहे हैं,वे उस समय आमने-सामने खड़े थे.

मुस्लिम साम्प्रदायिकता को बड़ी बेशर्मी और भौंडे अंदाज़ में पालने-पोसने की कई घटनाओं में से एक सभी को याद है और वह है बाटला हाउस एनकाउंटर. सोहराबुद्दीन एनकाउंटर पर रुदालीगान करने वाले सभी सेक्यूलर इस मामले में भी पुनः शहज़ाद नामक आतंकवादी के पक्ष में आँसू बहाते नज़र आए. जिस तरह से 26/11 हमले के समय हेमंत करकरे के बलिदान की बेइज्जती करके उस घटना को भी संघ के माथे थोपने की भद्दी कोशिश की गई थी, बाटला हाउस मामले में भी शहीद हुए इंस्पेक्टर मोहनचंद्र शर्मा को अपराधी साबित करने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी गई. यहाँ तक कि आजमगढ़ से ट्रेन भर-भरकर मुसलमानों को दिल्ली में प्रदर्शन हेतु लाया गया. कोर्ट का निर्णय आने के बावजूद मुस्लिम वोटों के सौदागर अभी भी मोहनचंद्र शर्मा की मिट्टी पलीद करने में लगे हुए हैं.

सोहराबुद्दीन पर मची छातीकूट, आज़ाद मैदान हिंसा पर रहस्यमयी चुप्पी और इशरत जहाँ को बेटी बनाने की फूहड़ होड़ के बाद मुस्लिम साम्प्रदायिकता की राजनीति का घिनौना चेहरा सामने आया उत्तरप्रदेश में, जहाँ के रेत माफिया पर नकेल कसने वाली युवा, कर्मठ आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति को निलंबित करने के लिए अखिलेश यादव नाम के एक और युवा”(?) मुख्यमंत्री ने रमजान माह में एक मस्जिद की दीवार गिराने का स्पष्ट बहाना बना लिया, ताकि मुस्लिम वोटों की खेती की जा सके. थोड़ा-बहुत हल्ला-गुल्ला मचाया गया, लेकिन जैसा कि होता है उत्तरप्रदेश के अन्य मंत्रियों ने अपने बेतुके बयानों से आग में घी डालने का ही काम किया. किसी को भी इस देश के प्रशासनिक ढाँचे, संघीय व्यवस्था अथवा एक युवा अफसर के गिरते मनोबल के बारे में कोई चिंता नहीं थी. सोनिया गाँधी ने सिर्फ एक चिठ्ठी लिखकर अपने कर्त्तव्यों की इतिश्री कर ली, परन्तु संसद में सपा-बसपा के ऑक्सीजन पर टिकी हुई काँग्रेस इस मामले को अधिक तूल देना नहीं चाहती थी... क्योंकि उसके सामने भी मुस्लिम वोटों की फसल का सवाल था...

इन सारी चुनावी सेकुलर बेशर्मियों के बीच एक और बात को च्युइंग-गम की तरह चबाया गया. वह है मीडिया की सांठगांठ के साथ तैयार किया गयाइस्लामी टोपी प्रकरण. पिछले एक साल में तो इस मुद्दे पर इतना कुछ कहा जा चुका है कि इस्लाम में पवित्र मानी जाने वाली सफेद टोपी अब हँसी और खिल्ली का विषय बन चुकी है. चंद बिके हुए लोगों ने ऐसा माहौल रच दिया गया है, मानो देश के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार होने के लिए विकास कार्य, दूरदृष्टि, ईमानदारी वगैरह की जरूरत नहीं है, बल्कि जालीदार टोपी लगाना ही एकमात्र क्वालिफिकेशन है. इफ्तार पार्टियों के नाम पर मुस्लिम वोटों की दलाली का जो भौंडा और भद्दा प्रदर्शन होता है, उसका तो कोई जवाब ही नहीं है. भाजपा के दूसरे मुख्यमंत्री और नेता भी इस चूहा-दौड़ में शामिल दिखाई देते हैं. 1996 की सेकुलर गिरोहबाजी से 13 दिनों और13 माह में भाजपा की सरकारें गिराने वालों की हरकतें देख चुकी देश की जनता फिर से देख रही है कि एक अकेले नरेन्द्र मोदी के खिलाफ किस तरह यह गैंग ना सिर्फ एकजुट है, बल्कि इन लोगों को मुस्लिम साम्प्रदायिकता भड़काने से भी गुरेज़ नहीं है. इसीलिए कभी यह गैंग सभी मुसलमानों कोकुत्ते का पिल्ला साबित करने में जुट जाती है तो कभी टोपी और पाँच रूपए के टिकिट जैसे क्षुद्र मुद्दों पर टाईम-पास करती है.

तात्पर्य यह है कि गत कुछ वर्षों में बड़े ही सुनियोजित ढंग से मुस्लिम साम्प्रदायिकता को खाद-पानी दिया जा रहा है, और मजे की बात यह है कि ये सब कुछ साम्प्रदायिक(?) ताकतों से लड़ने के नाम पर किया जा रहा है. क्या पिछले दस वर्ष में कभी भाजपा ने राम मंदिर के नाम पर आंदोलन-प्रदर्शन किया है? क्या विहिप और बजरंग दल ने पिछले दस वर्ष में गौ-हत्या अथवा हिन्दू धर्म के किसी अन्य मुद्दे पर कोई विशाल या हिंसात्मक आंदोलन किया है? क्या नरेन्द्र मोदी के गुजरात में पिछले दस वर्ष में कोई छोटा-बड़ा दंगा हुआ है? क्या शिवराज-रमण सरकारों के शासनकाल में मुसलमानों के ऊपर अत्याचार बढ़ाए गए हैं?? इन सभी सवालों का जवाब नहीं में आता है, तो फिर सेकुलरिज़्म के घड़ियाल” मुस्लिम साम्प्रदायिकता के उभार को तथाकथित हिन्दू आतंक(?) के जवाब में होने वाली घटना कैसे कह सकते हैं... यह तो चोरी और सीनाजोरी वाली हरकत हो गई.

इसी सीनाजोरी का एक और प्रदर्शन हाल ही में जम्मू क्षेत्र के किश्तवाड में देखने को मिला, जहाँ ईद की नमाज़ के बाद मुस्लिमों की भारी भीड़ ने भारत विरोधी नारे लगाए, जिसका विरोध करने पर असंगठित हिंदुओं को जमकर सबक सिखाया गया. सैकड़ों दुकानें जलीं, संपत्ति लूटी गई, कुछ घायल हुए और कुछ मारे गए. जवाब में उमर अब्दुल्ला ने भी देश के इतिहास में हुए एकमात्र दंगे”(?) यानी गुजरात का उदाहरण देकर उसे हल्का करने की कोशिश कर ली. अब्दुल्ला का वह बयान तो और भी हैरतनाक था जिसमें उन्होंने कहा कि  कश्मीर में ईद की नमाज के बाद अथवा जुमे की नमाज के बाद भारत विरोधी नारे लगना तो आम बात है... यानी उमर अब्दुल्ला कहना चाहते हैं कि पाकिस्तान जिंदाबाद कहना एक सामान्य सी बात है और उसका विरोध नहीं किया जाना चाहिए. क्या अब भी कोई शक बाकी रह गया है कि कश्मीर को पंडितों से खाली करने के बाद अब जेहादियों की नज़रें जम्मू क्षेत्र पर भी हैं, और इस मंशा को हवा देने में बाकी भारत में जारी मुस्लिम साम्प्रदायिकता का बड़ा हाथ है, इस साधारण सी बात को सेकुलर समझना ही नहीं चाहते. हिन्दू आतंक नाम के जिस हौए को वे खड़ा करना चाहते हैं, उसके पैर इतनी खोखली जमीन पर खड़े हैं कि महाराष्ट्र सरकार साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ अभी तक ठीक से चार्जशीट भी फ़ाइल नहीं कर पाई है, सरकारी प्रेस की खबरों पर यकीन करें तो असीमानंद पर NIA के बयान भी लगातार बदल रहे हैं, भाजपा अथवा कोई हिंदूवादी संगठन इनकी मदद के लिए खुल्लमखुल्ला सामने नहीं आ रहा, जबकि शहजाद का साथ देने के लिए दिग्विजय सिंह डट चुके हैं, सोहराबुद्दीन के लिए तीस्ता जावेद सीतलवाड बैटिंग कर रही हैं, आज़ाद मैदान की घटना को मामूली बताकर खारिज करने की कोशिशें हो रही हैं, किश्तवाड से हिन्दू पलायन करने की गुहार लगा रहे हैं कोई सुनवाई नहीं हो रही... लेकिन सभी पार्टियों के दिलो-दिमाग पर नरेन्द्र मोदी नाम का तूफ़ान ऐसा हावी है कि उन्हें मुस्लिम वोटों से आगे कुछ दिखाई नहीं दे रहा, मुस्लिम साम्प्रदायिकता को बढ़ाने के लिए नित-नए रास्ते खोजे जा रहे हैं, ताकि मोदी के नाम से मुसलमानों को धमकाकर रखा जा सके.

फिल्म मिशन इम्पासिबल (भाग-२) में एक वैज्ञानिक कहता है, नायक गढ़ने के लिए पहले एक खलनायक गढ़ना जरूरी है... मुस्लिम वोटरों की दलाली करने वाले नेताओं और दलों की आपसी खींचतान के चलते उन्होंने आपस में एक गैंग बनाकर पहले नरेन्द्र मोदी को खलनायक बनाया, ताकि वे खुद को मुस्लिमों के एकमात्र मसीहा और खैरख्वाह साबित कर सकें, उनके नायक बन सकें. वर्ना क्या वजह है कि जब भी गुजरात दंगों की बात होती है या चर्चाएँ होती हैं, उस समय उन दंगों के मुख्य कारक तत्त्व गोधरा ट्रेन हादसे को ना सिर्फ भुला दिया जाता है, बल्कि उसे चुपचाप दरी के नीचे छिपाने की भौंडी कोशिशें लगातार जारी रहती हैं. क्या 2001 से पहले भारत में कहीं दंगे नहीं हुए थे? क्या 2001 के बाद भारत में कभी दंगे नहीं हुए? क्या 2001 से पहले के गुजरात का हिन्दू-मुस्लिम दंगों का इतिहास लोगों को मालूम नहीं है, जब चिमनभाई पटेल के शासन में दो-दो माह तक दंगे चला करते थे? सेकुलरिज़्म की डामर अपने चेहरे पर पोते हुए कांग्रेसियों और वामपंथियों को सब मालूम है कि काँग्रेस शासन के दौरान असम के नेल्ली से लेकर मलियाना तक सैकड़ों मुसलमानों का नरसंहार हुआ था, और उधर तीस साल के वामपंथी कुशासन में पश्चिम बंगाल में गरीबी तो बढ़ी ही, साथ ही मुस्लिम वोट बैंक की घटिया राजनीति के चलते बांग्लादेश से आए हुएसेक्यूलर मेहमानों ने पश्चिम बंगाल के सत्रह जिलों और असम के आठ जिलों की आबादी को मुस्लिम बहुल बना डाला. क्या सेक्यूलर रतौंधी से ग्रस्त लोग कभी इसे देख पाएँगे?

नरेन्द्र मोदी की आलोचना करते समय यह गैंग सुविधानुसार यह भूल जाती है कि पिछले दस वर्ष में गुजरात में एक भी दंगा नहीं हुआ, क्या यह बड़ी उपलब्धि नहीं है? बिलकुल है, परन्तु जैसा कि मैंने ऊपर कहा, खुद को नायक साबित करने के चक्कर में खलनायक गढा गया है, और जब यह कथित खलनायक गुजरात के विकास को शो-केस में रखकर वोट जुटाने की कोशिश में लगा है, तो रह-रहकर काँग्रेस-सपा-बसपा-जदयू-वामपंथ सभी को सेकुलरिज़्म का बुखार चढ़ने लगता है. नरेन्द्र मोदी से मुकाबले के लिए इन लोगों की निगाह में सिर्फ एक ही रामबाण है, और वह है थोकबंद मुस्लिम वोट. ज़ाहिर है कि मुस्लिम वोट देश की १०० से अधिक लोकसभा सीटों पर निर्णायक है, इसलिए आने वाले दिनों में इस पैमाने पर इन्हीं के बीच आपस में घमासान मचेगा, जिसका केन्द्र बिंदु उत्तरप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल होंगे.

हिन्दू साम्प्रदायिकता का उभार और चरम 1988 से 1993 तक ही कहा जा सकता है. 2001 में गुजरात की घटना सिर्फ गोधरा की प्रतिक्रिया थी, लेकिन पिछले साठ वर्षों में काँग्रेस सहित अन्य तथाकथित सेकुलर पार्टियों ने मुस्लिम साम्प्रदायिकता को बढ़ाया और पाला-पोसा है, उसके जवाब में यदि मई २०१४ के लोकसभा चुनावों में हिन्दू उभार सामने आ गया तो मुश्किल हो जाएगी. संक्षेप में कहूँ तो, राजनीति करें, लेकिन रबर को इतना भी ना खींचें कि वह टूट ही जाए.... यदि इसी तरह मुस्लिम साम्प्रदायिकता को बढ़ोतरी दी गई, तो 1989-1991 की तरह पुनः हिन्दू साम्प्रदायिकता का उभार ना हो जाए... यदि ऐसा हुआ तो राजनीतिज्ञों का कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन आम गरीब मुसलमान को ही कष्ट उठाने पड़ेंगे.

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